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किसानों का दर्द समझने वाला ही बने सांसद
Barabanki
Updated Sat, 19 Apr 2014 05:30 AM IST
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बाराबंकी। लोकसभा चुनाव में मतदान का दिन नजदीक आता जा रहा है। हर स्तर पर प्रत्याशी के चुनाव को लेकर मंथन तेज हो चला है। किसानों में भी उत्सुकता दिखाई पड़ रही है। अमर उजाला के सरोकार कार्यक्रम के तहत शुक्रवार को कंपनी बाग स्थित कार्यालय में किसानों के फोकस ग्रुप का आयोजन किया गया। इसमें किसानों ने अपने पुरानेे अनुभवों को साझा करते हुए चुनाव में एक नेक, ईमानदार, विकास की सोच वाले और किसान हितैषी प्रत्याशी चुने जाने पर बेबाकी से राय दी। कहा, हमारा सांसद ऐसा होना चाहिए जो किसानों की हर समस्या से वाकिफ हो तथा उसके निराकरण की क्षमता रखता हो। किसानों का दर्द समझने वाला ही हमारा सांसद होना चाहिए।
सरोकार कार्यक्रम के दौरान सभी ने कहा कि हर बार नेताओं ने झूठे वादों के सहारे किसानों को छला है। यही कारण है कि आज किसानों के सामने वही समस्याएं मुंह बाए खड़ी हैं जो आजादी के दौरान थीं। विकास के नाम पर किसानों को अभी तक सिर्फ झुनझुना ही मिला है। आज भी बिजली, पानी व बीज खाद की समस्या से किसान जूझता है। शुगर मिलें बंद होने से किसानों के सामने समस्या खड़ी हो रही है कि वह अपने उत्पाद (गन्ना) को कहां बेचे। क्षेत्र में गन्ने का रकबा घटता जा रहा है। प्रशासन स्तर पर भी अधिकारियों व कर्मचारियों द्वारा शोषण हो रहा है। खाद में मिलावटखोरी होने से भी किसानों की फसलों का उत्पादन प्रभावित हो रहा है। शासन द्वारा जो भी योजना चलाई जाती है वह एक वर्ग तक ही सीमित रहती है। सीमांत किसानों तक योजनाओं का लाभ ही नहीं मिलता। किसानों का कहना है कि अब बहुत हो चुका है। किसानों को प्रलोभन देकर उन्हें खूब ठगा गया है लेकिन अब ऐसा नहीं होने देंगे। सभी ने कहा कि हमारा सांसद ऐसा होना चाहिए जो किसानों का हितैषी हो। जनहितों के लिए संघर्षशील और संवेदनशील व विकास की सोच वाला हो। किसानों की समस्याओं को सदन में उठाकर निस्तारण कराए। बंद चीनी मिलों के पुनर्जीवन का प्रयास करे जिससे किसानों को लाभ मिले, साथ ही स्थानीय लोगों को रोजगार मुहैया हो सके। किसानों ने सभी वर्ग के लोगों से ऐसे सांसद के चुनाव के लिए सोच समझकर शत-प्रतिशत मतदान करने की अपील की। कहा कि लोगों को प्रत्याशी के गुणों को देख कर मतदान करना चाहिए। जाति धर्म, पार्टी, निजी संबंधों के आधार पर नहीं देश हित, जनहित को ध्यान में रख कर मतदान करें।
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सरोकार कार्यक्रम के दौरान सभी ने कहा कि हर बार नेताओं ने झूठे वादों के सहारे किसानों को छला है। यही कारण है कि आज किसानों के सामने वही समस्याएं मुंह बाए खड़ी हैं जो आजादी के दौरान थीं। विकास के नाम पर किसानों को अभी तक सिर्फ झुनझुना ही मिला है। आज भी बिजली, पानी व बीज खाद की समस्या से किसान जूझता है। शुगर मिलें बंद होने से किसानों के सामने समस्या खड़ी हो रही है कि वह अपने उत्पाद (गन्ना) को कहां बेचे। क्षेत्र में गन्ने का रकबा घटता जा रहा है। प्रशासन स्तर पर भी अधिकारियों व कर्मचारियों द्वारा शोषण हो रहा है। खाद में मिलावटखोरी होने से भी किसानों की फसलों का उत्पादन प्रभावित हो रहा है। शासन द्वारा जो भी योजना चलाई जाती है वह एक वर्ग तक ही सीमित रहती है। सीमांत किसानों तक योजनाओं का लाभ ही नहीं मिलता। किसानों का कहना है कि अब बहुत हो चुका है। किसानों को प्रलोभन देकर उन्हें खूब ठगा गया है लेकिन अब ऐसा नहीं होने देंगे। सभी ने कहा कि हमारा सांसद ऐसा होना चाहिए जो किसानों का हितैषी हो। जनहितों के लिए संघर्षशील और संवेदनशील व विकास की सोच वाला हो। किसानों की समस्याओं को सदन में उठाकर निस्तारण कराए। बंद चीनी मिलों के पुनर्जीवन का प्रयास करे जिससे किसानों को लाभ मिले, साथ ही स्थानीय लोगों को रोजगार मुहैया हो सके। किसानों ने सभी वर्ग के लोगों से ऐसे सांसद के चुनाव के लिए सोच समझकर शत-प्रतिशत मतदान करने की अपील की। कहा कि लोगों को प्रत्याशी के गुणों को देख कर मतदान करना चाहिए। जाति धर्म, पार्टी, निजी संबंधों के आधार पर नहीं देश हित, जनहित को ध्यान में रख कर मतदान करें।
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