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छह माह में सर्पदंश से गई 40 की जान
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बाराबंकी। जिले में बीते छह माह पर नजर डाले तो सर्पदंश से करीब 40 लोगों की जान जा चुकी है। लेकिन इनमें महज 13 लोगों का ही पोस्टमार्टम करवाया जा सका है। लेकिन जिनका पोस्टमार्टम हुआ है उनके परिजनों को भी अभी तक सरकार की तरफ से कोई मदद नहीं मिल सकी है। इसके पीछे कारण है कि मृतकों की मौत का कारण पता न लगने पर विसरा सुरक्षित किया गया है और उसकी जांच रिपोर्ट न आने से इनको लाभ नहीं मिल सका है।
वहीं प्रशासन की माने तो पहले की योजना के तहत बीते दो साल में सर्पदंश से मरने वाले 45 लोगों को इसका लाभ मिला है। जबकि कई मामलों में तो जानकारी के अभाव में मृतकों के शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया जिससे उनके परिजनों को अब कोई लाभ नहीं मिल सकेगा।
वर्ष 2018 में शासन ने आदेश जारी किया था जिसमें कहा गया था कि सर्पदंश से होने वाली मौतों को आपदा की श्रेणी में मानते हुए इनके आश्रितों को चार लाख रुपये मुआवजा दिया जाएगा। इसके तहत जिले में वर्ष 2018-19 में सर्पदंश से 11 लोगों की मौतें हुई, जबकि वर्ष 2019-20 में 16 लोगों की जान सांप के डसने से गई। इसी प्रकार वर्ष 2020-21 में सर्पदंश से 18 लोगों की मौत हुई। इस तरह से तीन वित्तीय वर्ष में करीब 45 लोगों की सर्पदंश से मौत हुई।
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विभाग की माने तो इन सभी मामलों में मृतकों के आश्रितों को मुआवजे की राशि के रूप में चार-चार लाख रुपये दिए जा चुके हैं। लेकिन वर्ष 2021-22 में अब तक जिले में सर्पदंश से करीब 13 लोगों की मौत हो चुकी है लेकिन इस मामले में अभी तक इनके आश्रितों को मुुआवजे के रुप में एक भी पैसा नहीं मिल सका। इसके पीछे तर्क दिया जा रहा है कि एसडीएम स्तर से इन सभी मामलों में अभी तक कोई रिपोर्ट नहीं आई जिसकी वजह से प्रक्रिया लंबित है। इसके अलावा बजट का अभाव भी इसका सबसे बड़ा कारण बताया जा रहा है।
दहशत व झाड़फूंक की बजाए कराएं इलाज
पर्यावरणविद हरिशंकर दीक्षित बताते है कि सर्पदंश की घटनाओं के बाद तमाम लोग दहशत में आकर मर जाते हैं। जबकि कई लोग इलाज कराने के बजाए झाड़फूंक को ज्यादा तवज्जो देते हैं जिसके चलते उनकी जान चली जाती है। ग्रामीण इलाके के लोगों को सर्पदंश से बचने के लिए खेत जाते समय जहां जूता पहनना चाहिए वहीं साथ में डंडा व गमछा होना भी जरूरी है।
इसके साथ ही सर्पदंश के बाद जिस जगह पर काटा गया है उसके ऊपर का हिस्सा गमछे से खूब कसके बांध देने से भी इससे बचाव होना संभव है। लेकिन डॉक्टर के यहां जाकर उपचार कराना सबसे ज्यादा जरूरी है।
जब किसी व्यक्ति को सांप काट ले तो तत्काल उसे पास के अस्पताल में ले जाएं। जिले के हर सीएचसी पर एंटी स्नेक वेनम इंजेक्शन उपलब्ध है। लोगों से अपील की जाती है कि वह सांप काटने पर झाड़फूंक के चक्कर में न पड़ें।
-डॉ. बीकेएस चौहान,सीएमओ
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वहीं प्रशासन की माने तो पहले की योजना के तहत बीते दो साल में सर्पदंश से मरने वाले 45 लोगों को इसका लाभ मिला है। जबकि कई मामलों में तो जानकारी के अभाव में मृतकों के शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया जिससे उनके परिजनों को अब कोई लाभ नहीं मिल सकेगा।
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वर्ष 2018 में शासन ने आदेश जारी किया था जिसमें कहा गया था कि सर्पदंश से होने वाली मौतों को आपदा की श्रेणी में मानते हुए इनके आश्रितों को चार लाख रुपये मुआवजा दिया जाएगा। इसके तहत जिले में वर्ष 2018-19 में सर्पदंश से 11 लोगों की मौतें हुई, जबकि वर्ष 2019-20 में 16 लोगों की जान सांप के डसने से गई। इसी प्रकार वर्ष 2020-21 में सर्पदंश से 18 लोगों की मौत हुई। इस तरह से तीन वित्तीय वर्ष में करीब 45 लोगों की सर्पदंश से मौत हुई।
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विभाग की माने तो इन सभी मामलों में मृतकों के आश्रितों को मुआवजे की राशि के रूप में चार-चार लाख रुपये दिए जा चुके हैं। लेकिन वर्ष 2021-22 में अब तक जिले में सर्पदंश से करीब 13 लोगों की मौत हो चुकी है लेकिन इस मामले में अभी तक इनके आश्रितों को मुुआवजे के रुप में एक भी पैसा नहीं मिल सका। इसके पीछे तर्क दिया जा रहा है कि एसडीएम स्तर से इन सभी मामलों में अभी तक कोई रिपोर्ट नहीं आई जिसकी वजह से प्रक्रिया लंबित है। इसके अलावा बजट का अभाव भी इसका सबसे बड़ा कारण बताया जा रहा है।
दहशत व झाड़फूंक की बजाए कराएं इलाज
पर्यावरणविद हरिशंकर दीक्षित बताते है कि सर्पदंश की घटनाओं के बाद तमाम लोग दहशत में आकर मर जाते हैं। जबकि कई लोग इलाज कराने के बजाए झाड़फूंक को ज्यादा तवज्जो देते हैं जिसके चलते उनकी जान चली जाती है। ग्रामीण इलाके के लोगों को सर्पदंश से बचने के लिए खेत जाते समय जहां जूता पहनना चाहिए वहीं साथ में डंडा व गमछा होना भी जरूरी है।
इसके साथ ही सर्पदंश के बाद जिस जगह पर काटा गया है उसके ऊपर का हिस्सा गमछे से खूब कसके बांध देने से भी इससे बचाव होना संभव है। लेकिन डॉक्टर के यहां जाकर उपचार कराना सबसे ज्यादा जरूरी है।
जब किसी व्यक्ति को सांप काट ले तो तत्काल उसे पास के अस्पताल में ले जाएं। जिले के हर सीएचसी पर एंटी स्नेक वेनम इंजेक्शन उपलब्ध है। लोगों से अपील की जाती है कि वह सांप काटने पर झाड़फूंक के चक्कर में न पड़ें।
-डॉ. बीकेएस चौहान,सीएमओ