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कृषि, विज्ञान संग नवाचार के संगम से किसान आत्मनिर्भर और भारत बनेगा सशक्त : राज्यपाल
Fri, 17 Oct 2025 01:28 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Fri, 17 Oct 2025 01:28 AM IST
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फोटो 02 - कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के दीक्षा समारोह को संबोधित करतीं राज्यपाल आनंदीब
बांदा। कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के 11वें दीक्षा समारोह में बृहस्पतिवार को प्रदेश की राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने शिरकत की। उन्होंने समारोह का शुभारंभ किया और विभिन्न संकायों के 350 छात्र-छात्राओं को उपाधियां तथा 19 मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक प्रदान किए। इससे पहले राज्यपाल ने विश्वविद्यालय परिसर में आर्ट गैलरी और म्यूजियम का उद्घाटन भी किया।
राज्यपाल ने कहा कि जहां नारी है, वहीं सृजन है। महिलाएं सृष्टि की रचना और पोषण करती हैं। उन्होंने कहा कि कृषि शिक्षा में छात्राओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है, जो समाज में सकारात्मक बदलाव का प्रतीक है। किसानों के सशक्तिकरण और ग्रामीण भारत के उत्थान से ही प्रदेश और देश सशक्त बन सकता है। भारत आज दुग्ध और मिलेट्स उत्पादन में अग्रणी है, अब आवश्यकता है कि किसान फूड प्रोसेसिंग और कृषि-व्यवसाय प्रबंधन पर ध्यान दें।
विश्वविद्यालय प्रबंधन से आग्रह किया कि महिलाओं को कृषि अनुसंधान और शिक्षा में आगे बढ़ाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं। कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा 24 हजार करोड़ रुपये की धन-धान्य योजना की शुरुआत किसानों के लिए मील का पत्थर साबित होगी। यह योजना प्रदेश के 12 जिलों में संचालित होगी, जिससे किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।
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उन्होंने विश्वविद्यालय से अपील की कि छात्र-छात्राओं को इस योजना पर अध्ययन व परियोजनाओं से जोड़ें, ताकि वे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में योगदान दे सकें। किसानों को फसल बीमा योजना, भूमि-मृदा परीक्षण और जल संरक्षण जैसी सुविधाओं का लाभ उठाकर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कार्य करना चाहिए। विश्वविद्यालय में आगामी सत्र से पशु चिकित्सा पाठ्यक्रम भी शुरू किया जाएगा।
छात्रों से कहा कि प्राकृतिक खेती और नवाचार के शोध से भी मेडल मिल सकते हैं। इस मौके पर भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) नई दिल्ली के निदेशक चेरूकुमल्ली, कुलपति एसवीएस राजू, जिलाधिकारी जे. रीभा मौजूद रहीं।
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प्राकृतिक और गो आधारित खेती पर जोर
राज्यपाल ने कहा कि रासायनिक खादों के अत्यधिक उपयोग से बीमारियां बढ़ रही हैं। किसानों को अब गोबर खाद और जैविक तरीकों से खेती करनी चाहिए। इससे फसलों की गुणवत्ता बढ़ेगी और बाजार में बेहतर मूल्य मिलेगा। उन्होंने विश्वविद्यालय को प्रेरित किया कि छात्र-छात्राएं प्राकृतिक खेती पर शोध करें और इसे बुंदेलखंड के हर गांव तक पहुंचाएं।
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जल संरक्षण की दिशा में बड़ी पहल
राज्यपाल ने बताया कि विश्वविद्यालय परिसर में वर्षा जल संचयन के लिए 24 बड़े तालाब बनाए गए हैं। यह तालाब कृषि कार्यों में उपयोगी साबित होंगे और किसानों को सिंचाई की समस्या से राहत देंगे। उन्होंने कहा कि जल है तो जीवन है, इसलिए हर किसान को खेत पर जल संरक्षण अपनाना चाहिए। विश्वविद्यालय को इसे मॉडल के रूप में ग्रामीण क्षेत्रों में लागू करना चाहिए।
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राज्यपाल ने कहा कि जहां नारी है, वहीं सृजन है। महिलाएं सृष्टि की रचना और पोषण करती हैं। उन्होंने कहा कि कृषि शिक्षा में छात्राओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है, जो समाज में सकारात्मक बदलाव का प्रतीक है। किसानों के सशक्तिकरण और ग्रामीण भारत के उत्थान से ही प्रदेश और देश सशक्त बन सकता है। भारत आज दुग्ध और मिलेट्स उत्पादन में अग्रणी है, अब आवश्यकता है कि किसान फूड प्रोसेसिंग और कृषि-व्यवसाय प्रबंधन पर ध्यान दें।
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विश्वविद्यालय प्रबंधन से आग्रह किया कि महिलाओं को कृषि अनुसंधान और शिक्षा में आगे बढ़ाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं। कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा 24 हजार करोड़ रुपये की धन-धान्य योजना की शुरुआत किसानों के लिए मील का पत्थर साबित होगी। यह योजना प्रदेश के 12 जिलों में संचालित होगी, जिससे किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।
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उन्होंने विश्वविद्यालय से अपील की कि छात्र-छात्राओं को इस योजना पर अध्ययन व परियोजनाओं से जोड़ें, ताकि वे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में योगदान दे सकें। किसानों को फसल बीमा योजना, भूमि-मृदा परीक्षण और जल संरक्षण जैसी सुविधाओं का लाभ उठाकर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कार्य करना चाहिए। विश्वविद्यालय में आगामी सत्र से पशु चिकित्सा पाठ्यक्रम भी शुरू किया जाएगा।
छात्रों से कहा कि प्राकृतिक खेती और नवाचार के शोध से भी मेडल मिल सकते हैं। इस मौके पर भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) नई दिल्ली के निदेशक चेरूकुमल्ली, कुलपति एसवीएस राजू, जिलाधिकारी जे. रीभा मौजूद रहीं।
प्राकृतिक और गो आधारित खेती पर जोर
राज्यपाल ने कहा कि रासायनिक खादों के अत्यधिक उपयोग से बीमारियां बढ़ रही हैं। किसानों को अब गोबर खाद और जैविक तरीकों से खेती करनी चाहिए। इससे फसलों की गुणवत्ता बढ़ेगी और बाजार में बेहतर मूल्य मिलेगा। उन्होंने विश्वविद्यालय को प्रेरित किया कि छात्र-छात्राएं प्राकृतिक खेती पर शोध करें और इसे बुंदेलखंड के हर गांव तक पहुंचाएं।
जल संरक्षण की दिशा में बड़ी पहल
राज्यपाल ने बताया कि विश्वविद्यालय परिसर में वर्षा जल संचयन के लिए 24 बड़े तालाब बनाए गए हैं। यह तालाब कृषि कार्यों में उपयोगी साबित होंगे और किसानों को सिंचाई की समस्या से राहत देंगे। उन्होंने कहा कि जल है तो जीवन है, इसलिए हर किसान को खेत पर जल संरक्षण अपनाना चाहिए। विश्वविद्यालय को इसे मॉडल के रूप में ग्रामीण क्षेत्रों में लागू करना चाहिए।