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Banda News: एनबीएसयू से आसान हो गया मासूमों का इलाज
Tue, 30 Apr 2024 11:39 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Tue, 30 Apr 2024 11:39 PM IST
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जसपुरा। कस्बा जसपुरा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, जसपुरा में न्यूबोर्न स्टेबलाइजेशन यूनिट (एनबीएसयू) स्थापित की गई है। इसमें जन्म के तुरंत बाद बच्चों को होने वाली बीमारियों का इलाज शुरू भी हो गया।
सीएचसी के डॉक्टर दीपक यादव ने बताया कि अब परिजनों को नवजात को कहीं लेकर जाने की जरूरत नहीं है। क्योंकि आधुनिक मशीनों के माध्यम से ही अब सीएचसी में ही इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है। दो माह में करीब 20 से 30 बच्चों का इलाज किया जा चुका है। बताया कि इस यूनिट में प्री-मैच्योर बेबी, कम वजन के शिशु, सांस की समस्या वाले शिशु, पीलिया व डायरिया ग्रस्त शिशुओं का इलाज किया जाता है।
उन्होंने बताया कि इलाज के लिए रेडियंट, वार्मर, फोटो थैरेपी यूनिट, वेंटिलेटर समेत आदि आधुनिक मशीनें उपलब्ध हैं और प्रशिक्षित स्टॉफ नर्स भी मौजूद हैं। वार्मर मशीन का उपयोग नवजात को गर्महाट देने के लिए किया जाता है। इस यूनिट में नेबलाइजर मशीन भी है। डॉक्टर ने बताया कि महिलाओं के प्रसव के लिए भी नया वार्ड बनाया गया है। जहां पहली बार ऑपरेशन की भी सुविधा शुरू की गई है।
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मशीन न होने से ठप पड़ी थायराइड की जांच
बांदा। चित्रकूटधाम मंडल मुख्यालय के जिला अस्पताल में थायराइड की जांच नहीं हो पा रही है। इसकी वजह सिर्फ इतनी है कि एनालाइजर मशीन उपलब्ध नहीं है। जिला अस्पताल आने वाले तमाम मरीजों को थायरायड की जांच कराने के नाम पर प्राइवेट सेंटरो में जाना पड़ता है, वहां उनसे जांच के नाम पर मनमाना वसूला जाता है। सीएमएस का कहना है कि उच्चाधिकारियों से पत्राचार कर जल्द ही मशीन मंगवाई जाएगी। (संवाद)
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सीएचसी के डॉक्टर दीपक यादव ने बताया कि अब परिजनों को नवजात को कहीं लेकर जाने की जरूरत नहीं है। क्योंकि आधुनिक मशीनों के माध्यम से ही अब सीएचसी में ही इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है। दो माह में करीब 20 से 30 बच्चों का इलाज किया जा चुका है। बताया कि इस यूनिट में प्री-मैच्योर बेबी, कम वजन के शिशु, सांस की समस्या वाले शिशु, पीलिया व डायरिया ग्रस्त शिशुओं का इलाज किया जाता है।
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उन्होंने बताया कि इलाज के लिए रेडियंट, वार्मर, फोटो थैरेपी यूनिट, वेंटिलेटर समेत आदि आधुनिक मशीनें उपलब्ध हैं और प्रशिक्षित स्टॉफ नर्स भी मौजूद हैं। वार्मर मशीन का उपयोग नवजात को गर्महाट देने के लिए किया जाता है। इस यूनिट में नेबलाइजर मशीन भी है। डॉक्टर ने बताया कि महिलाओं के प्रसव के लिए भी नया वार्ड बनाया गया है। जहां पहली बार ऑपरेशन की भी सुविधा शुरू की गई है।
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मशीन न होने से ठप पड़ी थायराइड की जांच
बांदा। चित्रकूटधाम मंडल मुख्यालय के जिला अस्पताल में थायराइड की जांच नहीं हो पा रही है। इसकी वजह सिर्फ इतनी है कि एनालाइजर मशीन उपलब्ध नहीं है। जिला अस्पताल आने वाले तमाम मरीजों को थायरायड की जांच कराने के नाम पर प्राइवेट सेंटरो में जाना पड़ता है, वहां उनसे जांच के नाम पर मनमाना वसूला जाता है। सीएमएस का कहना है कि उच्चाधिकारियों से पत्राचार कर जल्द ही मशीन मंगवाई जाएगी। (संवाद)