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लावारिस बच्ची को गोद लिया, पालने के लिए नौकरी छोड़ी

Sat, 09 May 2015 11:56 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा Updated Sat, 09 May 2015 11:56 PM IST
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Unclaimed child adopted, For raised quit job
27 वर्षों से संतान के लिए तरस रही विनीता रैकवार एक रात अचानक ‘मां’ बन गई। यह नवरात्र की रात थी। अब विनीता के लिए भी मदर्स-डे खास हो गया है। कोख से न सही, अस्पताल से मिली नवजात बालिका को वह मां का भरपूर प्यार दे रही है।
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27 वर्षों से सूने पडे़ विनीता के घर में पिछले डेढ़ माह से किलकारियां गूंज रही हैं। ‘मां’ की ममता में कहीं नौकरी आड़े न आ जाए इसलिए विनीता ने स्कूल की नौकरी भी छोड़ दी। कांशीराम कालोनी (हरदौली) निवासी विनीता रैकवार की शादी 1988 में हुई थी। लेकिन संतान नहीं हुई।
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हर वर्ष ‘मदर्स-डे’ सूनेपन में बीतता रहा। लेकिन पिछले 21 मार्च को नवरात्र पर विनीता का ‘मां’ बनने का सपना पूरा हो गया। कोई महिला अपनी नवजात बालिका अस्पताल में छोड़कर भाग गई। विनीता ने डीएम और पुलिस में अर्जी देने की औपचारिकता पूरी करके इस लावारिस बालिका को अपना लिया। बालिका को गोद मिल गई और विनीता ‘मां’ बन गई।
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विनीता ने बालिका का नाम ‘वैष्णवी’ रखा है। उसकी भरपूर देखभाल करने के साथ ही मां का पूरा प्यार दे रही है। विनीता का कहना है कि बालिका की जन्मभूमि अस्पताल है, इसलिए वह उसे डाक्टर बनाने की भरपूर कोशिश करेगी।


विनीता को ‘मां’ बनने की कितनी ज्यादा खुशी है, इसके लिए इतना जान लेना ही पर्याप्त है कि विनीता ने एक निजी स्कूल की नौकरी छोड़ दी। उसका कहना है कि दिन भर स्कूल में रहकर वह ‘मां’ का फर्ज अदा नहीं कर सकती थी। चाय-पान की दुकान किए विनीता का पति भी पिता बनकर बेहद खुश है।


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