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Banda News: बारिश और ओलावृष्टि से 40 फीसदी तक फसलें नष्ट

Sun, 02 Apr 2023 12:24 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 02 Apr 2023 12:24 AM IST
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Up to 40 percent of crops destroyed due to rain and hail
बांदा। 15 दिन में दूसरी बार बारिश व ओलावृष्टि से चित्रकूटधाम मंडल के किसानों की करीब 40 फीसदी तक फसलों को नुकसान हुआ है। इससे किसान तबाही की कगार पर पहुंच गया है। इससे इतर जिला प्रशासन के सर्वे में किसानों की फसल को सिर्फ10 से 15 फीसदी ही नुकसान होने का दावा किया गया है। ऐसे में किसानों के नुकसान की भरपाई के लिए बीमा कंपनियों का ही सहारा है। किसी किसान के घर में बेटी का ब्याह है तो किसी को इलाज कराना या कर्ज चुकाना है।
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चित्रकूटधाम मंडल के चारों जनपद में रबी की फसल का रकबा करीब आठ लाख हेक्टेयर है। करीब 15 दिन में शुक्रवार को दूसरी बार बारिश हुई है। ऐसे में हर बार बारिश, ओलावृष्टि व तेज हवाओं के चलने से फसलों को नुकसान हो रहा है। दो बार के नुकसान को ही जोड़ लें तो जिला प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार 33 फीसदी से ऊपर पहुंच जाएगा। लेकिन हर बार सरकार के मुआवजा होने के तय मानक के अनुसार सर्वे में नुकसान नहीं होने का दावा किया जाता रहा है। इस बार भी कुछ इसी तरह के हालात बताए गए हैं। राजस्व विभाग की फसलों के नुकसान की फौरी तौर पर जो सर्वे रिपोर्ट शासन को भेजी गई है उसमें बांदा में करीब 10 से 15 फीसदी नुकसान, महोबा में महज पांच से दस फीसदी नुकसान, चित्रकूट में 15 से 18 फीसदी नुकसान और हमीरपुर जनपद में भी महज 15 फीसदी के आसपास ही फसलों का नुकसान होने का दावा किया गया है। जबकि दोनों बार की बारिश मिलाकर अब तक किसानों का 40 फीसदी से ऊपर तक का नुकसान हो चुका है। ऐसे में सरकार से किसानों को मुआवजा मिलने की कोई किरण नजर नहीं आ रही है। हां विकल्प के तौर पर बीमा कंपनियां हैं। कंपनियों से नुकसान का सर्वे कराने की शर्त है कि बारिश व ओलावृष्टि होने के बाद 72 घंटे के अंदर उनके टोल फ्री नंबर पर शिकायत दर्ज कराई जाए।
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इनसेट
बांदा में जिले के इन इलाकों में नुकसान
बांदा में बारिश व ओलावृष्टि की सूचना के बाद कृषि विभाग व राजस्व विभाग ने फौरी सर्वे कराया। इसमें कृषि विभाग के अनुसार बारिश व ओलावृष्टि से नरैनी, पैलानी, बबेरू के कुछ हिस्सों में 10 से 15 फीसदी नुकसान हुआ है। जहां पर ओलावृष्टि नहीं हुई है वहां पर पांच से 10 फीसदी नुकसान है।
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इनसेट
चित्रकूट, महोबा व हमीरपुर का नुकसान
चित्रकूट जनपद में मऊ और मानिकपुर तहसील और रामनगर ब्लॉक के गांवों में ही ओलावृष्टि व बारिश से नुकसान होने की बात कही गई है। इसी तरह हमीरपुर में तहसील सदर और मौदहा क्षेत्र के ही गांवों में नुकसान होने का दावा किया जा रहा है। इसी तरह महोबा में भी कुछ इलाकों के गांवों में ही नुकसान होना बताया गया है।

किसानों की पीड़ा सुनिए
खरेई गांव के किसानों ने बयां किया फसल बर्बादी का दर्द
- खरेई निवासी किसान मूलचंद निषाद के नाम आठ बीघे जमीन है। उसने चना गेहूं और लाही की फसल बोई थी। 20000 की लागत खाद, बीज और सिंचाई में आई थी। कुछ फसल मवेशियों ने उजाड़ दी, बची फसल बारिश में बर्बाद हो गई। बताया कि बेटी रामदेवी की शादी छह मई को होनी है। फसल तैयार होने पर धूमधाम से शादी की सोच रहे थे, लेकिन अब वह आस भी टूट गई। 12 सदस्यों का भरा पूरा परिवार है। अब मजदूरी करके ही शादी और पेट भरने का एक मात्र रास्ता बचा है।
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- खरेई गांव के किसान सौखीलाल निषाद ने बताया कि उसने अपने पांच बीघे जमीन में चना गेहूं और लाही की फसल बोई थी। खाद बीज व सिंचाई को मिलाकर लगभग 12000 मजदूरी करके खेत में लागत लगाई थी। 21 मई को बेटी अनीता की शादी करनी है। अब कहां से शादी करूंगा इसकी चिंता है सता रही है। घर में पांच सदस्य हैं। बरसात से फसल खराब होने से अब मजदूरी करके पैसे जोड़कर और लोगों से कर्ज लेकर ही शादी कर पाऊंगा।
- आलोना गांव के किसान लखन सिंह ने बताया कि 15 बीघे में गेहूं चना व सरसों की फसल बोई थी। इसमें 30000 की लागत आई थी। कर्ज लेकर खाद बीज का इंतजाम किया था। जितना पैसा लगाया था उतना भी मिलना मुश्किल हो गया है। बैंक से 500000 का कर्ज ले रखा है। बरसात के चलते गेहूं की फसल चौपट हो गई है। घर में मौजूद 12 सदस्यों को मेहनत मजदूरी कर परवरिश करनी पड़ेगी। बच्चों की पढ़ाई लिखाई कैसे होगी यह समझ में नहीं आ रहा है।
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- अलोना गांव निवासी किसान करण सिंह ने बताया कि 25 बीघा जमीन में गेहूं, चना और मसूर बोई थी 20000 की खाद और 5000 रुपये सिंचाई का खर्च हुआ था। सोसाइटी का 40000 रुपये अलग से कर्ज है, जो भर नहीं पा रहे हैं। फसल खराब होने की वजह से अब तो पलायन का ही रास्ता शेष बचा है। बच्चों की पढ़ाई भी बाधित हो गई है। घर में 14 सदस्य हैं, परदेस जाकर मेहनत मजदूरी करनी पड़ेगी। लेखपाल भी गांव नहीं आया और ना ही किसानों की फसल का कोई आंकलन किया। अब तो गुजारा ईश्वर के सहारे है।


वर्जन
अपर जिलाधिकारी उमाकांत त्रिपाठी का कहना है कि कृषि अनुदान के लिए नुकसान का मानक 33 फीसदी है। बीमित किसान नुकसान की जानकारी बीमा कंपनी प्रतिनिधियों को अवश्य दें। बीमा कंपनी पांच फीसदी नुकसान पर भी क्लेम देगी।
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