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Banda News: इस साल पांच सालों से अधिक, पर सामान्य से 87 मिमी. कम हुई बारिश्
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बांदा। जिले में बारिश ने पांच साल का रिकाॅर्ड तो तोड़ दिया, फिर भी इस सीजन में सामान्य से 87 मिलीमीटर कम बारिश हुई है। इसकी वजह बुंदेलखंड में देरी से मानसून का आना बताया जा रहा है।
शुरुआत के तीन महिनों में सामान्य से कम बारिश हुई है, जबकि अंतिम माह में सामान्य से अधिक बारिश हुई है। जून-जुलाई में कम बारिश होने से खरीफ की फसल प्रभावित हुई। सितंबर में सामान्य से अधिक बारिश होने से बाढ़ का सामना करना पड़ा। हालांकि इससे रबी की फसल बेहतर होने की उम्मीद जताई जा रही है।
मौसम विभाग के अनुसार, इस मानसून सीजन में बारिश ने पांच साल का रिकाॅर्ड तोड़ दिया है। यानी अधिक बारिश हुई है। सीजन में सामान्य तौर पर 946 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन हुई है 859 मिलीमीटर।
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यह सामान्य से 87 एमएम कम है। हालांकि बीते पांच सालों में इससे भी कम बारिश हुई है। साल 2020 में 775.9 मिमी, 2021 में 740.6 मिमी, 2022 में 503.4 मिमी, 2023 में 576.6 मिमी बारिश हुई थी। बीते पांच सालों से किसान कम बारिश की मार को झेल रहा है। इस वर्ष भी मानसून ने 20 दिन की देरी से जुलाई में दस्तक दी थी।
पहले बारिश नहीं होने से किसान खरीफ की बुआई नहीं कर पाए। बारिश शुरू हुई तो किसानों ने बुआई की और फसल भी बेहतर थी, लेकिन अगस्त और सितंबर में केन और यमुना नदी में बाढ़ आने से करीब 50 फीसदी फसलें प्रभावित हो गईं। सितंबर माह के अंत में हुई झमाझम बारिश से फसलों पर अधिक प्रभाव पड़ा है।
हालांकि कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि सितंबर की बारिश से रबी की फसलों के बेहतर होने की उम्मीद है।
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शुरुआत के तीन महिनों में सामान्य से कम बारिश हुई है, जबकि अंतिम माह में सामान्य से अधिक बारिश हुई है। जून-जुलाई में कम बारिश होने से खरीफ की फसल प्रभावित हुई। सितंबर में सामान्य से अधिक बारिश होने से बाढ़ का सामना करना पड़ा। हालांकि इससे रबी की फसल बेहतर होने की उम्मीद जताई जा रही है।
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मौसम विभाग के अनुसार, इस मानसून सीजन में बारिश ने पांच साल का रिकाॅर्ड तोड़ दिया है। यानी अधिक बारिश हुई है। सीजन में सामान्य तौर पर 946 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन हुई है 859 मिलीमीटर।
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यह सामान्य से 87 एमएम कम है। हालांकि बीते पांच सालों में इससे भी कम बारिश हुई है। साल 2020 में 775.9 मिमी, 2021 में 740.6 मिमी, 2022 में 503.4 मिमी, 2023 में 576.6 मिमी बारिश हुई थी। बीते पांच सालों से किसान कम बारिश की मार को झेल रहा है। इस वर्ष भी मानसून ने 20 दिन की देरी से जुलाई में दस्तक दी थी।
पहले बारिश नहीं होने से किसान खरीफ की बुआई नहीं कर पाए। बारिश शुरू हुई तो किसानों ने बुआई की और फसल भी बेहतर थी, लेकिन अगस्त और सितंबर में केन और यमुना नदी में बाढ़ आने से करीब 50 फीसदी फसलें प्रभावित हो गईं। सितंबर माह के अंत में हुई झमाझम बारिश से फसलों पर अधिक प्रभाव पड़ा है।
हालांकि कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि सितंबर की बारिश से रबी की फसलों के बेहतर होने की उम्मीद है।