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केन में तीन जगह जलधारा रोकी
Sat, 01 Jun 2019 11:34 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो, बांदा
अमर उजाला ब्यूरो, बांदा
Published by: ASIF ASIF
Updated Sat, 01 Jun 2019 11:34 PM IST
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नरैनी के करतल क्षेत्र में बालू माफियाओं द्वारा केन नदी की जलधारा में खड़ी की गई रेत की दीवार।
- फोटो : अमर उजाला
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राष्ट्रीय नदी केन की जलधारा तीन स्थानों पर बांध दी गई है। मध्य प्रदेश की सरहद पर बालू माफियाओं द्वारा किए गए इस अपराध का खामियाजा सरहद पर बसे एमपी और बांदा (यूपी) के कई गांवों को पेयजल संकट के रूप में भुगतना पड़ रहा है। धारा का प्रवाह रोक दिए जाने से आगे आबाद गांवों में जल स्तर नीचे खिसक गया है।
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केन नदी सहित अन्य कई नदियों की जलधारा रोककर रेत की दीवार खड़ी कर देने और आरपार ट्रकों का रास्ता बना लेने की घटनाएं पहले भी होती रही हैं। ग्रामीणों के विरोध और मीडिया की सुर्खियां बनने के बाद कई बार ऐसे रास्ते और अवरोध तोड़े भी गए हैं। हाल ही में प्रदेश की खनिज निदेशक रोशन जैकब यहां कई खदानों का निरीक्षण कर चुकी हैं। डीएम हीरा लाल और एसपी गणेश साहा ने रातों को छापे मारे हैं।
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इसके बाद भी नदी की जलधारा बांधने का दुस्साहस नहीं थमा। इन दिनों नरैनी क्षेत्र में एमपी की सरहद पर बिल्हरका, हथौवा, नेहरा आदि गांवों के पास केन नदी की धारा रोक दी है। बालू की लंबी दीवार खड़ी कर दी है। नतीजे में बांदा जनपद के करतल, नहरी, पुंगरी, बिल्हरका, रानीपुर, भांवरपुर, बिदुवा पुरवा, महाराजपुर, रगौली, बोड़ा पुरवा और अकेलवा गांवों में नदी का पानी न पहुंचने से जल स्तर 150 फिट तक नीचे चला गया है। कुएं और हैंडपंप जवाब दे रहे हैं। जलधारा बांधकर पानी के बीच से मशीनों के जरिए रातदिन बालू निकाली जा रही है। बालू के साथ भी लाखों लीटर पानी जा रहा है।
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बालू के बेखौफ कारोबारियों ने बिल्हरका में नहर माइनर का पुल तोड़कर रास्ता बना लिया है। नहर का पानी भांवरपुर से बाबूपुर टेल तक नहीं पहुंच पा रहा। कनाय, बाबूपुर, सलामतपुर, महारानी आदि गांवों के तालाब नहर से नहीं भरे जा सके। उधर, इस बारे में नरैनी तहसीलदार रामकुंवर ने कहा कि राजस्व टीम भेजकर जांच कराई जाएगी और जलधारा बांधने वालों पर कार्रवाई करने के साथ ही जलधारा बहाल कराई जाएगी।
अवैध खनन से राजस्व को लग रहा चूना
बांदा। एनजीटी और हाईकोर्ट के तमाम आदेशों को दरकिनार कर रातदिन बांदा जनपद में हो रहे अवैध खनन और ओवरलोडिंग ने बांदा जनपद के रॉयल्टी राजस्व लक्ष्य पर भी ब्रेक लगाया। यह बात अलग है कि लक्ष्य डेढ़ गुना हो जाने पर खनिज अधिकारी शैलेंद्र सिंह को प्रदेश की खनिज निदेशक ने प्रशस्ति पत्र दिया है। जबकि पड़ोसी जनपद फतेहपुर में लक्ष्य की 169.37 फीसदी प्राप्ति हुई है। वहां के खनिज अधिकारी सौरभ गुप्ता को भी प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया है। जानकारों का कहना है कि सरकार को रॉयल्टी के रूप में जितना राजस्व मिल रहा है उससे लगभग 10 गुना चोरी हो रहा है। खदान पट्टाधारक अपने पट्टा क्षेत्र से बाहर भारी पैमाने पर खनन कर रहे हैं। खदानों में जांच और छापों की यदाकदा होने वाली कार्रवाई इन्हें रोक नहीं पा रही।
सत्ता और अफसरों से जुड़े हैं ठेकेदारों के तार
बांदा। अवैध खनन और ओवरलोडिंग न रुक पाने के पीछे मुख्य वजह खदानों की कमान संभाले ठेकेदारों के तार सत्तारूढ़ दल और खनिज विभाग के अधिकारियों से जुड़ा होना माना जा रहा है। हालांकि हाल ही में बांदा भाजपा जिलाध्यक्ष लवलेश सिंह ने न सिर्फ खुद शहर के नजदीक सोना खदान में छापे की तर्ज पर पहुंचकर कार्रवाई कराई बल्कि मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर भी अवैध खनन की शिकायत की है।
ओटीपी बंद, खनन रातदिन जारी
बांदा। यह भी कम हैरत की बात नहीं है कि बांदा जनपद में इन दिनों एक दर्जन खदानों की ओटीपी (वन टाइम पासवर्ड) बंद होने के बावजूद भारी पैमाने पर खनन जारी है। दुरेड़ी, चंदौर, महुटा, दुरेड़ी-4, अमलोर, जरर, बिल्हरका, गंछा, सांड़ी, पड़ोहरा, अमलोर आदि खदानों की ओटीपी बंद है। उधर, सादी मदनपुर सहित कई खदान के ठेकेदारों ने बड़ी संख्या में मशीनें लगाकर रातदिन खनन करके चंद दिनों में ही बालू सफाचट कर दी। बालू खत्म हो जाने पर यह पट्टाधारक खदान सरेंडर करने की जुगत भिड़ा रहे हैं। इसके लिए अर्जी भी दे रखी है। ताकि उन्हें अगली किस्तें न देना पड़े। ऐसी कई खदानें हैं। लेकिन खनिज अधिकारी यह जानकारी नहीं दे रहे।
न सीबीआई का डर, न निलंबन का खौफ
बांदा। बालू कारोबारियों और माफियाओं तथा उनसे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष जुड़े लोगों में दुस्साह की यह बानगी है कि वह सीबीआई से भी नहीं डर रहे। हाई कोर्ट के आदेश पर प्रदेश के कई जनपदों में खदानों की सीबीआई जांच चल रही है। इनमें बांदा भी शामिल है। 21 अगस्त 2016 को सीबीआई ने बांदा आकर खनिज कार्यालय से कई रिकार्ड अपने कब्जे में ले लिए थे। पड़ोसी जनपद हमीरपुर में सीबीआई कई चरणों में जांच कर चुकी है। वहां की जांच में बांदा की पैलानी व सिंधनकलां खदानें भी शामिल हैं। पूर्व में यहां के खनिज अधिकारी हवलदार सिंह निलंबित भी हो चुके हैं। लेकिन मौजूदा अधिकारियों को इसका कोई खौफ नहीं है।
या है। यह 152.85 प्रतिशत है। ब्यूरो