{"_id":"67f174457a412bf22302ca9d","slug":"villagers-stopped-work-in-ken-betwa-link-by-chasing-away-the-workers-banda-news-c-212-1-bnd1004-124537-2025-04-05","type":"story","status":"publish","title_hn":"Banda News: केन-बेतवा लिंक में ग्रामीणों ने मजदूरों को खदेड़कर काम रोका","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Banda News: केन-बेतवा लिंक में ग्रामीणों ने मजदूरों को खदेड़कर काम रोका
विज्ञापन
विरोध जताते ग्रामीण
- फोटो : सोशल मीडिया
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बांदा। बुंदेलखंड के लिए वरदान बताई जा रही केन-बेतवा लिंक परियोजना का काम शुरु होते ही प्रभावित क्षेत्रों के ग्रामीणों ने इसके विरुद्ध बगावत कर दी। शुक्रवार को आधा दर्जन गांवों के सैंकड़ों महिला व पुरुष ग्रामीणों ने दोधन बांध निर्माण स्थल पर धावा बोलकर काम बंद करा दिया और मजदूरों व मशीनों को दूर तक खदेड़ दिया। आक्रोशित ग्रामीणों का कहना है कि उनके साथ धोखाधड़ी की जा रही है। परियोजना में ले ली गई उनकी जमीन का जब तक मुआवजा और विस्थापित किए जाने का पैकेज नहीं मिलेगा तब तक बांध का काम शुरु नहीं होने देंगे।
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधान मंत्रित्व काल वर्ष 2005 में केन-बेतवा नदियों को जोड़ने की परियोजना स्वीकृत हुई थी। यूपी-एमपी और केंद्र सरकारों के बीच सहमति न बन पाने से करीब दो दशक तक यह परियोजना धरातल पर नहीं उतर पाई।
पिछले वर्ष सारी रुकावटें खत्म कर प्रधानमंत्री मोदी ने खजुराहो में इस परियोजना की आधारशिला रखी थी। उसी के बाद काम शुरू हो गया था। डोढन गांव में बांध का निर्माण हो रहा है। भारी भरकम मशीनों और मजदूरों से खोदाई कराई जा रही है। इसी बीच शुक्रवार को परियोजना में अधिग्रहीत किए गए आधा दर्जन गांवों के सैंकड़ों ग्रामीणों (महिला-पुरुष) ने वहां धावा बोल दिया। मजदूरों और मशीनों को पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क के भूसौर (पन्ना) बैरियर के बाहर तक खदेड़ दिया। ग्रामीणों ने वहां धरना भी दिया। मांगों के नारे लगाए। कहा ‘दाम नहीं तो काम नही”, जब तक उन्हें मुआवजा और पैकेज नहीं दिया जाएगा तब तक वह काम नहीं होने देंगे। यह ग्रामीण डोढन, पलकौहां, खरयानी, मैनारी, सुकबहा आदि गांवों के बताए जा रहे हैं। उनका कहना है कि उनकी जमीनों का अधिग्रहण कर लिया गया है पर अब तक मुआवजा नहीं दिया गया। मुआवजा और उनके विस्थापन का उचित पैकेज न दिए जाने तक काम नहीं होने देंगे और आरपार की लड़ाई लड़ेंगे।
विज्ञापन
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -
44,605 करोड़ की परियोजना
केन-बेतवा लिंक परियोजना को भारत सरकार ने 44,605 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत के साथ मंजूरी दी है। इसमें 39,317 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता शामिल है। इसका क्रियान्वयन केंद्र और मध्य प्रदेश तथा उत्तर प्रदेश राज्यों द्वारा केन-बेतवा लिंक परियोजना प्राधिकरण (केबीएलपीए) के माध्यम से संयुक्त रूप से किया जाएगा।
विज्ञापन
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधान मंत्रित्व काल वर्ष 2005 में केन-बेतवा नदियों को जोड़ने की परियोजना स्वीकृत हुई थी। यूपी-एमपी और केंद्र सरकारों के बीच सहमति न बन पाने से करीब दो दशक तक यह परियोजना धरातल पर नहीं उतर पाई।
विज्ञापन
पिछले वर्ष सारी रुकावटें खत्म कर प्रधानमंत्री मोदी ने खजुराहो में इस परियोजना की आधारशिला रखी थी। उसी के बाद काम शुरू हो गया था। डोढन गांव में बांध का निर्माण हो रहा है। भारी भरकम मशीनों और मजदूरों से खोदाई कराई जा रही है। इसी बीच शुक्रवार को परियोजना में अधिग्रहीत किए गए आधा दर्जन गांवों के सैंकड़ों ग्रामीणों (महिला-पुरुष) ने वहां धावा बोल दिया। मजदूरों और मशीनों को पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क के भूसौर (पन्ना) बैरियर के बाहर तक खदेड़ दिया। ग्रामीणों ने वहां धरना भी दिया। मांगों के नारे लगाए। कहा ‘दाम नहीं तो काम नही”, जब तक उन्हें मुआवजा और पैकेज नहीं दिया जाएगा तब तक वह काम नहीं होने देंगे। यह ग्रामीण डोढन, पलकौहां, खरयानी, मैनारी, सुकबहा आदि गांवों के बताए जा रहे हैं। उनका कहना है कि उनकी जमीनों का अधिग्रहण कर लिया गया है पर अब तक मुआवजा नहीं दिया गया। मुआवजा और उनके विस्थापन का उचित पैकेज न दिए जाने तक काम नहीं होने देंगे और आरपार की लड़ाई लड़ेंगे।
विज्ञापन
44,605 करोड़ की परियोजना
केन-बेतवा लिंक परियोजना को भारत सरकार ने 44,605 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत के साथ मंजूरी दी है। इसमें 39,317 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता शामिल है। इसका क्रियान्वयन केंद्र और मध्य प्रदेश तथा उत्तर प्रदेश राज्यों द्वारा केन-बेतवा लिंक परियोजना प्राधिकरण (केबीएलपीए) के माध्यम से संयुक्त रूप से किया जाएगा।