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महिला सुरक्षा ढिंढोरे के बीच पुलिस की बर्बरता क्यों?
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Why police brutality amidst women's safety drummers?
- फोटो : BANDA
बांदा। महिला सुरक्षा की बात होती है तो फिर एक वकील के परिवार की महिलाओं के साथ पुलिस की बर्बरता क्या न्यायपूर्ण थी? इस पर पुलिस उपाधीक्षक राकेश कुमार सिंह बोले- पुलिस को भी आत्मरक्षा का अधिकार है। कानून तोड़ना अपराध है। पुलिस किसी की दुश्मन नहीं है। न्यायपूर्ण कार्रवाई करती है। छात्रा का सवाल और पुलिस अफसर का जवाब मंगलवार को शहर के सरस्वती बालिका विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में हुआ। मौका था अमर उजाला फाउंडेशन के तत्वावधान में आयोजित ‘पुलिस की पाठशाला’ का।
पाठशाला में पुलिस उपाधीक्षक ने कहा कि महिलाओं और छात्राओं की शिकायत और समस्या सुनने के लिए महिला कांस्टेबल हैं। उन्होंने स्कूलों में शिकायत पेटिका रखवाने की सलाह दी। कहा कि पुलिस हर हफ्ते ये शिकायतें पेटिका से लेगी और शिकायतकर्ता छात्रा का नाम गोपनीय रखते हुए कार्रवाई करेगी। तेज आवाज में डीजे बजने पर पढ़ाई प्रभावित हो रही है तो इसकी भी शिकायत यूपी-112 में करें। प्रभारी प्रधानाचार्य वर्षा गुप्ता ने आभार जताया। किरन जैन, रामसजीवन आदि स्टाफ उपस्थित रहा। संचालन बीना शुक्ला ने किया। छात्रा मानवी अवस्थी व अभिका अवस्थी ने गीत पेश किया।
छात्रा पलक सेन : महिला सशक्तीकरण और सुरक्षा पर विशेष जोर दिया जा रहा है, लेकिन पुलिस ने हाल ही में एक वकील के परिवार की महिलाओं के साथ बुरी तरह मारपीट की। क्या यह पुलिस का न्यायपूर्ण कार्य है? -
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पुलिस उपाधीक्षक : आपने सोशल मीडिया पर ध्यान दिया। कानून का पालन कराने गए चार पुलिस कर्मियों को कंटीले तारों, डंडों से पीटा गया। किसी को पीटने का अधिकार नहीं है। आत्मरक्षा का अधिकार सभी को है। पुलिस किसी की दुश्मन नहीं है। न्यायपूर्ण ढंग से कार्रवाई करती है।
परिधि यादव : थानों में महिला हेल्प डेस्क की अधिकांश छात्राओं और महिलाओं को जानकारी नहीं है। शोहदे छात्राओं से रास्ते में छेड़छाड़ करते हैं। हेल्प सिर्फ डेस्क तक न सीमित हो, बल्कि हर उस स्थान पर यह नजर आए जहां जरूरत है?
पुलिस उपाधीक्षक : महिला हेल्प डेस्क में महिला कांस्टेबल तैनात हैं। यहां आने वाली महिलाओं की समस्या की रिपोर्ट तैयार कर कार्रवाई की जाती है। हर 15 दिन में एसपी-एएसपी और हर महीने आईजी/एडीजी स्तर पर महिला हेल्प डेस्क की समीक्षा होती है। इसमें लापरवाही पर तुरंत कार्रवाई की जाती है।
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पाठशाला में पुलिस उपाधीक्षक ने कहा कि महिलाओं और छात्राओं की शिकायत और समस्या सुनने के लिए महिला कांस्टेबल हैं। उन्होंने स्कूलों में शिकायत पेटिका रखवाने की सलाह दी। कहा कि पुलिस हर हफ्ते ये शिकायतें पेटिका से लेगी और शिकायतकर्ता छात्रा का नाम गोपनीय रखते हुए कार्रवाई करेगी। तेज आवाज में डीजे बजने पर पढ़ाई प्रभावित हो रही है तो इसकी भी शिकायत यूपी-112 में करें। प्रभारी प्रधानाचार्य वर्षा गुप्ता ने आभार जताया। किरन जैन, रामसजीवन आदि स्टाफ उपस्थित रहा। संचालन बीना शुक्ला ने किया। छात्रा मानवी अवस्थी व अभिका अवस्थी ने गीत पेश किया।
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छात्रा पलक सेन : महिला सशक्तीकरण और सुरक्षा पर विशेष जोर दिया जा रहा है, लेकिन पुलिस ने हाल ही में एक वकील के परिवार की महिलाओं के साथ बुरी तरह मारपीट की। क्या यह पुलिस का न्यायपूर्ण कार्य है? -
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पुलिस उपाधीक्षक : आपने सोशल मीडिया पर ध्यान दिया। कानून का पालन कराने गए चार पुलिस कर्मियों को कंटीले तारों, डंडों से पीटा गया। किसी को पीटने का अधिकार नहीं है। आत्मरक्षा का अधिकार सभी को है। पुलिस किसी की दुश्मन नहीं है। न्यायपूर्ण ढंग से कार्रवाई करती है।
परिधि यादव : थानों में महिला हेल्प डेस्क की अधिकांश छात्राओं और महिलाओं को जानकारी नहीं है। शोहदे छात्राओं से रास्ते में छेड़छाड़ करते हैं। हेल्प सिर्फ डेस्क तक न सीमित हो, बल्कि हर उस स्थान पर यह नजर आए जहां जरूरत है?
पुलिस उपाधीक्षक : महिला हेल्प डेस्क में महिला कांस्टेबल तैनात हैं। यहां आने वाली महिलाओं की समस्या की रिपोर्ट तैयार कर कार्रवाई की जाती है। हर 15 दिन में एसपी-एएसपी और हर महीने आईजी/एडीजी स्तर पर महिला हेल्प डेस्क की समीक्षा होती है। इसमें लापरवाही पर तुरंत कार्रवाई की जाती है।