फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Banda News ›   The rock paintings of Bakswaha are neither recorded in the Department of Archeology, nor in the MP Government

बकस्वाहा के शैलचित्र न पुरातत्व विभाग, न एमपी सरकार में दर्ज

Tue, 08 Feb 2022 11:57 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 08 Feb 2022 11:57 PM IST
विज्ञापन
The rock paintings of Bakswaha are neither recorded in the Department of Archeology, nor in the MP Government
बकस्वाहा जंगल की चट्टानों पर बने हजारों वर्ष पुराने दुर्लभ शैलचित्र - फोटो : BANDA
बांदा। बुंदेलखंड के हजारों वर्ष पुराने बकस्वाहा जंगल की चट्टानों पर बेहद दुर्लभ और काफी संख्या में शैल चित्र (रॉक पेंटिंग) होने के बाद भी पुरातत्व विभाग की नजर इस पर नहीं पड़ी। नतीजे में यहां के शैल चित्र/चट्टानें न तो भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण सर्वे विभाग ने और न ही मध्य प्रदेश सरकार की सूची में दर्ज हैं। पुरातत्व विभाग अब बकस्वाहा जंगल की पुरातात्विक संपदा को अपनी सूची में शामिल करने पर विचार कर रहा है।
विज्ञापन

यह जानकारी पुरातत्व विभाग ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में दाखिल अपने जवाब में दी है। हाईकोर्ट में बकस्वाहा जंगल में स्थित शैल चित्रों और यहां हीरा खनन के लिए हजारों की संख्या में हरे पेड़ काटे जाने की संभावना के विरोध में दायर की गई याचिका पर सुनवाई कर रहा है।
विज्ञापन

मंगलवार को हाईकोर्ट (जबलपुर) में इस पर सुनवाई निर्धारित थी। याचिका दायर करने वाले पर्यावरण पैरोकार डा.पीजी नाजपांडे (नई दिल्ली) ने बताया कि पुरातत्व विभाग ने दाखिल किए अपने जवाब में हाईकोर्ट को बताया है कि राज्य सरकार उन्हीं पुरातात्विक संपदाओं का संरक्षण करती है जिन्हें नोटिफाइड (अधिसूचित) किया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

यह भी कहा कि बकस्वाहा में आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) ने वर्ष 1958 के कानून के तहत सर्वे किया है और यहां पुरातात्विक संपदा पाई है। पुरातत्व विभाग ने कहा है कि अब बकस्वाहा जंगल की पुरातात्विक संपदा को नोटिफाइड करने के लिए उनका विभाग सक्रियता से विचार कर रहा है। यह भी कहा है कि मौजूदा में यह क्षेत्र नोटिफाइड नहीं है। न ही राज्य सरकार की सूची में शामिल है।
गौरतलब है कि बकस्वाहा जंगल में हीरा खनन के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने बिरला ग्रुप की एस्सल माइनिंग कंपनी को 50 साल के लिए पट्टे पर दे दिया है। बताया जा रहा है कि जंगल के दो लाख से ज्यादा हरे पेड़ काटे जाएंगे। इस जंगल में पिछले वर्ष चट्टानों में दुर्लभ शैल चित्र पाए गए हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक यह 25 हजार वर्ष पुराने शैल चित्र हैं। हीरा खनन से इन्हें नुकसान पहुंच सकता है। इसी के मद्देनजर पर्यावरण पैरोकार श्री नाजपांडे ने हाईकोर्ट में अपने अधिवक्ता सुरेंद्र वर्मा के माध्यम से याचिका दायर कर रखी है। उनकी याचिका पर हाईकोर्ट ने बकस्वाहा जंगल में फिलहाल खनन आदि पर रोक लगा रखी है।

हाईकोर्ट ने 26 अक्तूबर 2021 को रोक आदेश जारी किया था। साथ ही पुरातत्व विभाग, वन विभाग और एस्सल माइनिंग कंपनी से जवाब दाखिल करने का आदेश दिया था। इसी के अनुपालन में पुरातत्व विभाग ने अब अपना जवाब दाखिल किया है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने बताया कि हाईकोर्ट में यह याचिका अभी लंबित है। स्थगन आदेश प्रभावी रहेगा।

 बकस्वाहा जंगल की चट्टानों पर बने हजारों वर्ष पुराने दुर्लभ शैलचित्र

बकस्वाहा जंगल की चट्टानों पर बने हजारों वर्ष पुराने दुर्लभ शैलचित्र- फोटो : BANDA

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed