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बालू की जगह 15 प्रतिशत फ्लाई ऐश का प्रयोग अनिवार्य
Updated Wed, 19 Jul 2017 12:20 AM IST
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बालू की जगह 15 प्रतिशत फ्लाई ऐश का करें प्रयोग
बाराबंकी। प्रदेश सरकार द्वारा अवैध मिट्टी खनन पर रोक लगाने के बाद सरकारी निर्माण कार्यों में आ रही रुकावटों को दूर करने के लिए अब शासन ने इसका तोड़ निकाल लिया है। मुख्य सचिव द्वारा जारी शासनादेश में सभी निर्माण कार्य कराने वाले विभागों व कार्यदायी संस्थाओं को बालू के स्थान पर 15 प्रतिशत फ्लाई ऐश का प्रयोग किए जाने के निर्देश दिए गए हैं। जिला प्रशासन को मिले इस आदेश के बाद डीएम ने संबंधित विभागों को निर्देशित करते हुए इसका पालन कराने के निर्देश दिए हैं। सभी विभागों व कार्यदायी संस्थाओं को टेंडर प्रक्रिया में इस बिंदु को अनिवार्य कर दिया गया हैैै।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण द्वारा पारित एक आदेश को अमल में लाने के लिए भारत सरकार ने पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के नोटिफिकेशन को ध्यान में रखते हुए प्रदेश सरकार को इस संबंध में निर्देश जारी किया था। जिसके बाद मुख्य सचिव ने प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को पत्र भेज कर कहा है कि अब हर निर्माण कार्यो में थर्मल पॉवर स्टेशनों से निकलने वाली फ्लाई ऐश का प्रयोग किया जाए। तथा सभी विभाग व कार्यदाई संस्थाएं निर्माण कार्य कराने के लिए निकलने वाले टेंड़रों में इसे अनिवार्यता देें। शासन से निर्देश मिलने के बाद डीएम ने इस संबंध में पीडब्लूडी, आरईएस समेत सभी ऐसे विभाग जो निर्माण कार्य कराती हैं को इस अमल कराने के निर्देश दिए हैं।
बाक्स
यह है फलाई ऐश
देश व प्रदेश के कई बड़े शहरों में लगे थर्मल पॉवर स्टेशनों की चिमनियों से निकलने वाली उड़न राख (फ्लाई ऐश) बहुत सी चीजें (जैसे कोयला) को जलने का निर्मित पदार्थ है। जो महीन कणों से निर्मित होता है। इस राख से मजबूर्त इंट भी तैयार की जाती है। यह थर्मल पावर स्टेशन यूपी के कई जनपदों ऊंचाहार, टांडा, मिर्जापुर में स्थापित हैं। अभी तक फ्लाई ऐश की भारी मात्रा इन प्लांटों के लिए मुसीबत बनी हुई थी। पर अब शासन द्वारा इसका प्रयोग करने के लिए अधिकृत किए जाने के बाद इसके भाव बढ़ जाएंगे। फ्लाई ऐश से अब सड़क निर्माण में मिट्टी की जगह इसका प्रयोग होगा, ताकि मिट्टी की खपत को रोका जा सके।
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कोट
शासन से हर निर्माण कार्यों में बालू के स्थान पर 15 प्रतिशत इस फ्लाई ऐश का प्रयोग किए जाने के निर्देश दिए गए हैं। जिलाधिकारी के निर्देश पर इससे सभी संबंधित विभागों व कार्यदायी संस्थाओं को अवगत कराते हुए निर्माण कार्यों के टेंडर प्रक्रिया में इस अनिवार्यता किए जाने को कहा गया है।
-सुधीर प्रकाश गुप्ता, अधिशाषी अभियंता, आरईएस
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बाराबंकी। प्रदेश सरकार द्वारा अवैध मिट्टी खनन पर रोक लगाने के बाद सरकारी निर्माण कार्यों में आ रही रुकावटों को दूर करने के लिए अब शासन ने इसका तोड़ निकाल लिया है। मुख्य सचिव द्वारा जारी शासनादेश में सभी निर्माण कार्य कराने वाले विभागों व कार्यदायी संस्थाओं को बालू के स्थान पर 15 प्रतिशत फ्लाई ऐश का प्रयोग किए जाने के निर्देश दिए गए हैं। जिला प्रशासन को मिले इस आदेश के बाद डीएम ने संबंधित विभागों को निर्देशित करते हुए इसका पालन कराने के निर्देश दिए हैं। सभी विभागों व कार्यदायी संस्थाओं को टेंडर प्रक्रिया में इस बिंदु को अनिवार्य कर दिया गया हैैै।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण द्वारा पारित एक आदेश को अमल में लाने के लिए भारत सरकार ने पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के नोटिफिकेशन को ध्यान में रखते हुए प्रदेश सरकार को इस संबंध में निर्देश जारी किया था। जिसके बाद मुख्य सचिव ने प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को पत्र भेज कर कहा है कि अब हर निर्माण कार्यो में थर्मल पॉवर स्टेशनों से निकलने वाली फ्लाई ऐश का प्रयोग किया जाए। तथा सभी विभाग व कार्यदाई संस्थाएं निर्माण कार्य कराने के लिए निकलने वाले टेंड़रों में इसे अनिवार्यता देें। शासन से निर्देश मिलने के बाद डीएम ने इस संबंध में पीडब्लूडी, आरईएस समेत सभी ऐसे विभाग जो निर्माण कार्य कराती हैं को इस अमल कराने के निर्देश दिए हैं।
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यह है फलाई ऐश
देश व प्रदेश के कई बड़े शहरों में लगे थर्मल पॉवर स्टेशनों की चिमनियों से निकलने वाली उड़न राख (फ्लाई ऐश) बहुत सी चीजें (जैसे कोयला) को जलने का निर्मित पदार्थ है। जो महीन कणों से निर्मित होता है। इस राख से मजबूर्त इंट भी तैयार की जाती है। यह थर्मल पावर स्टेशन यूपी के कई जनपदों ऊंचाहार, टांडा, मिर्जापुर में स्थापित हैं। अभी तक फ्लाई ऐश की भारी मात्रा इन प्लांटों के लिए मुसीबत बनी हुई थी। पर अब शासन द्वारा इसका प्रयोग करने के लिए अधिकृत किए जाने के बाद इसके भाव बढ़ जाएंगे। फ्लाई ऐश से अब सड़क निर्माण में मिट्टी की जगह इसका प्रयोग होगा, ताकि मिट्टी की खपत को रोका जा सके।
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शासन से हर निर्माण कार्यों में बालू के स्थान पर 15 प्रतिशत इस फ्लाई ऐश का प्रयोग किए जाने के निर्देश दिए गए हैं। जिलाधिकारी के निर्देश पर इससे सभी संबंधित विभागों व कार्यदायी संस्थाओं को अवगत कराते हुए निर्माण कार्यों के टेंडर प्रक्रिया में इस अनिवार्यता किए जाने को कहा गया है।
-सुधीर प्रकाश गुप्ता, अधिशाषी अभियंता, आरईएस