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Barabanki News: रेलवे की सौगात, सरयू पर 1,037 मीटर लंबा पुल तैयार

Wed, 03 Dec 2025 12:49 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी Updated Wed, 03 Dec 2025 12:49 AM IST
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A gift from the Railways, a 1,037-meter-long bridge over the Saryu is ready.
बाराबंकी। जिले में घाघराघाट-चौकाघाट स्टेशनों के बीच सरयू नदी पर बना तीसरा रेल पुल पांच दिसंबर को यात्रियों और मालगाड़ियों के लिए खुलने जा रहा है। 1,037 मीटर लंबा और 17 स्पैन वाला यह पुल भारतीय रेलवे इंजीनियरिंग में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह पुल आने वाले 50 सालों के भविष्य को ध्यान में रखकर बनाया गया है।
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पुल पर अभी केवल एक रेलवे लाइन बिछाई गई है, लेकिन इसका फाउंडेशन (नींव) डबल लाइन मानक के अनुरूप तैयार किया गया है। इसका मतलब है कि भविष्य में चौथी लाइन या अतिरिक्त निर्माण के लिए अलग से फाउंडेशन की आवश्यकता नहीं होगी और चौथा पुल नहीं बनाना पड़ेगा। यह निर्माण समय, संसाधन और धन की बड़ी बचत करेगा। रेलवे ने इस पुल के माध्यम से यह संदेश दिया है कि अब हर नई परियोजना दीर्घकालिक स्थायित्व और क्षमता को ध्यान में रखकर बनाई जाएगी।
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यह नया पुल भारत के गवर्नर जनरल लॉर्ड एल्गिन के नाम पर बने पुराने एल्गिन ब्रिज का छोटा भाई है। इस नये पुल के चालू होने से पुराने एल्गिन ब्रिज पर आने वाले भार को साझा किया जाएगा, जिससे पुरानी संरचना की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।
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127 साल पुराना है सरयू पर पुलों का इतिहास
सरयू नदी पर पुलों के निर्माण का एक लंबा इतिहास रहा है। पहले पुल (एल्गिन ब्रिज) का कार्य वर्ष 1898 में घाघरा घाट-चौकाघाट मीटर गेज लाइन के निर्माण के साथ पूरा हुआ था। इसका नाम तत्कालीन गवर्नर जनरल लॉर्ड एल्गिन के नाम पर एल्गिन ब्रिज पड़ा। वर्ष 1981 में गोंडा-बाराबंकी खंड के आमान परिवर्तन (मीटर गेज से बड़ी लाइन) के दौरान इसे बड़ी लाइन मानक के अनुरूप बनाया गया। सरयू पर दूसरे पुल का निर्माण घाघरा घाट-चौकाघाट खंड के दोहरीकरण के दौरान वर्ष 2012-13 में हुआ था। इसे 14 अप्रैल, 2013 को यातायात के लिए खोल दिया गया था। अब यह तीसरा पुल बनकर तैयार हुआ है।

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तकनीकी कौशल का प्रत्यक्ष उदाहरण
नया रेल पुल न केवल यातायात की सुविधा को बढ़ाएगा, बल्कि क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति प्रदान करेगा। विशेषज्ञ इस पुल को इंजीनियरिंग की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक मान रहे हैं। जो तकनीकी कौशल और भविष्य की योजना का प्रत्यक्ष उदाहरण है।
- पंकज कुमार सिंह, मुख्य जनसंपर्क अधिकारी पूर्वोत्तर रेलवे
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