Banda: मासूम करन के हत्यारों को मिली उम्रकैद, दो भाइयों समेत तीन को उम्रकैद, 18-18 हजार रुपये का अर्थदंड भी
Banda News: बांदा की विशेष अदालत ने छह वर्षीय मासूम की हत्या और शव कुएं में फेंकने के जुर्म में दो सगे भाइयों सहित तीन को उम्रकैद की सजा सुनाई है। कोर्ट ने दोषियों पर जुर्माना लगाते हुए उसकी आधी राशि पीड़ित मां को देने का निर्देश दिया है।
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बांदा जिले में छह वर्षीय मासूम बच्चे का अपहरण कर उसकी गला दबाकर हत्या करने और साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से शव को कुएं में फेंकने पर अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश ईसी एक्ट श्रीपाल सिंह की अदालत ने शुक्रवार को दो सगे भाइयों सहित तीन को आजीवन सश्रम कारावास सुनाया है। इसके अतिरिक्त तीनों दोषियों पर अन्य धाराओं के तहत सजा के साथ 18-18 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। अर्थदंड की अदायगी न करने की स्थिति में उन्हें तीन-तीन माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
अर्थदंड की आधी धनराशि मृतक बच्चे की मां को पुत्र के वियोग में हुई मानसिक क्षतिपूर्ति के रूप में अदा की जाएगी। घटना के समय से ही दो सगे भाई जेल में निरुद्ध थे। तीनों का वारंट बनाकर उन्हें जेल भेज दिया गया है। घटना 12 नवंबर 2020 को कोतवाली नगर निवासी ममता रैकवार ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसके मुताबिक ममता मजदूरी करके अपने बच्चों का पालन-पोषण करती थी। उसने बताया कि उनका छह वर्षीय बेटा करन उर्फ बाबू 11 नवंबर 2020 को शाम छह बजे पप्पू माली पुत्र अशोक माली निवासी निम्नीपार के साथ गया था।
कुएं से बरामद हुआ करन का शव
इसके बाद से उसका पता नहीं चला। पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 364 के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी। विवेचक नंदराम प्रजापति ने पूछताछ के दौरान पप्पू माली को गिरफ्तार किया, जिससे सोनू माली पुत्र अशोक और बाला प्रसाद पुत्र रामकिशोर कुशवाहा निवासी मर्दन नाका के नाम प्रकाश में आए। इनकी निशानदेही पर 13 नवंबर 2020 को राकेश सोनी के बगीचे में स्थित कुएं से करन का शव बरामद हुआ। हत्या का कारण नशे का विवाद बताया गया।
कोर्ट ने सजा और जुर्माने से दंडित किया
मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 302/34 व 201 के तहत वृद्धि करते हुए विवेचना प्रारंभ की गई। तीनों आरोपियों के विरुद्ध न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किया गया। सुनवाई के दौरान आठ अक्तूबर 2021 को तीनों के विरुद्ध आरोप तय किए गए। अभियोजन पक्ष की ओर से सात गवाह पेश किए गए। न्यायालय में उपलब्ध गवाहों के बयान और साक्ष्यों के आधार पर न्यायाधीश ने अपने 36 पृष्ठों के फैसले में सोनू माली, पप्पू माली (दोनों पुत्र अशोक माली) और बालाप्रसाद कुशवाहा को दोषी पाते हुए सजा और जुर्माने से दंडित किया।