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धरना देकर मनाया आउटसोर्सिंग कर्मियों ने दशहरा
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मेडिकल कालेज में हड़ताली आउट सोर्सिंग स्वास्थ्य कर्मियों को समझाती पुलिस।
- फोटो : BANDA
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बांदा। चार माह से मानदेय न देने और नई फर्म द्वारा मानदेय में भारी कटौती करने के विरोध में यहां मेडिकल कालेज के आउटसोर्सिंग कर्मियों की हड़ताल और धरना जारी है। दशहरे जैसे बड़े पर्व पर भी ये कर्मी त्योहार मनाने घर नहीं गए। मेडिकल कालेज में धरने पर डटे रहे। उधर, बुधवार को मेडिकल कालेज प्रशासन द्वारा पुलिस बुला लिए जाने पर हड़ताल कर्मी और भड़क उठे। बाद में मेडिकल कालेज में आउट सोर्सिंग कर्मियों का प्रभार संभाले डा. दिलीप सिंह के आश्वासन पर कर्मियों ने हड़ताल स्थगित करने और गुरुवार से काम पर लौटने का निर्णय लिया।
संयुक्त स्वास्थ्य आउटसोर्सिंग संविदा कर्मचारी संघ उत्तर प्रदेश के मीडिया प्रभारी सच्चितानंद मिश्रा ने बताया कि बांदा व इलाहाबाद मेडिकल कालेजों में कर्मचारी/मानव आपूर्ति के लिए 6 मार्च 2019 को लखनऊ की कंपनी को ठेका दिया है, लेकिन शिकायतों के चलते नई कंपनी को इलाहाबाद में काम नहीं मिल सका। बांदा में इस कंपनी ने यहां के प्रधानाचार्य से अनुबंध कार्य ले लिया है।
बताया कि शासन से सिर्फ 28 पैरामेडिकल कर्मचारियों की तैनाती का अनुबंध करने के बाद प्रधानाचार्य पूर्व से कार्यरत यहां लगभग 300 कर्मचारियों को नई कंपनी में समाहित कर रहे हैं। जबरन उनका रजिस्ट्रेशन करा दिया। सेवा प्रदाता फर्म द्वारा पंजीकरण के नाम पर 590 रुपये और प्रत्येक कर्मचारी से 15 हजार का डिमांड ड्राफ्ट मांग रही है।
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इसकी शिकायत की तो कर्मचारियों की उपस्थिति रोक दी गई। चार माह से उपस्थिति रजिस्टर में उनके हस्ताक्षर नहीं कराए जा रहे। आरोप लगाया कि उच्चाधिकारियों द्वारा मेडिकल कालेजों में आउटसोर्सिंग नीतियों में मनमानी की जा रही है। इसकी जांच अभी पूरी नहीं हो पाई। चार माह से वेतन न मिलने से कर्मचारियों के परिवार आर्थिक तंगहाली से घिर गए हैं।
उधर, धरना दे रहे आउटसोर्सिंग कर्मियों से मंगलवार को सपा जिलाध्यक्ष शमीम बांदवी ने मुलाकात की और उनका ज्ञापन लिया। मेडिकल कालेज प्रशासन और सरकार के रवैये की निंदा की। बुधवार को स्थानीय पुलिस ने धरना दे रहे कर्मचारियों से बात की और प्रधानाचार्य से मुलाकात कर वार्ता की। बाद में मेडिकल कालेज के डा. दिलीप सिंह (प्रभारी आउट सोर्सिंग) ने धरना स्थल आकर कर्मचारियों को बताया कि उनकी उपस्थिति के हस्ताक्षर, वेतन, छुट्टी आदि मांगों पर प्रधानाचार्य से बात करके जल्द ही समस्या सुलझाएंगे। इस आश्वासन पर मेडिकल कर्मियों ने फिलहाल आंदोलन स्थगित करने का निर्णय लिया है।
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संयुक्त स्वास्थ्य आउटसोर्सिंग संविदा कर्मचारी संघ उत्तर प्रदेश के मीडिया प्रभारी सच्चितानंद मिश्रा ने बताया कि बांदा व इलाहाबाद मेडिकल कालेजों में कर्मचारी/मानव आपूर्ति के लिए 6 मार्च 2019 को लखनऊ की कंपनी को ठेका दिया है, लेकिन शिकायतों के चलते नई कंपनी को इलाहाबाद में काम नहीं मिल सका। बांदा में इस कंपनी ने यहां के प्रधानाचार्य से अनुबंध कार्य ले लिया है।
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बताया कि शासन से सिर्फ 28 पैरामेडिकल कर्मचारियों की तैनाती का अनुबंध करने के बाद प्रधानाचार्य पूर्व से कार्यरत यहां लगभग 300 कर्मचारियों को नई कंपनी में समाहित कर रहे हैं। जबरन उनका रजिस्ट्रेशन करा दिया। सेवा प्रदाता फर्म द्वारा पंजीकरण के नाम पर 590 रुपये और प्रत्येक कर्मचारी से 15 हजार का डिमांड ड्राफ्ट मांग रही है।
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इसकी शिकायत की तो कर्मचारियों की उपस्थिति रोक दी गई। चार माह से उपस्थिति रजिस्टर में उनके हस्ताक्षर नहीं कराए जा रहे। आरोप लगाया कि उच्चाधिकारियों द्वारा मेडिकल कालेजों में आउटसोर्सिंग नीतियों में मनमानी की जा रही है। इसकी जांच अभी पूरी नहीं हो पाई। चार माह से वेतन न मिलने से कर्मचारियों के परिवार आर्थिक तंगहाली से घिर गए हैं।
उधर, धरना दे रहे आउटसोर्सिंग कर्मियों से मंगलवार को सपा जिलाध्यक्ष शमीम बांदवी ने मुलाकात की और उनका ज्ञापन लिया। मेडिकल कालेज प्रशासन और सरकार के रवैये की निंदा की। बुधवार को स्थानीय पुलिस ने धरना दे रहे कर्मचारियों से बात की और प्रधानाचार्य से मुलाकात कर वार्ता की। बाद में मेडिकल कालेज के डा. दिलीप सिंह (प्रभारी आउट सोर्सिंग) ने धरना स्थल आकर कर्मचारियों को बताया कि उनकी उपस्थिति के हस्ताक्षर, वेतन, छुट्टी आदि मांगों पर प्रधानाचार्य से बात करके जल्द ही समस्या सुलझाएंगे। इस आश्वासन पर मेडिकल कर्मियों ने फिलहाल आंदोलन स्थगित करने का निर्णय लिया है।