{"_id":"125-60387","slug":"Barabanki-60387-125","type":"story","status":"publish","title_hn":"सोलर लालटेन तैयार करेंगी गांव की महिलाएं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सोलर लालटेन तैयार करेंगी गांव की महिलाएं
Barabanki
Updated Tue, 11 Jun 2013 05:30 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बाराबंकी। अब जिले की महिलाओें द्वारा तैयार की गई सोलर लालटेन घरों में रोशनी करेंगी। अल्पसंख्यक महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में शुरू किया गया यह प्रयास बहुत जल्द फलीभूत होता नजर आएगा। जिला प्रशासन ने इस दिशा में कार्य कराना शुरू कर दिया है। जिलाधिकारी के निर्देश पर महिलाओं के चयन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। दो गांवों से करीब 70 महिलाओं की सूची भी अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी को उपलब्ध करा दी गई है। खास बात यह है कि इन महिलाओं को सोलर लालटेन बनाने का प्रशिक्षण प्राप्त करने कहीं दूर नहीं जाना होगा बल्कि यह प्रशिक्षण उन्हें उसी ग्राम पंचायत में ही दिया जाएगा।
ग्राम पंचायतों में महिलाओं का चयन करने के बाद आईआईटी रुड़की के अतुल गंगवार द्वारा सोलर लालटेन बनाने का प्रशिक्षण गांव के ही पंचायत भवन में दिया जाएगा। करीब 15 दिन के इस प्रशिक्षण में महिलाओं को पूरी तरह से सोलर लैंप तैयार करने के योग्य बना दिया जाएगा। इसके बाद नामित की गई कंपनी अपना उत्पाद लेकर आएगी और उसे इन महिलाओं को एसेम्बेल्ड करने के लिए दिया जाएगा। एक सोलर लालटेन को एसेम्बेल्ड करने में करीब आधा घंटे का समय लगेगा और इसके बदले में महिलाओं को 20 से 25 रुपये प्रति लालटेन दिया जाएगा। जानकारों के मुताबिक एक महिला एक दिन मे करीब 10 सोलर लालटेन एसेम्बेल्ड कर सकेगी। इस तरह से इससे होने वाली आय से महिलाएं अपने परिवार का पोषण करने के साथ ही आत्मनिर्भर भी बन सकेंगी और उन्हें घर बैठे रोजगार भी मिल सकेगा। जिलाधिकारी ने इस कार्य का जिम्मा प्रभारी अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी गरिमा स्वरूप को सौंपा है। उन्होंने बताया कि महिलाओं के चयन का कार्य तेजी से चल रहा है, सभी स्थानों से ऐसी महिलाओं की सूची मांगी गई है।
विज्ञापन
ग्राम पंचायतों में महिलाओं का चयन करने के बाद आईआईटी रुड़की के अतुल गंगवार द्वारा सोलर लालटेन बनाने का प्रशिक्षण गांव के ही पंचायत भवन में दिया जाएगा। करीब 15 दिन के इस प्रशिक्षण में महिलाओं को पूरी तरह से सोलर लैंप तैयार करने के योग्य बना दिया जाएगा। इसके बाद नामित की गई कंपनी अपना उत्पाद लेकर आएगी और उसे इन महिलाओं को एसेम्बेल्ड करने के लिए दिया जाएगा। एक सोलर लालटेन को एसेम्बेल्ड करने में करीब आधा घंटे का समय लगेगा और इसके बदले में महिलाओं को 20 से 25 रुपये प्रति लालटेन दिया जाएगा। जानकारों के मुताबिक एक महिला एक दिन मे करीब 10 सोलर लालटेन एसेम्बेल्ड कर सकेगी। इस तरह से इससे होने वाली आय से महिलाएं अपने परिवार का पोषण करने के साथ ही आत्मनिर्भर भी बन सकेंगी और उन्हें घर बैठे रोजगार भी मिल सकेगा। जिलाधिकारी ने इस कार्य का जिम्मा प्रभारी अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी गरिमा स्वरूप को सौंपा है। उन्होंने बताया कि महिलाओं के चयन का कार्य तेजी से चल रहा है, सभी स्थानों से ऐसी महिलाओं की सूची मांगी गई है।
विज्ञापन