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Banda News: सीएचसी में नहीं अल्ट्रासाउंड की सुविधा, जिला अस्पताल में लगती लाइन

Wed, 18 Feb 2026 12:35 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा Updated Wed, 18 Feb 2026 12:35 AM IST
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There is no ultrasound facility in CHC, queues are seen in the district hospital.
फोटो- 11 अल्ट्रासाउंड का पर्चा जमा करने के लिए बैठे कर्मचारी। संवाद
बांदा। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में अल्ट्रासाउंड की सुविधा न होने से मरीजों को जिला अस्पताल आना पड़ता है। जिले में सिर्फ एक ही रेडियोलॉजिस्ट (सीएमएस) होने की वजह से प्रतिदिन अल्ट्रासाउंड कराने वालों की लाइन लगी रहती है। एक दिन में तकरीबन 70 लोगों के अल्ट्रासाउंड होते हैं। वो भी समय से पहुंचने पर, नहीं तो पर्चा जमा होने के बाद उन्हें इंतजार करना पड़ता है। उधर, गर्भवतियों की जांच के लिए जिला महिला अस्पताल में गर्भवतियों की जांच के लिए वैकल्पिक व्यवस्था शुरू की गई है। महिला डॉक्टर को प्रशिक्षित कर उनसे ही अल्ट्रासाउंड कराया जा रहा है।
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जिले में बबेरू, कमासिन, अतर्रा, जसपुरा, नरैनी समेत आठ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। इनमें एक भी रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति न होने से ग्रामीण मरीजों को जिला अस्पताल ही सहारा रहता है। जिला अस्पताल में वर्तमान सीएमएस डॉ. के कुमार की नियुक्ति होने से वह ही अपने प्रशासनिक कार्यों के बीच मरीजों का अल्ट्रासाउंड करते हैं। जिले की सीएचसी में यह सुविधा न होने से ग्रामीण क्षेत्रों के रहने वाले मरीज अक्सर बाहर से अल्ट्रासाउंड कराने के लिए मजबूर रहते हैं। एक अल्ट्रासाउंड का न्यूनतम 700 रुपये से लेकर 900 रुपये तक बाहर खर्च करना पड़ता है। जबकि यही जांच जिला अस्पताल में एक रुपये के पर्चे में होती है। जिले की सीएचसी में यह सुविधा न होने से लोगों को बांदा जिला अस्पताल आना पड़ता है।
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महिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड के लिए डॉक्टर को किया गया प्रशिक्षित
बांदा। महिला अस्पताल में गर्भवतियों की जांच के लिए रेडियोलॉजिस्ट न होने पर यहां की सीएमएस डॉ. सुनीता सिंह ने महिला अस्पताल की डॉक्टर को प्रशिक्षित कराया है। प्रारंभिक जांच के लिए वह ही गर्भवतियों की जांच करती हैं। इसमें अलावा गर्भवतियों प्राइवेट अल्ट्रासाउंड की सुविधा देने के लिए पर्ची सिस्टम शुरू किया गया है। उनकी चार जांचों की पर्ची बनाई जाती है। इसका पैसा शासन की ओर से भुगतान किया जाता है।
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वर्जन
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सिर्फ एक रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती है। जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की सुविधा दी जा रही है। सीएचसी में रेडियोलॉजिस्ट न होने से अल्ट्रासाउंड की सुविधा नहीं है। गर्भवतियों की अल्ट्रासाउंड जांच के लिए पर्ची सिस्टम शुरू किया गया है। महीने में चार जांच के उन्हें कूपन दिए जाते हैं। शासन से रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती की मांग की गई है।
डॉ. विजेंद्र सिंह
सीएमओ, बांदा।
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