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बांदाः खरीफ की मुरझाई फसल को मिली संजीवनी
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बारिश के बीच लाइट जलाकर गुजरते वाहन।
- फोटो : BANDA
बांदा। एक माह की खामोशी के बाद आखिरकार मौसम ने करवट बदली। दो दिन में कभी तेज तो रिमझिम बारिश हुई। इससे जहां उमस व गर्मी काफूर हो गई वहीं किसानों ने राहत की सांस ली। खरीफ की फसलों को इस पानी ने संजीवनी का काम किया है। तपिश से मुरझा रहीं धान, मूंग, उड़द, तिल की फसलों को नई जान मिल गई है। मौसम विभाग के अनुसार दो दिन में 60 मिली मीटर बारिश रिकार्ड की गई।
कृषि विभाग के आंकड़ों की मानें तो जनपद में औसत बारिश 850 मिली मीटर होनी चाहिए। लेकिन अब तक महज 312 मिली मीटर हुई। किसानों ने अगस्त माह में अच्छी बारिश हो जाने से खेतों में खरीफ की बुआई व धान की बेड़े रोपित कर दीं। लेकिन मौसम अचानक शुष्क हो गया।
एक माह तक खामोश रहने से फसलें मुरझाने लगीं तो किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंचने लगी। लेकिन दो दिन से मौसम ने खामोशी तोड़ी और मंगलवार की शाम झमाझम बारिश हुई। गर्मी व उमस से परेशान लोगों ने राहत महसूस की। खेतों में पानी भर जाने से किसानों के चेहरे खिलखिला उठे। किसान रामभरोसे का कहना है कि बारिश से कुम्हला रही फसलों को नई जान मिली है। अब 15 दिन पानी न भी बरसे तो फसलों को कोई नुकसान नहीं है।
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सियाराम का कहना है कि पानी से मरी फसल जिंदा हो गई। उप निदेशक कृषि विजय कुमार का कहना है कि फसलों को पानी की सख्त आवश्यकता थी। पानी न बरसता तो 25 फीसदी फसलें सूख जाती। मौसम वैज्ञानिक दिनेश शाहा का कहना है कि अभी दो दिनों तक रुक-रुककर बारिश होती रहेगी। सोमवार को 20 व मंगलवार को 40 मिली मीटर बारिश रिकार्ड की गई।
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कृषि विभाग के आंकड़ों की मानें तो जनपद में औसत बारिश 850 मिली मीटर होनी चाहिए। लेकिन अब तक महज 312 मिली मीटर हुई। किसानों ने अगस्त माह में अच्छी बारिश हो जाने से खेतों में खरीफ की बुआई व धान की बेड़े रोपित कर दीं। लेकिन मौसम अचानक शुष्क हो गया।
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एक माह तक खामोश रहने से फसलें मुरझाने लगीं तो किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंचने लगी। लेकिन दो दिन से मौसम ने खामोशी तोड़ी और मंगलवार की शाम झमाझम बारिश हुई। गर्मी व उमस से परेशान लोगों ने राहत महसूस की। खेतों में पानी भर जाने से किसानों के चेहरे खिलखिला उठे। किसान रामभरोसे का कहना है कि बारिश से कुम्हला रही फसलों को नई जान मिली है। अब 15 दिन पानी न भी बरसे तो फसलों को कोई नुकसान नहीं है।
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सियाराम का कहना है कि पानी से मरी फसल जिंदा हो गई। उप निदेशक कृषि विजय कुमार का कहना है कि फसलों को पानी की सख्त आवश्यकता थी। पानी न बरसता तो 25 फीसदी फसलें सूख जाती। मौसम वैज्ञानिक दिनेश शाहा का कहना है कि अभी दो दिनों तक रुक-रुककर बारिश होती रहेगी। सोमवार को 20 व मंगलवार को 40 मिली मीटर बारिश रिकार्ड की गई।