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हम वफादार हैं या गद्दार हैं, तारीख पढ़कर पता कीजिए

Sun, 01 Nov 2020 11:27 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 01 Nov 2020 11:27 PM IST
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We are loyal or traitors, read the date and find out
बांदा। लॉकडाउन की शुरुआत से बंद हो गईं मुशायरे की महफिलें अब फिर सजने लगी हैं। शनिवार की रात मर्दननाका में बज्मे इकरारिया के बैनर तले मासिक मुशायरा हुआ। सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क आदि के साथ शायरों ने शिरकत की।
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इस मुशायरे में मिसरा तरह- सब्र के साथ रब से दुआ कीजिए, पर शायरों ने कलाम पेश किए। सईद वारसी ने पढ़ा- खुल ही जाएगा राजे बका आप पर, अपनी हस्ती को पहले फना कीजिए। मुशायरे की निजामत कर रहे हकीम बशीर तालिब ने कहा- हम वफादार है कि गद्दार हैं, मेरी तारीख पढ़कर पता कीजिए।
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शरीफ बांदवी का शेर था- दूर सर से मेरी हर बला कीजिए, पार नैय्या मेरी मुस्तफा कीजिए। आरिफ बांदवी ने सुनाया- सर मुसीबत जो आई है टल जाएगी, सब्र के साथ रब से दुआ कीजिए। असगर बांदवी ने कहा- वक्त पे अपने सजदे अदा कीजिए, मत नमाजों को अपनी कजा कीजिए।
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मुशायरे की सदारत कर रहे डॉ. खालिद इजहार ने पढ़ा- मरहबा आमदे मुस्तफा हो गई, पेश नाते हबीबे खुदा कीजिए। इनके अलावा गुलजार बांदवी, नजरे आलम नजर आदि शायरों ने भी कलाम पेश किए।

मुशायरा के मेजबान हकीम बशीर तालिब ने बताया कि अब हर माह मुशायरे का सिलसिला जारी रहेगा। महीने के आखिरी शनिवार को यह मुशायरा होगा। नवंबर के लिए मिसरा तरह दिया गया है- हमसे ही क्यूं नफरत है आली जनाब को।
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