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ट्रॉमा सेंटर : डॉक्टर न सुविधाएं, मरीज को कहीं और ले जाएं
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बांदा। करीब ढाई करोड़ की लागत से बने जिला अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में न तो डॉक्टर हैं और न ही सुविधाएं। ट्रॉमा सेंटर जबसे बना है, तब से यहां न तो सर्जन की तैनाती हुई है और न बेहोशी का डॉक्टर नियुक्त किया गया। सिर्फ एक ईएमओ के सहारे ही अस्पताल चल रहा है। ऐसे में ट्रॉमा सेंटर सिर्फ जिला अस्पताल का इमरजेंसी कक्ष बनकर रह गया है।
जिला अस्पताल परिसर में गंभीर रूप से घायलों और झुलसे मरीजों को बेहतर इलाज के लिए वर्ष 2015 में 2.38 करोड़ रुपये की लागत से 22 बेड का ट्राॅमा सेंटर बनवाया गया था। आधे-अधूरे स्टाफ की तैनाती कर ट्रॉमा सेंटर शुरू करा दिया। अभी तक यहां ओटी टेक्नीशियन की तैनाती नहीं हो पाई है।
यहां पैथोलॉजी और एक्सरे की भी सुविधा नहीं है। इससे मरीजों को जिला अस्पताल की पैथोलॉजी व एक्सरे में जांच के लिए भेजा जाता है। रोजाना करीब 30 से 40 गंभीर मरीज ट्रॉमा सेंटर आते हैं और उन्हें रेफर कर दिया जाता है।
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चाहिए ये स्टाफ और संसाधन
कम से कम दो सर्जन, एक न्यूरो सर्जन, अस्थि रोग विशेषज्ञ, एनेथिसिया (बेहोशी) के डॉक्टर, पैथोलॉजी लैब, एक्सरे, ईसीजी टेक्निशियन, एलटी की आवश्यकता है। इसके बाद ही ट्रॉमा सेंटर पूर्ण रूप से संचालित किया जा सकता है।
तीन स्थायी व तीन संविदा ईएमओ चला रहे सेंटर
बांदा। तीन स्थायी और तीन संविदा ईएमओ के सहारे ट्राॅमा सेंटर का संचालन किया जा रहा है। स्थायी ईएमओ में डॉ. विनीत सचान, डॉ. प्रदीप गुप्ता व डॉ. एसके मौर्या के अलावा इसके अलावा तीन संविदा ईएमओ डॉ. आकाश, डॉ. अभिषेक प्राणायामी डॉ. अभिनव की ड्यूटी लगती है।
बैटरियों की
प्रदेश सरकार ने हाल ही में मेडिकल सुविधाओं के लिए करोड़ों का बजट जारी किया है, लेकिन जिला अस्पताल में लगी सीटी स्कैन मशीन के यूपीएस की खराब बैटरियां 15 दिन बाद भी नहीं बदली जा सकी हैं। इस कारण सुविधा शुरू नहीं हो पा रही है। सीटी स्कैन की सुविधा न होने से एक रुपये का पर्चा बनवाकर मरीजों को ढाई हजार रुपये देकर निजी पैथोलॉजी सेंटरों से सीटी स्कैन कराना पड़ रहा है। गुरुवार को अस्पताल पहुंचे इंजीनियरों ने मशीन के लिए डेढ़ लाख के जरूरी कल पुर्जों का खर्च और बता दिया है।
वर्जन,,,
ट्राॅमा सेंटर में स्टाफ की तैनाती के लिए शासन से लगातार पत्राचार चल रहा है। शासन की ओर से डॉक्टरों व पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती होने पर ट्रामा सेंटर की तरह संचालित किया जाएगा। रही बात सीटी स्कैन की तो दो चार दिनों में धनराशि अवमुक्त होने की संभावना है। इसके बाद सीसी स्कैन की सुविधा मिलने लगेगी। -डॉ. आरके गुप्ता, प्रभारी सीएमएस, जिला अस्पताल पुरुष, बांदा।
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जिला अस्पताल परिसर में गंभीर रूप से घायलों और झुलसे मरीजों को बेहतर इलाज के लिए वर्ष 2015 में 2.38 करोड़ रुपये की लागत से 22 बेड का ट्राॅमा सेंटर बनवाया गया था। आधे-अधूरे स्टाफ की तैनाती कर ट्रॉमा सेंटर शुरू करा दिया। अभी तक यहां ओटी टेक्नीशियन की तैनाती नहीं हो पाई है।
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यहां पैथोलॉजी और एक्सरे की भी सुविधा नहीं है। इससे मरीजों को जिला अस्पताल की पैथोलॉजी व एक्सरे में जांच के लिए भेजा जाता है। रोजाना करीब 30 से 40 गंभीर मरीज ट्रॉमा सेंटर आते हैं और उन्हें रेफर कर दिया जाता है।
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चाहिए ये स्टाफ और संसाधन
कम से कम दो सर्जन, एक न्यूरो सर्जन, अस्थि रोग विशेषज्ञ, एनेथिसिया (बेहोशी) के डॉक्टर, पैथोलॉजी लैब, एक्सरे, ईसीजी टेक्निशियन, एलटी की आवश्यकता है। इसके बाद ही ट्रॉमा सेंटर पूर्ण रूप से संचालित किया जा सकता है।
तीन स्थायी व तीन संविदा ईएमओ चला रहे सेंटर
बांदा। तीन स्थायी और तीन संविदा ईएमओ के सहारे ट्राॅमा सेंटर का संचालन किया जा रहा है। स्थायी ईएमओ में डॉ. विनीत सचान, डॉ. प्रदीप गुप्ता व डॉ. एसके मौर्या के अलावा इसके अलावा तीन संविदा ईएमओ डॉ. आकाश, डॉ. अभिषेक प्राणायामी डॉ. अभिनव की ड्यूटी लगती है।
बैटरियों की
प्रदेश सरकार ने हाल ही में मेडिकल सुविधाओं के लिए करोड़ों का बजट जारी किया है, लेकिन जिला अस्पताल में लगी सीटी स्कैन मशीन के यूपीएस की खराब बैटरियां 15 दिन बाद भी नहीं बदली जा सकी हैं। इस कारण सुविधा शुरू नहीं हो पा रही है। सीटी स्कैन की सुविधा न होने से एक रुपये का पर्चा बनवाकर मरीजों को ढाई हजार रुपये देकर निजी पैथोलॉजी सेंटरों से सीटी स्कैन कराना पड़ रहा है। गुरुवार को अस्पताल पहुंचे इंजीनियरों ने मशीन के लिए डेढ़ लाख के जरूरी कल पुर्जों का खर्च और बता दिया है।
वर्जन,,,
ट्राॅमा सेंटर में स्टाफ की तैनाती के लिए शासन से लगातार पत्राचार चल रहा है। शासन की ओर से डॉक्टरों व पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती होने पर ट्रामा सेंटर की तरह संचालित किया जाएगा। रही बात सीटी स्कैन की तो दो चार दिनों में धनराशि अवमुक्त होने की संभावना है। इसके बाद सीसी स्कैन की सुविधा मिलने लगेगी। -डॉ. आरके गुप्ता, प्रभारी सीएमएस, जिला अस्पताल पुरुष, बांदा।