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पानी बचाना ही एकमात्र उपाय
अमर उजाला ब्यूरो, बांदा
Updated Thu, 22 Mar 2018 11:05 PM IST
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संगोष्ठी को संबोधित करते डा. रोहित सिंह।
- फोटो : अमर उजाला
पानी का खर्च कम से कम होना चाहिए। यह किसी कारखाने में नहीं बनाया जा सकता। यह बात विश्व जल दिवस की 25वीं वर्षगांठ पर आयोजित जल बचाव संगोष्ठी में विशेषज्ञों ने कहीं।
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पंडित जवाहरलाल नेहरू महाविद्यालय शिक्षक संघ के तत्वावधान में गुरुवार को हुई संगोष्ठी में महाविद्यालय के प्रवक्ता डा. रोहित सिंह ने बताया कि वर्ष 1993 में संयुक्त राष्ट्र (यूएन) ने 22 मार्च को विश्व जल दिवस के रूप में घोषित किया। डा. पीके सिंह ने कहा कि समुद्र जल को पीने योग्य बनाने पर 35 रुपये प्रति लीटर लागत आती है। डा. लालबहादुर ने कहा कि जल को पैदा नहीं किया जा सकता, लेकिन संरक्षित करके इस संकट से बचा जा सकता है।
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डा. केएस कुशवाहा ने कहा कि वृक्षों की कटान और प्रकृति संपदा के नष्ट होने से मौसम में असंतुलन आ रहा है। प्रोफेसर डा. एके त्रिपाठी ने पौधरोपण और जल संरक्षण पर जोर दिया। डा.एसके सिंह ने कविता पढ़ी। गोष्ठी में डा.डीएल मौर्य, डा.एके त्रिपाठी, डा. पीतांबर, डा. आदेश गुप्ता, डा. एसके सिंह, डा.संतोष भदौरिया आदि मौजूद रहे।
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सहभागिता से जल संरक्षण संभव
बांदा। विश्व जल दिवस पर अखिल भारतीय समाज सेवा संस्थान के तत्वावधान में विकास भवन सभागार में गुरुवार को आयोजित गोष्ठी में सीडीओ ने कहा कि कथनी को जमीन पर उतारने का काम सरकार और सामुदायिक सहभागिता से किया जाएगा। उप निदेशक अर्थ एवं संख्या एसएन त्रिपाठी ने कहा कि पानी से जीवन की सार्थकता को सिद्ध किया जा सकता है।
जल स्रोतों को जीवंत रखेंगे ताकि पुरानी जल स्रोत की पूजा की परंपरा को कायम रखा जा सके। जिला अर्थ एवं संख्या अधिकारी संजीव बघेल, जिला समन्वयक मनोज द्विवेदी, जिला वाश फोरम अध्यक्ष डॉ.जनार्दन प्रसाद त्रिपाठी, संतोष कुमार, रामसुफल ने भी संबोधित किया। इस दौरान चार दिवसीय अभियान रथ यात्रा को सीडीओ ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यात्रा का नेतृत्व सदाशिव कर रहे हैं। चटगन, चमरहा, जखौरा, करछा, इंटवा गांव पहुंची। संचालन भागवत प्रसाद व आभार विजय सिंह ने जताया। नवल, कामता, शिवबरदानी आदि रहे। ब्यूरो