फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Barabanki News ›   कई दिग्गजों को साख को आइना दिखा गया निकाय चुनाव

कई दिग्गजों को साख को आइना दिखा गया निकाय चुनाव

Sat, 02 Dec 2017 12:34 AM IST
Updated Sat, 02 Dec 2017 12:34 AM IST
विज्ञापन
कई दिग्गजों को साख को आइना दिखा गया निकाय चुनाव
कई दिग्गजों को साख को आइना दिखा गया निकाय चुनाव
विज्ञापन

- सीएम योगी, राज बब्बर, बेनी, केशव, दिनेश व प्रमोद ने की थी जनसभाएं
- पुनिया, गोप व सुरेश से लेकर कई दिग्गजों ने अपनी साख से जोड़ा था चुनाव
केपी तिवारी
बाराबंकी। जिले की शहरी सरकार में अपना दब दबा कायम करने के लिए भाजपा, सपा और कांग्रेस के नेताओं ने जिस तरह सभाएं कर अपने प्रत्याशियों को जिताने के लिए जुटे थे। नगर पालिका की प्रतिष्ठा पूर्ण सीट समेत 12 नगर पंचायतों के नतीजे कई दिग्गज नेताओं को साख का आइना दिखा दिया है। यही नहीं चुनाव के दौरान दल बदलकर अपनी ताकत का एहसास कराने उतरे नेताओं को भी जमीनी हकीकत मालूम हो गई। जिले में जनता ने जो फैसला सुनाया वह सोचने के लिए मजबूर कर दिया है। न तो किसी दल को क्लीन स्वीप मिली है न ही नेताओं ने जहां दावा किया वहां जीत पाए। एक मात्र नगर पालिका पर जरूर जीत हासिल कर भाजपा योगी की चुनावी सभा को साख बचाने में सफल रहे।
पहली बार शहर की सरकार पर कब्जा जमाने के लिए भाजपा के अलावा सपा, बसपा व कांग्रेस ने अपने सिंबल पर प्रत्याशी उतारे थे। नगर पालिका का चुनाव में इन दलों के दिग्गज जीत के लिए विधान सभा चुनाव की तर्ज पर प्रचार ही नहीं किया बल्कि शाम दाम दंड भेद के फार्मूले पर खूब गोटियां बिछाई। दल बदल खूब हुए तो सीएम से लेकर कई कद्दावर नेताओं ने चुनावी सभाओं में शामिल होकर प्रचार को हर रंग में रंगने की कोशिश कर मतदाताओं को लुभाने के प्रयास किए थे। कुछ जगह पर टिकट को लेकर नाराजगी ऐसी हुई कि कई नेता प्रचार से अपने को दूर भी रखा। इस तरह पूरे चुनाव प्रचार की रणनीति पर नजर डालें तो कभी समाजवाद के गढ़ रहे इस जिले में किसी के पक्ष में ऐसा परिणाम नहीं कि वह अपना सीना चौड़ा कर सेखी बघार सके। तो कि भाजपा ने नगर पालिका और दो नगर पंचायतों पर ही जीत का स्वाद चख सके। यह हालात तब हुए जब उसके आधा दर्जन मंत्री, सीएम दोनों डिप्टी सीएम व प्रदेश अध्यक्ष ने चुनावी सभाएं की।
विज्ञापन

सपा की हालत तो और पतली रही। नगर पालिका सीट पर पार्टी के दिग्गज और जिले के विकास पुरुष कहे जाने वाले बेनी बाबू को चुनावी सभा ही नहीं करनी पड़ी बल्कि अपने पुराने पांसे भी चुनाव में खूब फेंके। विधायक सुरेश यादव घर घर दौड़े तो एमएलसी राजेश बसपा के कई कद्दावर नेताओं को पार्टी में शामिल कराकर जीत का जो ताना बाना बुना था वह सफल नहीं रहा। या यूं कहा जाए कि कहीं न कहीं पार्टी के भीतर लंबे समय से चली आ रही गुटबाजी के कारण एक बार फिर समाजवाद का गढ़ संभल नहीं पाया। भले ही जीत पर वह लाख दावा करे पर उसके सिंबल पर जीत दर्ज करने वाले तीन ही पंचायत अध्यक्ष हैं। सबसे खराब हालत तो बसपा की रही। इनकी पार्टी से पूर्व मंत्री संग्राम सिंह वर्मा जहां अपने पूरे कुनबे के साथ भाजपाई हो गए वहीं पूर्व सांसद समेत कई बड़े नेता समाजवादी में चले गए। कांग्रेस पार्टी ने नगर पालिका व कई नगर पंचायतों में उम्मीदवार उतारे थे। एक सीट पर जीत कर भले ही कांग्रेसी अपनी पीठ थपथपाएं किंतु सांसद पीएल पुनिया, प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर, प्रमोद तिवारी ने पार्टी में जान फूंकने की कोशिश की वह सिद्धौर के अलावा पूरे जिले में कहीं सफल नहीं रही। इस तरह पूरे नगर निकाय चुनाव परिणाम पर नजर डाले तो जनता का जो फैसला आया है उसमें जनता ने दिग्गज राजनेताओं को उनकी साख का आइना दिखा दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed