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Banda News: वृहद गोशालाओं में बनेगा वर्मी कंपोस्ट व जीवामृत, प्रत्येक की लागत 1.60 करोड़
Sun, 07 Dec 2025 12:53 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Sun, 07 Dec 2025 12:53 AM IST
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फोटो- 19 डुबरी की बनकर तैयार गोशाला, 15 को वर्चुवल उद्घाटन। संवाद
बांदा। जिले में 6.40 करोड़ की लागत से जल्द चार और वृहद गोशाला खुलेंगी। एक का निर्माण पूरा हो गया है। तीन निर्माणाधीन हैं। वृहद गोशालाओं में 1500 पशु संरक्षित किए जाएंगे। पशुओं के गोबर व गोमूत्र से वर्मी कंपोस्ट व जीवामृत बनाने की योजना है। प्रत्येक गोशाला में आसपास की 10 अस्थायी गोशालाओं और गांवों को संबद्ध किया जाएगा। वहां का गोबर और गोमूत्र खरीदा जाएगा।
शासन ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में जिले को चार वृहद गोशाला दी थीं। प्रत्येक गोशाला की लागत 1.60 करोड़ हैं। गोशाला में केयर टेकर रूम, भूसा गोदाम, बिजली, टिनशेड, सौर ऊर्जा संचालित मर्करी, चरही, पानी के लिए बोरिंग आदि होगी। महुआ ब्लाक के डुबरी की गोशाला बनकर तैयार हो गई है। जिसका 15 दिसंबर को प्रदेश के पशुपालन मंत्री धर्मपाल वर्चुअल उद्घाटन करेंगे। इसी ब्लाक के गोविंदपुर की गोशाला का निर्माण करीब 50 फीसद व बबेरू ब्लाक के जलालपुर गांव की गोशाला का काम अभी 25 फीसद पूरा हुआ है।
महुआ ब्लाक की अजीतपारा गोशाला के लिए अभी हाल में जमीन उपलब्ध हुई है। जिससे यहां अभी निर्माण शुरू नहीं हुआ है। उधर जिले के ग्राम आलोना, खप्टिहाकला, सिंधन कला, बड़ागांव, रगौलीभटपुरा, कनवारा पहले से संचालित हैं। रगौली भटपुरा में गोबर गैस प्लांट से बिजली तैयार की जा रही है। जिसका उपयोग गोशाला में संचालित आटा चक्की व रोशनी के लिए किया जा रहा है लेकिन पशुपालन विभाग का कहना है कि गोशालाओं में अब वर्मी कंपोस्ट व जीवामृत बनाने की योजना बना रहा है।
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मुख्य पशु चिकित्साधिकारी एसके वैस ने बताया कि सभी गोशालाओं के संचालित होने के बाद ग्राम पंचायत को गोशाला के गोबर व गोमूत्र से वर्मी कंपोस्ट और जीवामृत बनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। एक वृहद गोशाला में आसपास के 10 गांव व अस्थाई गोशालाओं को जोड़ा जाएगा। वहां का गोबर व गोमूत्र खरीदा जाएगा। बर्मी कंपोस्ट व जीवामृत बनाने का काम स्वयं सहायता की महिलाओं के माध्यम से कराया जाएगा। उन्हें बांदा कृषि विश्वविद्यालय अथवा झांसी कृषि विश्वविद्यालय के द्वारा 10 दिवसीय प्रशिक्षण दिलाया जाएगा।
ग्राम पंचायत को वर्मी कंपोस्ट व जीवामृत की बिक्री के लिए बाजार उपलब्ध कराया जाएगा। इससे जहां स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को रोजगार मिलेगा। वहीं पशुपालक बेवजह बर्बाद होने वाले गोबर व गोमूत्र को बेचकर कुछ आय प्राप्त कर सकेंगे। पशुओं को घर में रखने के प्रति लोगों में रुझान बढ़ेगा। अन्ना प्रथा पर रोक लगेगी। योजना सफल रही तो आगे अन्य बड़ी गोशालाओं में भी यह काम शुरू किया जाएगा।
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गोशालाओं की स्थिति एक नजर में-
जिले में संचालित गोशाला व संरक्षित पशु
अस्थाई गोशाला-290, संरक्षित पशु 58673
स्थाई गोशाला-20, संरक्षित पशु 5037
कुल गोशाला में संरक्षित पशु-63710
सहभागिता योजना में दिए गए पशु-7662
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शासन ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में जिले को चार वृहद गोशाला दी थीं। प्रत्येक गोशाला की लागत 1.60 करोड़ हैं। गोशाला में केयर टेकर रूम, भूसा गोदाम, बिजली, टिनशेड, सौर ऊर्जा संचालित मर्करी, चरही, पानी के लिए बोरिंग आदि होगी। महुआ ब्लाक के डुबरी की गोशाला बनकर तैयार हो गई है। जिसका 15 दिसंबर को प्रदेश के पशुपालन मंत्री धर्मपाल वर्चुअल उद्घाटन करेंगे। इसी ब्लाक के गोविंदपुर की गोशाला का निर्माण करीब 50 फीसद व बबेरू ब्लाक के जलालपुर गांव की गोशाला का काम अभी 25 फीसद पूरा हुआ है।
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महुआ ब्लाक की अजीतपारा गोशाला के लिए अभी हाल में जमीन उपलब्ध हुई है। जिससे यहां अभी निर्माण शुरू नहीं हुआ है। उधर जिले के ग्राम आलोना, खप्टिहाकला, सिंधन कला, बड़ागांव, रगौलीभटपुरा, कनवारा पहले से संचालित हैं। रगौली भटपुरा में गोबर गैस प्लांट से बिजली तैयार की जा रही है। जिसका उपयोग गोशाला में संचालित आटा चक्की व रोशनी के लिए किया जा रहा है लेकिन पशुपालन विभाग का कहना है कि गोशालाओं में अब वर्मी कंपोस्ट व जीवामृत बनाने की योजना बना रहा है।
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मुख्य पशु चिकित्साधिकारी एसके वैस ने बताया कि सभी गोशालाओं के संचालित होने के बाद ग्राम पंचायत को गोशाला के गोबर व गोमूत्र से वर्मी कंपोस्ट और जीवामृत बनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। एक वृहद गोशाला में आसपास के 10 गांव व अस्थाई गोशालाओं को जोड़ा जाएगा। वहां का गोबर व गोमूत्र खरीदा जाएगा। बर्मी कंपोस्ट व जीवामृत बनाने का काम स्वयं सहायता की महिलाओं के माध्यम से कराया जाएगा। उन्हें बांदा कृषि विश्वविद्यालय अथवा झांसी कृषि विश्वविद्यालय के द्वारा 10 दिवसीय प्रशिक्षण दिलाया जाएगा।
ग्राम पंचायत को वर्मी कंपोस्ट व जीवामृत की बिक्री के लिए बाजार उपलब्ध कराया जाएगा। इससे जहां स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को रोजगार मिलेगा। वहीं पशुपालक बेवजह बर्बाद होने वाले गोबर व गोमूत्र को बेचकर कुछ आय प्राप्त कर सकेंगे। पशुओं को घर में रखने के प्रति लोगों में रुझान बढ़ेगा। अन्ना प्रथा पर रोक लगेगी। योजना सफल रही तो आगे अन्य बड़ी गोशालाओं में भी यह काम शुरू किया जाएगा।
गोशालाओं की स्थिति एक नजर में-
जिले में संचालित गोशाला व संरक्षित पशु
अस्थाई गोशाला-290, संरक्षित पशु 58673
स्थाई गोशाला-20, संरक्षित पशु 5037
कुल गोशाला में संरक्षित पशु-63710
सहभागिता योजना में दिए गए पशु-7662