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Banda News: अर्से से चल रहा था नकली खाद बनाने का गोरखधंधा
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बांदा। नकली खाद बनाने का गोरख धंधा अर्से से चल रहा था। कैल्शियम सल्फेट (जिप्सम), प्रोम, एनपीके मिलाकर नकली खाद डीएपी तैयार की जाती थी। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि खेतों के लिए नुकसानदेह तो नहीं है लेकिन उर्वरक भी नहीं है।
गुरुवार को जिलाधिकारी के आदेश पर शहर के नरैनी रोड स्थित एक गोदाम में प्रशासनिक टीम ने छापा मारा था। मौके पर ई-रिक्शा में इफ्को की बोरी में पैक 10 व गोदाम में 27 बोरी नकली खाद पकड़ी। उत्तम डीएपी की दो खुली बोरी, कैलशियम सल्फेट की खुली 18 बोरी और बोरी सील करने की मशीन मिली। जिला कृषि अधिकारी मनोज कुमार गौतम ने बताया कि गोदाम मालिक इकराम भाग निकला। पुलिस ने नकली खाद के कारोबार में संलिप्त सारिक को गिरफ्तार कर लिया है। बताया कि खाद के सैंपल लेकर परीक्षण के लिए भेजा गया है। गोदाम को सील कर दिया गया है। पिता-पुत्र सहित तीन के विरुद्ध कोतवाली नगर में आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3/7 के तहत केस दर्ज कराया गया है।
उन्होंने बताया कि नकली खाद बनाने का यह कारोबार अर्से से चल रहा था। कहा कि, रॉ मैटेरियल खत्म हो जाने के कारण वहां खाद कम मिली। गोदाम में कैल्शियम सल्फेट (जिप्सम), प्रोम, एनपीके मिलाकर नकली खाद डीएपी तैयार की जाती थी। उप कृषि अधिकारी अजय कुमार ने बताया कि इफ्को की बोरियों में भरकर जो बेचा जा रहा था वह खेतों के लिए नुकसानदेह तो नहीं है लेकिन वह उर्वरक भी नहीं है।
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गुरुवार को जिलाधिकारी के आदेश पर शहर के नरैनी रोड स्थित एक गोदाम में प्रशासनिक टीम ने छापा मारा था। मौके पर ई-रिक्शा में इफ्को की बोरी में पैक 10 व गोदाम में 27 बोरी नकली खाद पकड़ी। उत्तम डीएपी की दो खुली बोरी, कैलशियम सल्फेट की खुली 18 बोरी और बोरी सील करने की मशीन मिली। जिला कृषि अधिकारी मनोज कुमार गौतम ने बताया कि गोदाम मालिक इकराम भाग निकला। पुलिस ने नकली खाद के कारोबार में संलिप्त सारिक को गिरफ्तार कर लिया है। बताया कि खाद के सैंपल लेकर परीक्षण के लिए भेजा गया है। गोदाम को सील कर दिया गया है। पिता-पुत्र सहित तीन के विरुद्ध कोतवाली नगर में आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3/7 के तहत केस दर्ज कराया गया है।
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उन्होंने बताया कि नकली खाद बनाने का यह कारोबार अर्से से चल रहा था। कहा कि, रॉ मैटेरियल खत्म हो जाने के कारण वहां खाद कम मिली। गोदाम में कैल्शियम सल्फेट (जिप्सम), प्रोम, एनपीके मिलाकर नकली खाद डीएपी तैयार की जाती थी। उप कृषि अधिकारी अजय कुमार ने बताया कि इफ्को की बोरियों में भरकर जो बेचा जा रहा था वह खेतों के लिए नुकसानदेह तो नहीं है लेकिन वह उर्वरक भी नहीं है।
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