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लालपुर गांव में बसने लगे कंचनापुर के बाढ़ पीड़ित
Updated Fri, 14 Sep 2018 11:17 PM IST
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लालपुर में बसने लगे कंचनापुर के बाढ़पीड़ित
क्रासर
- कटान धीमी होते ही फिर आशियाना बनाने की तैयारी
फोटो- 34, 35 पी
अमर उजाला ब्यूरो
सुढ़ियामऊ (बाराबंकी)। घाघरा नदी की कटान धीमी होने के बाद कंचनापुर के बाढ़ पीड़ित नए स्थान पर आशियाना बनाने की तैयारियों में लग गए हैं। बाढ़ में बहने के बाद बची मकान की सामग्री का अवशेष समेट कर पीड़ित अब लालपुर गांव में बसने की तैयारी में हैं। इससे पहले कई परिवार इस गांव में जाकर बस चुके हैं। वहीं बाढ़ पीड़ितों की समस्याएं कम होने के बजाए जस की तस बनी हुई हैं।
रामनगर तहसील क्षेत्र का कंचनापुर गांव में 61 मकान है इनमें में 141 परिवार निवासी करते थे। लेकिन इस बार कटान इतनी तेज हुई की बाढ़ में गांव की एक मस्जिद समेत 55 लोगों के मकान नदी की धारा में समा गए। जिनके मकान बचे हैं वह भी नदी के मुहाने पर हैं। यदि इस बार नदी का पानी बढ़ता है तो इन मकानों को बचा पाना खासा मुश्किल होगा। इसके अलावा अभी जो बाढ़ पीड़ित तटबंधों पर बसे हुए हैं उनकी समस्याएं कम होने का नाम नहीं ले रही हैं दो वक्त की रोटी से लेकर दवाई पानी तक के संकट से यह जूझ रहे हैं।
बाक्स
कंचनापुर गांव में रहने वाले जिन बाढ़ पीड़ितों के मकान नदी की धारा में बह गए हैं उन्हें अस्थाई तौर पर लालपुर गांव में बसाने के साथ ही इन्हें स्थाई रुप से बसाने के लिए जमीन की तलाश की जा रही है। जमीन मिलते ही इन्हें स्थाई तौर पर बसा दिया जाएगा।
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- अभय कुमार पांडेय, एसडीएम
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क्रासर
- कटान धीमी होते ही फिर आशियाना बनाने की तैयारी
फोटो- 34, 35 पी
अमर उजाला ब्यूरो
सुढ़ियामऊ (बाराबंकी)। घाघरा नदी की कटान धीमी होने के बाद कंचनापुर के बाढ़ पीड़ित नए स्थान पर आशियाना बनाने की तैयारियों में लग गए हैं। बाढ़ में बहने के बाद बची मकान की सामग्री का अवशेष समेट कर पीड़ित अब लालपुर गांव में बसने की तैयारी में हैं। इससे पहले कई परिवार इस गांव में जाकर बस चुके हैं। वहीं बाढ़ पीड़ितों की समस्याएं कम होने के बजाए जस की तस बनी हुई हैं।
रामनगर तहसील क्षेत्र का कंचनापुर गांव में 61 मकान है इनमें में 141 परिवार निवासी करते थे। लेकिन इस बार कटान इतनी तेज हुई की बाढ़ में गांव की एक मस्जिद समेत 55 लोगों के मकान नदी की धारा में समा गए। जिनके मकान बचे हैं वह भी नदी के मुहाने पर हैं। यदि इस बार नदी का पानी बढ़ता है तो इन मकानों को बचा पाना खासा मुश्किल होगा। इसके अलावा अभी जो बाढ़ पीड़ित तटबंधों पर बसे हुए हैं उनकी समस्याएं कम होने का नाम नहीं ले रही हैं दो वक्त की रोटी से लेकर दवाई पानी तक के संकट से यह जूझ रहे हैं।
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कंचनापुर गांव में रहने वाले जिन बाढ़ पीड़ितों के मकान नदी की धारा में बह गए हैं उन्हें अस्थाई तौर पर लालपुर गांव में बसाने के साथ ही इन्हें स्थाई रुप से बसाने के लिए जमीन की तलाश की जा रही है। जमीन मिलते ही इन्हें स्थाई तौर पर बसा दिया जाएगा।
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- अभय कुमार पांडेय, एसडीएम