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270 में से 120 सहकारी समितियां बंद
Updated Fri, 15 Sep 2017 01:21 AM IST
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270 में से 120 सहकारी समितियों पर ताले
बाराबंकी। सहकारी समितियों के चुनाव को हरी झंडी मिलते ही कर्मचारी चुनाव कार्य की तैयारियों में व्यस्त हो गए हैं। सात अक्तूबर से शुरू होने वाली चुनाव प्रक्रिया एक माह के अंदर पूरी की जाएगी। प्राथमिक समितियों के चुनाव के बाद केंद्रीय समितियों को भेजे जाने वाले प्रतिनिधियों से ही चुनाव संपन्न होंगे। चुनाव की घोषणा के बाद सहकारी समितियों के सदस्य अपनी दावेदारी को लेकर सक्रिय हो गए हैं।
जिले में छोटी बड़ी 270 सहकारी समितियां खुली थी, जिनमें से धीरे-धीरे 120 समितियां बंद हो गईं। शेष बची 150 समितियां सक्रिय हैं। इन समितियों पर किसानों को नकद खाद, बीज तथा जिला सहकारी बैंक के माध्यम से उर्वरक ऋण का लाभ मिलता है। दावा किया जा रहा है कि यहां की समितियों में अब तक धांधली का कोई मामला नहीं हुआ है। सभी रिक्त पड़े 150 पदों पर चुनाव कराया जाएगा। इन चुनाव में तीन केंद्रीय समितियों के चुनाव काफी अहम माने जाते हैं। जिसमें डिस्ट्रिक कोऑपरेटिव बैंक (डीसीबी), डिस्ट्रिक कोऑपरेटिव डेवलपमेंट फेडरेशन (डीसीडीएफ) व केंद्रीय उपभोक्ता भंडार आदि के चुनाव हैं। इनमें प्राथमिक सहकारिता समितियों से चुने गए पदाधिकारियों द्वारा मतदान व दावेदारी की जाती है।
ऐसे बनें समितियों के सदस्य
न्याय पंचायत स्तर पर संचालित सहकारी समितियों का सदस्य बनने के लिए किसानों को सचिव के पास 100 रुपये सदस्यता शुल्क जमाकर रसीद लेनी होती है। किसान खतौनी, खसरा, आधार कार्ड, बैंक की पासबुक व फोटो लगाकर सदस्यता फार्म भरकर जमा करें। चुनाव में दावेदारी करने के लिए सदस्यता चार माह पुरानी हो और लगातार लेनदेन का कार्य समिति से चलता रहा हो।
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वर्जन-
जिले में 150 समितियों पर चुनाव कराए जाएंगे। सात अक्तूबर से चुनाव की तैयारी शुरू होंगी। उसके बाद तीन शीर्ष संस्थाओं के चुनाव के लिए जो भी आदेेश होंगे, उसका पालन कराया जाएगा। - मित्रसेन वर्मा, एआर कोऑपरेटिव
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बाराबंकी। सहकारी समितियों के चुनाव को हरी झंडी मिलते ही कर्मचारी चुनाव कार्य की तैयारियों में व्यस्त हो गए हैं। सात अक्तूबर से शुरू होने वाली चुनाव प्रक्रिया एक माह के अंदर पूरी की जाएगी। प्राथमिक समितियों के चुनाव के बाद केंद्रीय समितियों को भेजे जाने वाले प्रतिनिधियों से ही चुनाव संपन्न होंगे। चुनाव की घोषणा के बाद सहकारी समितियों के सदस्य अपनी दावेदारी को लेकर सक्रिय हो गए हैं।
जिले में छोटी बड़ी 270 सहकारी समितियां खुली थी, जिनमें से धीरे-धीरे 120 समितियां बंद हो गईं। शेष बची 150 समितियां सक्रिय हैं। इन समितियों पर किसानों को नकद खाद, बीज तथा जिला सहकारी बैंक के माध्यम से उर्वरक ऋण का लाभ मिलता है। दावा किया जा रहा है कि यहां की समितियों में अब तक धांधली का कोई मामला नहीं हुआ है। सभी रिक्त पड़े 150 पदों पर चुनाव कराया जाएगा। इन चुनाव में तीन केंद्रीय समितियों के चुनाव काफी अहम माने जाते हैं। जिसमें डिस्ट्रिक कोऑपरेटिव बैंक (डीसीबी), डिस्ट्रिक कोऑपरेटिव डेवलपमेंट फेडरेशन (डीसीडीएफ) व केंद्रीय उपभोक्ता भंडार आदि के चुनाव हैं। इनमें प्राथमिक सहकारिता समितियों से चुने गए पदाधिकारियों द्वारा मतदान व दावेदारी की जाती है।
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ऐसे बनें समितियों के सदस्य
न्याय पंचायत स्तर पर संचालित सहकारी समितियों का सदस्य बनने के लिए किसानों को सचिव के पास 100 रुपये सदस्यता शुल्क जमाकर रसीद लेनी होती है। किसान खतौनी, खसरा, आधार कार्ड, बैंक की पासबुक व फोटो लगाकर सदस्यता फार्म भरकर जमा करें। चुनाव में दावेदारी करने के लिए सदस्यता चार माह पुरानी हो और लगातार लेनदेन का कार्य समिति से चलता रहा हो।
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जिले में 150 समितियों पर चुनाव कराए जाएंगे। सात अक्तूबर से चुनाव की तैयारी शुरू होंगी। उसके बाद तीन शीर्ष संस्थाओं के चुनाव के लिए जो भी आदेेश होंगे, उसका पालन कराया जाएगा। - मित्रसेन वर्मा, एआर कोऑपरेटिव