{"_id":"125-71788","slug":"Barabanki-71788-125","type":"story","status":"publish","title_hn":"गांवों को 12 घंटे बिजली आपूर्ति का दावा धड़ाम ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गांवों को 12 घंटे बिजली आपूर्ति का दावा धड़ाम
Barabanki
Updated Sat, 28 Dec 2013 05:45 AM IST
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बाराबंकी। लोकसभा चुनाव नजदीक देख प्रदेश सरकार को गांवाें की चिंता हुई तो 12 घंटे बिजली सप्लाई का आदेश हो गया। सरकार का दावा है कि दो दिन से गांवों को 12 घंटे बिजली मिल रही है, जबकि हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। तहसील हैदरगढ़, फतेहपुर, रामसनेहीघाट व सिरौलीगौसपुर के गांवों में अभी भी पांच से आठ घंटे ही बिजली मिल पा रही है। यही हाल अन्य तहसीलों के गांवों का भी है।
प्रदेश सरकार का दावा है कि 26 दिसंबर से ग्रामीण अंचलों में विद्युत सप्लाई दो घंटे बढ़ा दी गई है। सिंचाई के मद्देनजर गांवों में अब 10 की बजाय 12 घंटे बिजली आपूर्ति करने का आदेश है। इसमेें छह घंटे दिन में और छह घंटे रात में विद्युत आपूर्ति की जानी है। उम्मीद थी कि नया शिड्यूल लागू होने के बाद ग्रामीण इलाकों में 12 घंटे बिजली सप्लाई मिल सकेगी, लेकिन जमीनी हकीकत इससे जुदा है। गांवों में 12 घंटे बिजली सप्लाई का दावा खोखला ही साबित हो रहा है।
बाक्स...
फतेहपुर के गांव ईशेपुर मेें करीब 15 वर्ष पूर्व विद्युतीकरण हुआ था, लेकिन विद्युत व्यवस्था बदहाल स्थिति में है। खंभों की कमी के चलते बल्लियों के सहारे बिजली के तार खींचे गए हैं। इस गांव में करीब 50 कनेक्शन हैं।
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ग्राम ईशेपुर निवासी गोकरन प्रसाद कहते हैं कि बिजली आधी को रात आती है और कब चली जाती है, इसका पता ही नहीं चलता। दिन में सप्लाई के दौरान बिजली कई बार कट जाती है। कुल मिलाकर पांच-छह घंटे ही बिजली मिल रही है।
उमेश चंद्र का कहना है कि सरकार द्वारा 12 घंटे आपूर्ति की घोषणा के अनुसार बिजली नहीं मिल रही है। ग्रामीणों को सिर्फ बरगलाया जा रहा है। थोड़ा सुधार जरूर हुआ है, लेकिन इससे किसानों का कोई भला होने वाला नहीं है।
जयकरन ने कहा कि गांव वालों की कौन सुनता है। सरकार भले ही दावा कर रही है, लेकिन हकीकत यह है कि बिजली पांच-छह घंटे से ज्यादा नहीं मिल रही है। गांवों में सिंचाई के लिए बिजली की बहुत जरूरत है, लेकिन इसमें सुधार नहीं हो पा रहा है।
बाक्स.....
तहसील रामसनेहीघाट के ग्राम बनीकोडर का विद्युतीकरण करीब 35 वर्ष पूर्व कराया गया था। यहां करीब 250 कनेक्शन हैं, लेकिन यहां भी 10 या 12 घंटे बिजली का मिलना सपने जैसा है। ऊपर से लोकल फाल्ट घाव में खाज जैसा है।
ग्राम बनीकोडर निवासी जगन्नाथ कहते हैं कि रात में बिजली 10 बजे आई और रात ही में चली गई। सात-आठ घंटा से ज्यादा बिजली सप्लाई नहीं मिल रही है।
बनीकोडर गांव के ही अजय कहते हैं कि बिजली के बार-बार कटने से गेहूं की फसल की सिंचाई नहीं हो पा रही है। दिन मेें कई बार बिजली कट जा रही है। दिन व रात मिलाकर बमुश्किल सात घंटे ही बिजली मिल रही है।
यहीं के निवासी अर्पित कहते हैं कि सरकार ने घोषणा कर दी है, लेकिन गांवों में अभी मूर्तरूप नहीं दिया जा सका है। पावर कॉर्पोरेशन अपने पुराने ढर्रे पर ही चल रहा है। मामूली सुधार के बाद सात घंटे ही बिजली सप्लाई मिल रही है।
बाक्स.....
तहसील सिरौलीगौसपुर की ग्राम पंचायत बदोसरायं में करीब 32 वर्ष पूर्व विद्युतीकरण कराया गया था। लगभग साढे़ तीन सौ कनेक्शन वाले इस गांव में जर्जर तारों से विद्युत आपूर्ति की जा रही है। यहां के लोग लो वोल्टेज से जूझ रहे हैं।
ग्राम बदोसरायं निवासी मो. हलीम कहते हैं कि रात के समय दी जा रही विद्युत आपूर्ति से किसानों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। रात में ठंड के कारण खेतों की सिंचाई नहीं हो पा रही है और दिन मेें नाम मात्र की बिजली सप्लाई हो रही है। यहां कुल छह से आठ घंटे बिजली आ रही है।
अंकित गुप्ता ने बताया कि 12 घंटे की बात तो दूर की कौड़ी है। सही सलामत आठ घंटे बिजली नहीं मिल पाती है। विद्युत आपूर्ति के समय बार-बार कटौती से परेशानी हो रही है। खेत में पानी पहुंचता है कि बिजली कट जाती है। सिंचाई के लिए बिजली का इंतजार करना पड़ता है।
अरुण कुमार सिंह का कहना है कि दिन में दो घंटे से अधिक बिजली नहीं रहती है। दिन-रात मिलाकर करीब सात से आठ घंटे ही बिजली मिल रही है। इसके अलावा लो-वोल्टेज के कारण कोई कार्य नहीं हो पा रहा है।
बाक्स.....
तहसील हैदरगढ़ में त्रिवेदीगंज विकास क्षेत्र स्थित ग्राम पंचायत बहुता का 1964-65 मेें विद्युतीकरण कराया गया था। इस ग्राम पंचायत को हैदरगढ़ उपकेंद्र से बिजली मिलती है। बहुता गांव में कुल 67 विद्युत कनेक्शन हैं। ट्रांसफार्मर से आपूर्ति लाइन में आए दिन खराबी से ग्रामीण परेशान रहते हैं।
ग्राम बहुता निवासी कमलाकांत तिवारी ने कहा कि छह से सात घंटे बिजली मिल रही है। लो-वोल्टेज से विद्युत उपकरण फ्रिज आदि नहीं चल पा रहे हैं।
अरविंद अवस्थी कहते हैं कि सरकार सिर्फ दावा ही करती है, बिजली नहीं देती। 12 घंटे की जगह सरकार बिजली 10 घंटे ही दे, लेकिन लगातार बिजली दे तो किसान उसका फायदा उठा सकेंगे। कहा कि बमुश्किल सात घंटे बिजली मिल रही।
बहुता मजरे श्रीकृष्णपुर निवासी रामफेर ने बताया कि रात में मिली बिजली का ग्रामीण उपयोग नहीं कर पाते हैं और सुबह जागने से पहले बिजली चली जाती है। दिन में कई बार कटौती के कारण परेशानी हो रही है। कुल छह से सात घंटे ही बिजली मिल रही है।
बाक्स-
गांवों में 12 घंटे बिजली देने का प्रयास किया जा रहा है। लोकल फाल्ट होने के चलते बिजली आपूर्ति बाधित हो जाती है। लोकल फाल्ट को दूर कर निर्वाध बिजली देने का प्रयास किया जा रहा है।
बृजमोहन, अधिशासी अभियंता विद्युत, रामसनेहीघाट
बाक्स-
ग्रामीण अंचल में पहले से विद्युत आपूर्ति व्यवस्था बेहतर हो गई है। जितनी बिजली मिल रही है, सप्लाई दी जा रही है। गांवों में साढ़े दस घंटे बिजली दी जा रही है। यदि किसी गांव में विद्युत सप्लाई में दिक्कत है तो उसे दूर किया जाएगा।
नजम अहमद, अधिशासी अभियंता विद्युत, फतेहपुर
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प्रदेश सरकार का दावा है कि 26 दिसंबर से ग्रामीण अंचलों में विद्युत सप्लाई दो घंटे बढ़ा दी गई है। सिंचाई के मद्देनजर गांवों में अब 10 की बजाय 12 घंटे बिजली आपूर्ति करने का आदेश है। इसमेें छह घंटे दिन में और छह घंटे रात में विद्युत आपूर्ति की जानी है। उम्मीद थी कि नया शिड्यूल लागू होने के बाद ग्रामीण इलाकों में 12 घंटे बिजली सप्लाई मिल सकेगी, लेकिन जमीनी हकीकत इससे जुदा है। गांवों में 12 घंटे बिजली सप्लाई का दावा खोखला ही साबित हो रहा है।
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फतेहपुर के गांव ईशेपुर मेें करीब 15 वर्ष पूर्व विद्युतीकरण हुआ था, लेकिन विद्युत व्यवस्था बदहाल स्थिति में है। खंभों की कमी के चलते बल्लियों के सहारे बिजली के तार खींचे गए हैं। इस गांव में करीब 50 कनेक्शन हैं।
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ग्राम ईशेपुर निवासी गोकरन प्रसाद कहते हैं कि बिजली आधी को रात आती है और कब चली जाती है, इसका पता ही नहीं चलता। दिन में सप्लाई के दौरान बिजली कई बार कट जाती है। कुल मिलाकर पांच-छह घंटे ही बिजली मिल रही है।
उमेश चंद्र का कहना है कि सरकार द्वारा 12 घंटे आपूर्ति की घोषणा के अनुसार बिजली नहीं मिल रही है। ग्रामीणों को सिर्फ बरगलाया जा रहा है। थोड़ा सुधार जरूर हुआ है, लेकिन इससे किसानों का कोई भला होने वाला नहीं है।
जयकरन ने कहा कि गांव वालों की कौन सुनता है। सरकार भले ही दावा कर रही है, लेकिन हकीकत यह है कि बिजली पांच-छह घंटे से ज्यादा नहीं मिल रही है। गांवों में सिंचाई के लिए बिजली की बहुत जरूरत है, लेकिन इसमें सुधार नहीं हो पा रहा है।
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तहसील रामसनेहीघाट के ग्राम बनीकोडर का विद्युतीकरण करीब 35 वर्ष पूर्व कराया गया था। यहां करीब 250 कनेक्शन हैं, लेकिन यहां भी 10 या 12 घंटे बिजली का मिलना सपने जैसा है। ऊपर से लोकल फाल्ट घाव में खाज जैसा है।
ग्राम बनीकोडर निवासी जगन्नाथ कहते हैं कि रात में बिजली 10 बजे आई और रात ही में चली गई। सात-आठ घंटा से ज्यादा बिजली सप्लाई नहीं मिल रही है।
बनीकोडर गांव के ही अजय कहते हैं कि बिजली के बार-बार कटने से गेहूं की फसल की सिंचाई नहीं हो पा रही है। दिन मेें कई बार बिजली कट जा रही है। दिन व रात मिलाकर बमुश्किल सात घंटे ही बिजली मिल रही है।
यहीं के निवासी अर्पित कहते हैं कि सरकार ने घोषणा कर दी है, लेकिन गांवों में अभी मूर्तरूप नहीं दिया जा सका है। पावर कॉर्पोरेशन अपने पुराने ढर्रे पर ही चल रहा है। मामूली सुधार के बाद सात घंटे ही बिजली सप्लाई मिल रही है।
बाक्स.....
तहसील सिरौलीगौसपुर की ग्राम पंचायत बदोसरायं में करीब 32 वर्ष पूर्व विद्युतीकरण कराया गया था। लगभग साढे़ तीन सौ कनेक्शन वाले इस गांव में जर्जर तारों से विद्युत आपूर्ति की जा रही है। यहां के लोग लो वोल्टेज से जूझ रहे हैं।
ग्राम बदोसरायं निवासी मो. हलीम कहते हैं कि रात के समय दी जा रही विद्युत आपूर्ति से किसानों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। रात में ठंड के कारण खेतों की सिंचाई नहीं हो पा रही है और दिन मेें नाम मात्र की बिजली सप्लाई हो रही है। यहां कुल छह से आठ घंटे बिजली आ रही है।
अंकित गुप्ता ने बताया कि 12 घंटे की बात तो दूर की कौड़ी है। सही सलामत आठ घंटे बिजली नहीं मिल पाती है। विद्युत आपूर्ति के समय बार-बार कटौती से परेशानी हो रही है। खेत में पानी पहुंचता है कि बिजली कट जाती है। सिंचाई के लिए बिजली का इंतजार करना पड़ता है।
अरुण कुमार सिंह का कहना है कि दिन में दो घंटे से अधिक बिजली नहीं रहती है। दिन-रात मिलाकर करीब सात से आठ घंटे ही बिजली मिल रही है। इसके अलावा लो-वोल्टेज के कारण कोई कार्य नहीं हो पा रहा है।
बाक्स.....
तहसील हैदरगढ़ में त्रिवेदीगंज विकास क्षेत्र स्थित ग्राम पंचायत बहुता का 1964-65 मेें विद्युतीकरण कराया गया था। इस ग्राम पंचायत को हैदरगढ़ उपकेंद्र से बिजली मिलती है। बहुता गांव में कुल 67 विद्युत कनेक्शन हैं। ट्रांसफार्मर से आपूर्ति लाइन में आए दिन खराबी से ग्रामीण परेशान रहते हैं।
ग्राम बहुता निवासी कमलाकांत तिवारी ने कहा कि छह से सात घंटे बिजली मिल रही है। लो-वोल्टेज से विद्युत उपकरण फ्रिज आदि नहीं चल पा रहे हैं।
अरविंद अवस्थी कहते हैं कि सरकार सिर्फ दावा ही करती है, बिजली नहीं देती। 12 घंटे की जगह सरकार बिजली 10 घंटे ही दे, लेकिन लगातार बिजली दे तो किसान उसका फायदा उठा सकेंगे। कहा कि बमुश्किल सात घंटे बिजली मिल रही।
बहुता मजरे श्रीकृष्णपुर निवासी रामफेर ने बताया कि रात में मिली बिजली का ग्रामीण उपयोग नहीं कर पाते हैं और सुबह जागने से पहले बिजली चली जाती है। दिन में कई बार कटौती के कारण परेशानी हो रही है। कुल छह से सात घंटे ही बिजली मिल रही है।
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गांवों में 12 घंटे बिजली देने का प्रयास किया जा रहा है। लोकल फाल्ट होने के चलते बिजली आपूर्ति बाधित हो जाती है। लोकल फाल्ट को दूर कर निर्वाध बिजली देने का प्रयास किया जा रहा है।
बृजमोहन, अधिशासी अभियंता विद्युत, रामसनेहीघाट
बाक्स-
ग्रामीण अंचल में पहले से विद्युत आपूर्ति व्यवस्था बेहतर हो गई है। जितनी बिजली मिल रही है, सप्लाई दी जा रही है। गांवों में साढ़े दस घंटे बिजली दी जा रही है। यदि किसी गांव में विद्युत सप्लाई में दिक्कत है तो उसे दूर किया जाएगा।
नजम अहमद, अधिशासी अभियंता विद्युत, फतेहपुर