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Banda News: केन- बेतवा लिंक के विरोध में तिरंगा लेकर निकले आदिवासी
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फोटो-31 बीएनडीपी-़19
- फोटो : BANDA
बांदा। केन- बेतवा लिंक परियोजना के विरोध में 26 जनवरी से शुरू हुई तिरंगा यात्रा का मंगलवार को 15 गांवों में भ्रमण के बाद समापन हो गया। समापन पर महापंचायत और केन नदी में सांकेतिक जल सत्याग्रह भी किया गया।
केन-बेतवा लिंक का विरोध डूबक्षेत्र में आने वाले गांवों में शुरू से ही चल रहा है। प्रदेश, मध्य प्रदेश और केंद्र सरकार से परियोजना की औपचारिकताएं पूरी होने के बाद विरोध तेज हो गया है। क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर के नेतृत्व में गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) से आदिवासी ग्रामीणों ने ढोड़न गांव से छह दिवसीय तिरंगा पद यात्रा शुरू की है।
यात्रा संयोजक जमुना ओमरे ने बताया कि यात्रा पलकौहा, पन्ना टाइगर रिजर्व बफर जोन में खरयानी, मैनारी, बृजपुरा, नरौली, पाठापुर, डुगरिया, कदवारा, कुपी, शाहपुरा, बसुधा, घुघरी, भौरखुआ गांवों से होकर 31 जनवरी को सुकवाहा पहुंची। यात्रा के सह संयोजक ब्रजेन्द्र मिश्रा व पलकौहा सरपंच जगन्नाथ यादव मौजूद रहे।
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इनसेट -
प्रभावितों को जानकारी तक नहीं दी जा रही
अमित भटनागर ने बताया कि जिला प्रशासन प्रभावितों की उचित मांगे नजरअंदाज कर रहा है। परियोजना में प्रभावित गांवों का अधिग्रहण जिस कानून के तहत किया जाना है, उसका नाम भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता अधिकार अधिनियम - 2013 है। ये कानून प्रभावितों की सहभागिता व उन्हें उचित मुआवजा और पूरी पारदर्शिता की बात करता है, लेकिन सरकार और प्रशासन प्रभावितों के साथ निर्णय और उनकी राय लेने की बात तो दूर उनको जानकारी तक नहीं दे रहा है। यहां आदिवासियों के वनाधिकार कानून भी बेमानी है।
इनसेट
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तिरंगा यात्रा में ये रहे शामिल -
खरयानी सरपंच रतीराम अहिरवार, पल्कोहा सरपंच सावित्री जनन्नाथ यादव, पूर्व सरपंच जमुना ओमरे, बिजावर की पार्षद दिव्या अहिरवार, पूर्व सरपंच बहादुर आदिवासी, हिसाबी राजपूत, पूरन राजपूत, हनुमत राजगोड़, वृंदावन पाल, मोहन पाल, शंकर सिंह परमार, दशरथ रैकवार, मानक रैकवार, उमेद पटेल, तुलसी आदिवासी, नत्थू रैकवार, गोलू राजा परमार, अखिलेश यादव, जगदीश पुजारी, अरविंद आदिवासी, तिलोक आदिवासी, लक्ष्मी प्रसाद यादव, राजकुमार सिंह, सचिन चौबे, सुखी रैकवार, संतोष अनुरागी, चंगे यादव, पुष्पेंद्र दुबे आदि।
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केन-बेतवा लिंक का विरोध डूबक्षेत्र में आने वाले गांवों में शुरू से ही चल रहा है। प्रदेश, मध्य प्रदेश और केंद्र सरकार से परियोजना की औपचारिकताएं पूरी होने के बाद विरोध तेज हो गया है। क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर के नेतृत्व में गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) से आदिवासी ग्रामीणों ने ढोड़न गांव से छह दिवसीय तिरंगा पद यात्रा शुरू की है।
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यात्रा संयोजक जमुना ओमरे ने बताया कि यात्रा पलकौहा, पन्ना टाइगर रिजर्व बफर जोन में खरयानी, मैनारी, बृजपुरा, नरौली, पाठापुर, डुगरिया, कदवारा, कुपी, शाहपुरा, बसुधा, घुघरी, भौरखुआ गांवों से होकर 31 जनवरी को सुकवाहा पहुंची। यात्रा के सह संयोजक ब्रजेन्द्र मिश्रा व पलकौहा सरपंच जगन्नाथ यादव मौजूद रहे।
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प्रभावितों को जानकारी तक नहीं दी जा रही
अमित भटनागर ने बताया कि जिला प्रशासन प्रभावितों की उचित मांगे नजरअंदाज कर रहा है। परियोजना में प्रभावित गांवों का अधिग्रहण जिस कानून के तहत किया जाना है, उसका नाम भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता अधिकार अधिनियम - 2013 है। ये कानून प्रभावितों की सहभागिता व उन्हें उचित मुआवजा और पूरी पारदर्शिता की बात करता है, लेकिन सरकार और प्रशासन प्रभावितों के साथ निर्णय और उनकी राय लेने की बात तो दूर उनको जानकारी तक नहीं दे रहा है। यहां आदिवासियों के वनाधिकार कानून भी बेमानी है।
इनसेट
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तिरंगा यात्रा में ये रहे शामिल -
खरयानी सरपंच रतीराम अहिरवार, पल्कोहा सरपंच सावित्री जनन्नाथ यादव, पूर्व सरपंच जमुना ओमरे, बिजावर की पार्षद दिव्या अहिरवार, पूर्व सरपंच बहादुर आदिवासी, हिसाबी राजपूत, पूरन राजपूत, हनुमत राजगोड़, वृंदावन पाल, मोहन पाल, शंकर सिंह परमार, दशरथ रैकवार, मानक रैकवार, उमेद पटेल, तुलसी आदिवासी, नत्थू रैकवार, गोलू राजा परमार, अखिलेश यादव, जगदीश पुजारी, अरविंद आदिवासी, तिलोक आदिवासी, लक्ष्मी प्रसाद यादव, राजकुमार सिंह, सचिन चौबे, सुखी रैकवार, संतोष अनुरागी, चंगे यादव, पुष्पेंद्र दुबे आदि।