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नए कानून में विसंगतियों की भरमार : अध्यक्ष

Fri, 07 Jun 2024 12:16 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 07 Jun 2024 12:16 AM IST
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The new law is full of inconsistencies: Chairman
बांदा। देश में एक जुलाई से भारतीय न्याय व भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 लागू होगा। जिला अधिवक्ता संघ सभागार में आयोजित कार्यशाला में कानून के उद्देश्य, विषय वस्तु, प्रावधानों, आपराधिक न्याय प्रणाली सहित एक्ट की खामियों को लेकर चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि नए कानून में तमाम विसंगतियां हैं, जिस पर अधिवक्ता समाज को विचार करने की आवश्यकता है।
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जनपद न्यायाधीश डाॅ. बब्बू सारंग ने नए कानून की बारीकियां व क्रियान्वयन करने की प्रक्रिया पर विस्तृत जानकारी दी। वकीलों को गवाही, विशेष व्यक्तियों से संबंधित कानून, वाहन दुर्घटना कानून, घरेलू हिंसा, कैदियों के अधिकारों के बारे में अवगत कराया। सीजेएम भगवान दास गुप्ता ने कहा कि नए कानूनों में कई अच्छाइयां भी हैं।
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अनुशरण में प्रार्थना पत्रों के निस्तारण व संज्ञान की प्रक्रिया पर अपने सुझाव दिए। बार संघ अध्यक्ष अशोक कुमार दीक्षित ने कहा कि आईपीसी, सीआरपीसी का नामकरण कर एक्ट में परिवर्तन किया गया है, वह विद्वत समाज के लिए उचित नहीं था। दंड प्रक्रिया संहिता का नाम भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता रखा जाना अस्वाभाविक है।
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कहा कि बढ़ते परिवेश में कुछ धाराओं की बढ़ोत्तरी मात्र की आवश्यकता थी। जैसे आंतकवाद, संगठित आपराधिक व आर्थिक अपराध, साइबर क्राइम, वेश्यावृत्ति, सिंडीकेट के अपराध की धाराओं सहित इलेक्ट्राॅनिक साक्ष्य प्रणाली के विचारण आदि में संशोधन होना चाहिए।

लेकिन अंग्रेजों के जमाने के अधिनियम की वही पुरानी धाराओं में उलट पलट कर उसे नए कानून में समायोजित कर भ्रम का मायाजाल फैलाया जा रहा है। नया कानून जहां सामूहिक अपराध को रोकता है, जबकि नए कानून के मुताबिक यदि चालक सड़क हादसे के बाद वहीं खड़ा रहेगा तो स्वाभाविक है कि वह सामूहिक हिंसा का शिकार हो जाएगा। कानून में तमाम विसंगतियां हैं।
इस पर जल्द राष्ट्रीय स्तर पर सेमिनार किया जाएगा। वरिष्ठ अधिवक्ता शंकर सिंह का कहना था कि नए कानून में न्यायविदों, विद्धान अधिवक्ताओं के तपस्या व मेहनत के अभिमतों को निष्यप्रयोज्य करने का प्रयास किया गया है, लेकिन दुख इस बात का है कि नए कानून को लेकर ट्रक एसोसिएशन आंदोलित हुआ पर राष्ट्रीय अधिवक्ता संघ व समाज चुप रहा।


पूर्व बार संघ अध्यक्ष अवधेश गुप्ता, अशोक त्रिपाठी जीतू आदि ने अपने विचार रखे। पूर्व बार संघ अध्यक्ष रामस्वरूप, रोहन सिंह सहित तमाम अधिवक्ता मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन महासचिव रामप्रकाश शिवहरे ने किया।
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