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स्वस्थ प्रतिस्पर्धा ला रही बाराबंकी की मेधा में निखार
Barabanki
Updated Tue, 27 May 2014 05:32 AM IST
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बाराबंकी। यह सवाल किसी के भी जेहन में कौंध सकता है कि आखिर बाराबंकी में क्या है जो यूपी बोर्ड की परीक्षाओं में यहां की ही मेधाएं इधर कुछ वर्षों में लगातार परचम फहरा रही हैं। इंटरमीडिएट की बोर्ड परीक्षा में तो लगातार यह चौथा वर्ष है जब बाराबंकी ही टॉपर बना है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि बाराबंकी में अब तक जितने भी टॉपर्स निकले हैं वह सब नॉन एडेड विद्यालय से ही हैं। इस संबंध में विभिन्न विद्यालयों से जुडे़ प्रधानाचार्य, प्रबंधक और शिक्षकों से बातचीत की गई तो नतीजा निकला कि यह सब प्रतिस्पर्धा का परिणाम है और यह प्रतिस्पर्धा विद्यालय प्रबंधतंत्र से लेकर छात्रों तक में पैदा हुई है।
2005 में महारानी लक्ष्मीबाई मेमोरियल इंटर कॉलेज के छात्र शैलेश शर्मा ने प्रदेश की सूची में दूसरा स्थान प्राप्त किया था। कहते हैं कि प्रतिस्पर्धा यहीं से शुरू हुई। इस वर्ष भी इस कॉलेज में इंटरमीडिएट में 905 छात्र बैठे थे जिसमें 286 छात्र 80 से लेकर 97 प्रतिशत तक अंक हासिल किए हैं। यहां के प्रधानाचार्य रामकिशोर शुक्ला कहते हैं कि निश्चित रूप से बाराबंकी में निजी कॉलेजों में शिक्षा की गुणवत्ता कोे लेकर प्रतिस्पर्धा बढ़ी है। शैक्षिक गुणवत्ता की प्रतिस्पर्धा में वित्तविहीन विद्यालय शामिल हैं। यही कारण है कि बाराबंकी में शिक्षा का स्तर इंटरमीडिएट तक काफी अच्छा है। रामसेवक इंटर कॉलेज के प्रबंधक डॉ. विकास यादव कहते हैं कि राजधानी से सटा होने और बच्चों के भविष्य को लेकर उनके अभिभावक काफी गंभीर हैं। अभिभावकों की इस चिंता ने ही विद्यालयों के बीच प्रतिस्पर्धा को बढ़ा दिया है। बाराबंकी के लिए तो लखनऊ बेहतर विकल्प था वहां भी अच्छे विद्यालय हैं लेकिन आज अगर बाराबंकी के कई निजी विद्यालयों में हाईस्कूल व इंटरमीडिएट छात्रों की बेहतर संख्या है तो इसका कारण ये है कि यहां बेहतर शिक्षा मिल रही है। सांई इंटर काॅलेज के शिक्षक सुरेन्द्र वर्मा कहते हैं बाराबंकी के छात्रों के लगातार टॉप करने से सवाल खड़ा होता है कि कहीं कुछ दाल में काला तो नहीं पर ऐसा है नहीं, शिक्षा में माफियागिरी कोई एक संस्थान कुछ निश्चित समय तक ही चला सकता है लेकिन बाराबंकी में ऐसा नहीं है, कई संस्थान हैं जिनके यहां की मेधा ने इधर के कुछ वर्षों में बोर्ड की परीक्षाओं में प्रतिभा का लोहा मनवाया है। पायनियर इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्य रेखा मिश्रा कहती हैं कि उनके विद्यालय के किसी बच्चे ने टॉप भले न किया हो लेकिन शैक्षिक प्रतिस्पर्धा का नतीजा है कि विद्यालयों की शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार हो रहा है। यंग स्ट्रीम इंटर कालेज के प्रबंधक केएम चतुर्वेदी कहते हैं कि पिछली बार 484 अंक पाकर इंटरमीडिएट की परीक्षा इसी जिले की छात्रा अर्जिता वर्मा ने टॉप किया था। इस बार यहीं की दो छात्राओं ने 487 अंक पाकर टॉप किया है। इस बार 484 अंक पाने वाली छात्रा मेरिट में तीसरे स्थान पर हैै। यह प्रतिस्पर्धा का ही नतीजा है कि बाराबंकी मेरिट को दिन ब दिन बेहतर कर रहा है।
