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विशेष किशोर पुलिस ईकाई की हुई बैठक
Updated Sat, 28 Oct 2017 12:31 AM IST
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थानों में नामित होंगे दो बाल कल्याण अधिकार्री
बाराबंकी। पुलिस लाइंस सभागार में शुक्रवार को विशेष किशोर पुलिस इकाई द्वारा मासिक समीक्षा बैठक का आयोजन एएसपी दक्षिणी शशिकांत तिवारी की अध्यक्षता में किया गया। बैठक में थानों में तैनात बाल कल्याण पुलिस अधिकारियों से समीक्षा की गई। विशेष किशोर पुलिस इकाई को मॉडल बनाने पर-बाल कल्याण के पुलिस अधिकारियों को जागरूक किया गया।
महिला सम्मान प्रकोष्ठ मुख्यालय उप्र के जावेद ने सभी को विशेष किशोर पुलिस ईकाई के गठन व उसमें दिए गए प्राविधानों से सभी को अवगत कराया। उन्होने विशेष किशोर पुलिस ईकाई व एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (एएचटीयू) में निरीक्षक रैंक अधिकारी को नामित किए जाने के लिए मांग की।
उन्होंने बताया कि किशोर न्याय अधिनियम के अनुसार 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के मामलों में तब तक कोई एफआईआर नहीं दर्ज की जाएगी, जब तक उनके द्वारा किए गए कृत्य में 7 वर्ष से अधिक की सजा का प्रवधान ना हो, या फिर उस कृत्य में बच्चों के साथ वयस्क शामिल ना हो। बताया कि प्रत्येक थानों में 2 बाल कल्याण अधिकारियों को नामित होना आवश्यक है, जिसमें एक महिला होगी।
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महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा 181 सेवा की शुरुआत की गई है व विक्टिम कांपनसेशन स्कीम में पीड़ित के लिए तीन लाख रुपये तक का प्रविधान किया गया है। एएसपी दक्षिणी शशिकांत तिवारी ने कहा कि बच्चों के लिए किए जा रहे इन सभी प्रयासों में एकजुट होने की जरूरत है। बैठक में सीओ सदर राजेश यादव, महार्षि अग्निहोत्री, बाल कल्याण समिति से लक्ष्मी श्रीवास्तव व चाइल्ड लाइन के रत्नेश कुमार, अतुल ओझा आदि ने भी अपने विचार रखे।
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बाराबंकी। पुलिस लाइंस सभागार में शुक्रवार को विशेष किशोर पुलिस इकाई द्वारा मासिक समीक्षा बैठक का आयोजन एएसपी दक्षिणी शशिकांत तिवारी की अध्यक्षता में किया गया। बैठक में थानों में तैनात बाल कल्याण पुलिस अधिकारियों से समीक्षा की गई। विशेष किशोर पुलिस इकाई को मॉडल बनाने पर-बाल कल्याण के पुलिस अधिकारियों को जागरूक किया गया।
महिला सम्मान प्रकोष्ठ मुख्यालय उप्र के जावेद ने सभी को विशेष किशोर पुलिस ईकाई के गठन व उसमें दिए गए प्राविधानों से सभी को अवगत कराया। उन्होने विशेष किशोर पुलिस ईकाई व एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (एएचटीयू) में निरीक्षक रैंक अधिकारी को नामित किए जाने के लिए मांग की।
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उन्होंने बताया कि किशोर न्याय अधिनियम के अनुसार 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के मामलों में तब तक कोई एफआईआर नहीं दर्ज की जाएगी, जब तक उनके द्वारा किए गए कृत्य में 7 वर्ष से अधिक की सजा का प्रवधान ना हो, या फिर उस कृत्य में बच्चों के साथ वयस्क शामिल ना हो। बताया कि प्रत्येक थानों में 2 बाल कल्याण अधिकारियों को नामित होना आवश्यक है, जिसमें एक महिला होगी।
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महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा 181 सेवा की शुरुआत की गई है व विक्टिम कांपनसेशन स्कीम में पीड़ित के लिए तीन लाख रुपये तक का प्रविधान किया गया है। एएसपी दक्षिणी शशिकांत तिवारी ने कहा कि बच्चों के लिए किए जा रहे इन सभी प्रयासों में एकजुट होने की जरूरत है। बैठक में सीओ सदर राजेश यादव, महार्षि अग्निहोत्री, बाल कल्याण समिति से लक्ष्मी श्रीवास्तव व चाइल्ड लाइन के रत्नेश कुमार, अतुल ओझा आदि ने भी अपने विचार रखे।