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कोरोना की दूसरी लहर ने दिल-दिमाग पर डाला असर
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बांदा। कोरोना की पहली लहर के खौफ से ज्यादा दूसरी लहर के प्रकोप ने लोगों के दिल और दिमाग पर खासा असर डाला है। डिप्रेशन (तनाव) और एंजाइटी (चिंता) के मरीज तेजी से बढ़े हैं। बुजुर्ग ही नहीं बल्कि बच्चे, किशोर और युवा वर्ग के लोग ज्यादा शिकार हैं। मानसिक रोग विशेषज्ञों से परामर्श और इलाज के लिए भीड़ लग रही है।
इसका खुलासा जिला अस्पताल और मेडिकल कालेज में स्थित मानसिक रोग विभाग के आंकड़ों से हुआ। रोजाना 50 फीसदी मरीज ओपीडी इलाज कराने पहुंच रहे हैं।
जिला अस्पताल स्थित मानसिक रोग विभाग की ओपीडी में रोजाना 80-90 मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें करीब 50 से 60 मरीज डिप्रेशन और एंजाइटी के हैं।
कोरोना की दूसरी लहर ने उनकी सेहत/दिमाग पर बुरी छाप छोड़ी है। रोग के खतरे और डर की वजह से लोग मानसिक बीमारी की गिरफ्त में आ रहे हैं। मानसिक रोग विभाग के डॉ. हरदयाल ने बताया कि ओपीडी में रोजाना डिप्रेशन के 20 से 25 और एंजाइटी के 30 से 40 मरीज इलाज कराने आ रहे हैं। टेलीमेडिसिन के माध्यम से भी प्रतिदिन 20 से अधिक कॉल आती हैं।
इनमें अधिकांश मरीज 25 से 45 वर्ष आयु के हैं। पोस्ट कोविड मरीज और बच्चे भी महामारी को लेकर ज्यादा तनाव में हैं।
उधर, मेडिकल कालेज में संचालित मानसिक रोग विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर/साइकेट्रिस्ट (एमडी) डॉ. शैलेंद्र मिश्रा ने बताया कि कोरोना की दूसरी लहर के बाद डिप्रेशन और चिंता के मरीज काफी बढ़े हैं।
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उनके यहां रोजाना ओपीडी में 30 से अधिक मरीज आ रहे हैं। लगभग 15 मरीज टेलीमेडिसिन के जरिए फोन पर परामर्श ले रहे हैं। इनमें 50 फीसदी मरीज डिप्रेशन के हैं। जो कोरोना को लेकर ज्यादा भयभीत हैं। दिमाग में डर का माहौल बना लिया है।
डिप्रेशन और एंजाइटी से यूं करें बचाव
मानसिक रोग विभाग के दोनों वरिष्ठ विशेषज्ञों ने डिप्रेशन और एंजाइटी से बचाव के लिए सकारात्मक सोच अपनाने की सलाह दी है। उनका कहना है कि कोरोना के बारे में ज्यादा न सोचें। न ही भविष्य की चिंता करें। नियमित व्यायाम और योगा करें। खुद को व्यस्त रखें। पढ़ाई, खेलकूद, संगीत, डांस आदि में मन लगाएं। कोरोना की खबरें आदि नकारात्मक चीजों से दूर रहें। आत्मविश्वास बढ़ाएं और वैक्सीन जरूर लगवाएं। भरपूर नींद लें।
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इसका खुलासा जिला अस्पताल और मेडिकल कालेज में स्थित मानसिक रोग विभाग के आंकड़ों से हुआ। रोजाना 50 फीसदी मरीज ओपीडी इलाज कराने पहुंच रहे हैं।
जिला अस्पताल स्थित मानसिक रोग विभाग की ओपीडी में रोजाना 80-90 मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें करीब 50 से 60 मरीज डिप्रेशन और एंजाइटी के हैं।
कोरोना की दूसरी लहर ने उनकी सेहत/दिमाग पर बुरी छाप छोड़ी है। रोग के खतरे और डर की वजह से लोग मानसिक बीमारी की गिरफ्त में आ रहे हैं। मानसिक रोग विभाग के डॉ. हरदयाल ने बताया कि ओपीडी में रोजाना डिप्रेशन के 20 से 25 और एंजाइटी के 30 से 40 मरीज इलाज कराने आ रहे हैं। टेलीमेडिसिन के माध्यम से भी प्रतिदिन 20 से अधिक कॉल आती हैं।
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इनमें अधिकांश मरीज 25 से 45 वर्ष आयु के हैं। पोस्ट कोविड मरीज और बच्चे भी महामारी को लेकर ज्यादा तनाव में हैं।
उधर, मेडिकल कालेज में संचालित मानसिक रोग विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर/साइकेट्रिस्ट (एमडी) डॉ. शैलेंद्र मिश्रा ने बताया कि कोरोना की दूसरी लहर के बाद डिप्रेशन और चिंता के मरीज काफी बढ़े हैं।
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उनके यहां रोजाना ओपीडी में 30 से अधिक मरीज आ रहे हैं। लगभग 15 मरीज टेलीमेडिसिन के जरिए फोन पर परामर्श ले रहे हैं। इनमें 50 फीसदी मरीज डिप्रेशन के हैं। जो कोरोना को लेकर ज्यादा भयभीत हैं। दिमाग में डर का माहौल बना लिया है।
डिप्रेशन और एंजाइटी से यूं करें बचाव
मानसिक रोग विभाग के दोनों वरिष्ठ विशेषज्ञों ने डिप्रेशन और एंजाइटी से बचाव के लिए सकारात्मक सोच अपनाने की सलाह दी है। उनका कहना है कि कोरोना के बारे में ज्यादा न सोचें। न ही भविष्य की चिंता करें। नियमित व्यायाम और योगा करें। खुद को व्यस्त रखें। पढ़ाई, खेलकूद, संगीत, डांस आदि में मन लगाएं। कोरोना की खबरें आदि नकारात्मक चीजों से दूर रहें। आत्मविश्वास बढ़ाएं और वैक्सीन जरूर लगवाएं। भरपूर नींद लें।