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रेतीली जमीन में तलाश दो बूंद पानी की
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
Updated Sun, 03 Apr 2016 11:54 PM IST
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बांदा के दुरेंडी गांव की रेत में गड्ढा खोदकर पानी भरती महिला।
- फोटो : अमर उजाला
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बांदा। गर्मी शुरू होते ही सूखे-भूखे बुंदेलखंड में पानी का संकट भी गहरा गया है। भू जलस्तर गिरने से कुएं सूख चुके हैं। हैंडपंप और नलकूप साथ छोड़ रहे हैं। नदी की धारा सूखने से लोग रेत में गड्ढे खोदकर उससे निकलने वाले पानी से प्यास बुझा रहे हैं। बांदा के दस्यु प्रभावित अतर्रा और नरैनी इलाके में पानी की किल्लत कुछ ज्यादा ही है। यहां के प्राचीन कुएं भी सूख गए हैं। हालात ये हैं कि भूजल स्तर गिरने से लगभग सभी हैंडपंप ठूंठ बन गए हैं।
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कुछ में नाममात्र का पानी निकल रहा है। गांवों के लोग केन और कड़ैली नदी से पानी लाकर प्यास बुझा रहे हैं। गढ़ा गांव की हीराबाई कहती है कि- ‘हम नदी का पानी पी लेब, मगर या नल चलाउब हमरे बस का निहाए’। दरअसल हैंडपंप से दो बाल्टी पानी लेने के लिए देर तक हैंडिल चलाना पड़ता है। यही स्थिति पूरे जिले की है।
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