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2005 में महारानी लक्ष्मीबाई मेमोरियल इंटर कॉलेज के छात्र शैलेश शर्मा ने प्रदेश की सूची में दूसरा स्थान प्राप्त किया था। कहते हैं कि प्रतिस्पर्धा यहीं से शुरू हुई। इस वर्ष भी इस कॉलेज में इंटरमीडिएट में 905 छात्र बैठे थे जिसमें 286 छात्र 80 से लेकर 97 प्रतिशत तक अंक हासिल किए हैं। यहां के प्रधानाचार्य रामकिशोर शुक्ला कहते हैं कि निश्चित रूप से बाराबंकी में निजी कॉलेजों में शिक्षा की गुणवत्ता कोे लेकर प्रतिस्पर्धा बढ़ी है। शैक्षिक गुणवत्ता की प्रतिस्पर्धा में वित्तविहीन विद्यालय शामिल हैं। यही कारण है कि बाराबंकी में शिक्षा का स्तर इंटरमीडिएट तक काफी अच्छा है। रामसेवक इंटर कॉलेज के प्रबंधक डॉ. विकास यादव कहते हैं कि राजधानी से सटा होने और बच्चों के भविष्य को लेकर उनके अभिभावक काफी गंभीर हैं। अभिभावकों की इस चिंता ने ही विद्यालयों के बीच प्रतिस्पर्धा को बढ़ा दिया है। बाराबंकी के लिए तो लखनऊ बेहतर विकल्प था वहां भी अच्छे विद्यालय हैं लेकिन आज अगर बाराबंकी के कई निजी विद्यालयों में हाईस्कूल व इंटरमीडिएट छात्रों की बेहतर संख्या है तो इसका कारण ये है कि यहां बेहतर शिक्षा मिल रही है। सांई इंटर काॅलेज के शिक्षक सुरेन्द्र वर्मा कहते हैं बाराबंकी के छात्रों के लगातार टॉप करने से सवाल खड़ा होता है कि कहीं कुछ दाल में काला तो नहीं पर ऐसा है नहीं, शिक्षा में माफियागिरी कोई एक संस्थान कुछ निश्चित समय तक ही चला सकता है लेकिन बाराबंकी में ऐसा नहीं है, कई संस्थान हैं जिनके यहां की मेधा ने इधर के कुछ वर्षों में बोर्ड की परीक्षाओं में प्रतिभा का लोहा मनवाया है। पायनियर इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्य रेखा मिश्रा कहती हैं कि उनके विद्यालय के किसी बच्चे ने टॉप भले न किया हो लेकिन शैक्षिक प्रतिस्पर्धा का नतीजा है कि विद्यालयों की शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार हो रहा है। यंग स्ट्रीम इंटर कालेज के प्रबंधक केएम चतुर्वेदी कहते हैं कि पिछली बार 484 अंक पाकर इंटरमीडिएट की परीक्षा इसी जिले की छात्रा अर्जिता वर्मा ने टॉप किया था। इस बार यहीं की दो छात्राओं ने 487 अंक पाकर टॉप किया है। इस बार 484 अंक पाने वाली छात्रा मेरिट में तीसरे स्थान पर हैै। यह प्रतिस्पर्धा का ही नतीजा है कि बाराबंकी मेरिट को दिन ब दिन बेहतर कर रहा है।
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