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घाघरा में समाई 30 बीघा फसल
Amar ujala Bureau
Updated Tue, 12 Jul 2016 11:21 PM IST
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घाघरा का जलस्तर घटने से कटान शुरू हो गई है। मंगलवार को करीब 30 बीघा फसल नदी में समा गई। सिरौलीगौसपुर के तेलवारी गांव में करीब छह घर कटान के मुहाने पर हैं। मंगलवार को नदी का जलस्तर 105.46 पर पहुंच कर स्थिर रहा।
पिछले एक सप्ताह में नदी करीब 120 बीघा फसल लील चुकी है। मांझा के लोगों ने सुरक्षित आशियाने की तलाश तेज कर दी है। उफान से ज्यादा घाघरा का ठहराव तराई के किसानों में दहशत पैदा कर रहा है।
घाघरा का पानी जब उतरता है तब कटान बहुत तेज हो जाती है। बाढ़ प्रभावित परसावल, नैपुरा, तेलवारी इटहुआ पूरब आदि गांवों में कटान तीन दिनों से जारी है। मंगलवार को परसावल और नैपुरा में करीब 30 बीघा फसल घाघरा में समा गई।
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ग्रामीण जंग बहादुर ने बताया कि लगातार कटान से ग्रामीणों की नींद उड़ी हुई है। घटता-बढ़ता जलस्तर ग्रामीणों के लिए परेशानी का सबब बन गया है। राम दयाल ने बताया कि फसलों का नुकसान तो हो ही रहा है, अब हमारे घरों पर भी खतरा मंडरा रहा है।
जिनके घर नदी के एकदम किनारे हैं वे सुरक्षित स्थानों पर पहले ही चले गए हैं। जो बचे हैं वो बंधे पर जगह तलाश रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ सिरौलीगौसपुर के तेलवारी के ग्रामीण दहशत में हैं। यहां करीब छह घर एकदम कटान के मुहाने पर हैं। मंगलवार सुबह यहां पर करीब पांच फीट की कटान होने से ग्रामीण परेशान हैं।
बाढ़ की विभीषिका से निपटने के लिए तहसील प्रशासन भी तैयारी का दावा कर रहा है। बाढ़ से बचाव के लिए घाघरा के तटवर्ती गांवों के ऐसे लोगों को सूचीबद्ध किया गया है, जो पानी में तैरना जानते हैं। इसके लिए आठ टीमों का गठन किया गया है।
तहसील प्रशासन ने मल्लाहन पुरवा, तेलवारी, करोनी, मल्दहा सहित अन्य गांवों से 70 लोगों को सूचीबद्ध किया है जो तैराकी जानते हैं। ये लोग बाढ़ की आपात स्थित में काम आ सकते हैं। प्रत्येक टीम में सदस्यों की संख्या गांवों की प्रभावित आबादी के हिसाब से होगी।
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पिछले एक सप्ताह में नदी करीब 120 बीघा फसल लील चुकी है। मांझा के लोगों ने सुरक्षित आशियाने की तलाश तेज कर दी है। उफान से ज्यादा घाघरा का ठहराव तराई के किसानों में दहशत पैदा कर रहा है।
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घाघरा का पानी जब उतरता है तब कटान बहुत तेज हो जाती है। बाढ़ प्रभावित परसावल, नैपुरा, तेलवारी इटहुआ पूरब आदि गांवों में कटान तीन दिनों से जारी है। मंगलवार को परसावल और नैपुरा में करीब 30 बीघा फसल घाघरा में समा गई।
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ग्रामीण जंग बहादुर ने बताया कि लगातार कटान से ग्रामीणों की नींद उड़ी हुई है। घटता-बढ़ता जलस्तर ग्रामीणों के लिए परेशानी का सबब बन गया है। राम दयाल ने बताया कि फसलों का नुकसान तो हो ही रहा है, अब हमारे घरों पर भी खतरा मंडरा रहा है।
जिनके घर नदी के एकदम किनारे हैं वे सुरक्षित स्थानों पर पहले ही चले गए हैं। जो बचे हैं वो बंधे पर जगह तलाश रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ सिरौलीगौसपुर के तेलवारी के ग्रामीण दहशत में हैं। यहां करीब छह घर एकदम कटान के मुहाने पर हैं। मंगलवार सुबह यहां पर करीब पांच फीट की कटान होने से ग्रामीण परेशान हैं।
बाढ़ की विभीषिका से निपटने के लिए तहसील प्रशासन भी तैयारी का दावा कर रहा है। बाढ़ से बचाव के लिए घाघरा के तटवर्ती गांवों के ऐसे लोगों को सूचीबद्ध किया गया है, जो पानी में तैरना जानते हैं। इसके लिए आठ टीमों का गठन किया गया है।
तहसील प्रशासन ने मल्लाहन पुरवा, तेलवारी, करोनी, मल्दहा सहित अन्य गांवों से 70 लोगों को सूचीबद्ध किया है जो तैराकी जानते हैं। ये लोग बाढ़ की आपात स्थित में काम आ सकते हैं। प्रत्येक टीम में सदस्यों की संख्या गांवों की प्रभावित आबादी के हिसाब से होगी।