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11 गांवों को गोंडा में शामिल करने का भेजा गया प्रस्ताव
Updated Fri, 31 Aug 2018 11:17 PM IST
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11 गांवों को गोंडा में शामिल
करने का भेजा गया प्रस्ताव
क्रासर
- मुख्यमंत्री ने डीएम को प्रस्ताव बनाकर भेजने का दिया था आदेश
- बाढ़ के दौरान नहीं मिल पाती है समय से राहत और मदद
अमर उजाला ब्यूरो
बाराबंकी। मुख्यमंत्री के आदेश के बाद बाढ़ से प्रभावित 11 गांवों को गोंडा जिले में शामिल करने का प्रस्ताव बनाकर शुक्रवार को जिलाधिकारी ने शासन को भेज दिया। अब शासन को फैसला करना है कि यह गांव जिले में रहेंगे या फिर गोंडा में शामिल किए जाएंगे।
जिले की रामसनेहीघाट तहसील के कमियार, बांसगांव, गढ़ी, लिलार, असवा, मैला, किठुली और सिरौलीगौसपुर तहसील के पारा बेहटा, मांझारायपुर, परसावल और नैपुरा ऐसे गांव हैं जो हैं तो जिले में पर गोंडा की सीमा पर बसे होने की वजह से इन्हें तत्काल सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पाता। खासकर बाढ़ के दौरान यहां के लोगों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। जिला मुख्यालय से दूरी काफी होने की वजह से इन्हें राहत सामग्री पहुंचाने में काफी समय लग जाता है जबकि इन्हें गांवों से सटे गांव के लोगों को तत्काल मदद मिल जाती है। मुख्यमंत्री बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का दौरा करने आए थे जिस पर जिलाधिकारी ने यह बात मुख्यमंत्री के समक्ष रखी थी। जिलाधिकारी उदयभानु त्रिपाठी ने बताया कि मुख्यमंत्री के आदेश के बाद जिले की दो तहसीलों के 11 गांवों को गोंडा जिले में शामिल करने का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेज दिया गया है।
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करने का भेजा गया प्रस्ताव
क्रासर
- मुख्यमंत्री ने डीएम को प्रस्ताव बनाकर भेजने का दिया था आदेश
- बाढ़ के दौरान नहीं मिल पाती है समय से राहत और मदद
अमर उजाला ब्यूरो
बाराबंकी। मुख्यमंत्री के आदेश के बाद बाढ़ से प्रभावित 11 गांवों को गोंडा जिले में शामिल करने का प्रस्ताव बनाकर शुक्रवार को जिलाधिकारी ने शासन को भेज दिया। अब शासन को फैसला करना है कि यह गांव जिले में रहेंगे या फिर गोंडा में शामिल किए जाएंगे।
जिले की रामसनेहीघाट तहसील के कमियार, बांसगांव, गढ़ी, लिलार, असवा, मैला, किठुली और सिरौलीगौसपुर तहसील के पारा बेहटा, मांझारायपुर, परसावल और नैपुरा ऐसे गांव हैं जो हैं तो जिले में पर गोंडा की सीमा पर बसे होने की वजह से इन्हें तत्काल सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पाता। खासकर बाढ़ के दौरान यहां के लोगों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। जिला मुख्यालय से दूरी काफी होने की वजह से इन्हें राहत सामग्री पहुंचाने में काफी समय लग जाता है जबकि इन्हें गांवों से सटे गांव के लोगों को तत्काल मदद मिल जाती है। मुख्यमंत्री बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का दौरा करने आए थे जिस पर जिलाधिकारी ने यह बात मुख्यमंत्री के समक्ष रखी थी। जिलाधिकारी उदयभानु त्रिपाठी ने बताया कि मुख्यमंत्री के आदेश के बाद जिले की दो तहसीलों के 11 गांवों को गोंडा जिले में शामिल करने का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेज दिया गया है।
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