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मौसम आधारित मधुमक्खी पालन फायदेमंद
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कृषि विश्वविद्यालय में कार्यशाला संबोधित करते बिहार से आए डा. नीरज कुमार।
- फोटो : BANDA
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बांदा। कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय में दो दिवसीय मधुमक्खी पालन संगोष्ठी के अंतिम दिन बुधवार को इस व्यवसाय के विशेषज्ञों ने जानकारियां दीं। केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, बिहार से आए डॉ. नीरज कुमार ने कहा कि मौसम आधारित मधुमक्खी पालन करना चाहिए। शहद की बिक्री के लिए राष्ट्रीय बोर्ड में पंजीकरण जरूरी है।
डॉ. एसवी द्विवेदी ने कहा कि बुंदेलखंड में उद्यान और बागवानी व खेती के साथ मधुमक्खी पालन पर भी ध्यान देना चाहिए। गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे विश्वविद्यालय कुलपति डॉ. यूएस गौतम ने कहा कि शहद की अधिक खपत के लिए उसमें गुणवत्ता बनाए रखना जरूरी है। ऐेसे शहर उद्यमियों को विश्वविद्यालय हर संभव सहयोग देगा।
संगोष्ठी के दूसरे सत्र में डॉ. अभिषेक कालिया ने कहा कि किसानों को उद्योग स्थापित करने से पूर्व बाजार की उपलब्धता का अध्ययन करना चाहिए। सामूहिक प्रयास भी किए जा सकते हैं।
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डॉ. एके पांडेय ने कहा कि मधुमक्खियों के व्यवहार पर अधिक शोध की जरूरत है। जलवायु परिवर्तन से यह किस प्रकार प्रभावित हो रही हैं यह भी देखा जाना चाहिए। डॉ. एके पांडेय व डॉ. अखिलेश श्रीवास्तव ने कहा कि मधुमक्खी पालने वाले किसानों को फसलों के फूल में कीटनाशक छिड़काव नहीं करना चाहिए। संगोष्ठी में डा.एके पांडेय उपस्थित रहे।
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डॉ. एसवी द्विवेदी ने कहा कि बुंदेलखंड में उद्यान और बागवानी व खेती के साथ मधुमक्खी पालन पर भी ध्यान देना चाहिए। गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे विश्वविद्यालय कुलपति डॉ. यूएस गौतम ने कहा कि शहद की अधिक खपत के लिए उसमें गुणवत्ता बनाए रखना जरूरी है। ऐेसे शहर उद्यमियों को विश्वविद्यालय हर संभव सहयोग देगा।
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संगोष्ठी के दूसरे सत्र में डॉ. अभिषेक कालिया ने कहा कि किसानों को उद्योग स्थापित करने से पूर्व बाजार की उपलब्धता का अध्ययन करना चाहिए। सामूहिक प्रयास भी किए जा सकते हैं।
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डॉ. एके पांडेय ने कहा कि मधुमक्खियों के व्यवहार पर अधिक शोध की जरूरत है। जलवायु परिवर्तन से यह किस प्रकार प्रभावित हो रही हैं यह भी देखा जाना चाहिए। डॉ. एके पांडेय व डॉ. अखिलेश श्रीवास्तव ने कहा कि मधुमक्खी पालने वाले किसानों को फसलों के फूल में कीटनाशक छिड़काव नहीं करना चाहिए। संगोष्ठी में डा.एके पांडेय उपस्थित रहे।