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बोरवेल से हादसा बचाने का जिम्मा ठेकेदार पर छोड़ा

Thu, 03 Dec 2020 11:03 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 03 Dec 2020 11:03 PM IST
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The responsibility of saving the accident from the borewell left to the contractor
बोरवेल से सुरक्षित निकले बच्चे को दुलारते तत्कालीन एसपी गणेश साहा व इंसपेक्टर बलजीत सिंह। फाइल ? - फोटो : BANDA
बांदा। महोबा की घटना ने खुले बोरवेल से होने वाले हादसों को फिर ताजा कर दिया। पिछले वर्ष बांदा के पचोखर गांव में बोरवेल में गिरे तीन वर्ष के बच्चे की जान आफत में आ गई थी। हालांकि पुलिस के रेस्क्यू ने छह घंटे की मशक्कत के बाद बच्चे को सही सलामत निकाल लिया था। उधर, सरकारी नलकूपों के लिए बोर करने वाले विभाग ठेकेदार पर ही सारा दारोमदार बताकर पल्ला झाड़ रहे हैं।
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ट्यूबवेल के लिए मशीनों से काफी गहरे गड्ढे किए जाते हैं। अक्सर बोर फेल हो जाने पर इन गड्ढों को खुला छोड़ दिया जाता है। जानलेवा यह गलती सिर्फ किसान ही नहीं बल्कि संबंधित सरकारी विभाग भी करते हैं। ऐसी ही घटना में पिछले वर्ष 16 अप्रैल को अतर्रा थाना क्षेत्र के पचोखर गांव में खेत में खुले गहरे गड्ढे में डेढ़ वर्ष की बालिका पुष्पा जा गिरी।
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नजदीक में ही माता-पिता खेत में काम कर रहे थे। गड्ढे की गहराई लगभग 12 फिट थी। मां-बाप की नजर पड़ी थी तो कोहराम मच गया। अतर्रा थाना पुलिस में तत्कालीन इंस्पेक्टर बलजीत सिंह के नेतृत्व में पोकलैंड मशीन से तत्काल गड्ढे के नजदीक दूसरा गड्ढा खुदवाना शुरू कर दिया। तत्कालीन एसपी गणेश साहा भी पहुंच गए। पुलिस की रेस्क्यू टीम ने करीब तीन घंटे की मशक्कत के बाद बालिका को सही सलामत बाहर निकाल लिया।
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उधर, अनुदानित योजना के तहत निजी नलकूप लगाने वाले लघु सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता पीके सिंह का कहना है कि ठेकेदार से लिखित लिया जाता है कि ट्यूबवेल के बोर को ढक्कन से बंद रखा जाएगा। यदि कोई घटना होती है तो इसके लिए संबंधित ट्यूबवेल मालिक/किसान जिम्मेदार होगा।

उन्होंने यह भी बताया कि सरकारी ट्यूबवेल में विभाग बाकायदा वेलकैप (ढक्कन) लगाकर बंद करता है। साथ ही बोरिंग के बाद ट्यूबवेल का पक्का कमरा बना दिया जाता है। सहायक अभियंता का कहना है कि उनके विभाग द्वारा लगाए गए निजी अथवा सरकारी किसी भी ट्यूबवेल के बोर में अब तक कोई हादसा नहीं हुआ है।
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