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Banda News: कोडीनयुक्त सिरप की कमाई से समाजसेवी बनने का खेल

Sat, 12 Sep 2026 11:03 PM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा Updated Sat, 12 Sep 2026 11:03 PM IST
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The game of becoming a social worker using earnings from codeine-laced syrup.
अतर्रा (बांदा)। कोडीनयुक्त सिरप मामले में मुख्य आरोपी प्रियांशु गुप्ता उर्फ किशन की गिरफ्तारी के बाद उसकी सामाजिक छवि को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
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आरोपी धार्मिक और सामाजिक आयोजनों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेता था। कस्बे में उसकी पहचान समाजसेवी के तौर पर भी बन गई थी। अब पुलिस की वित्तीय जांच से यह सामने आ सकता है कि इन गतिविधियों में खर्च की गई रकम का स्रोत क्या था।
स्थानीय लोगों के अनुसार आरोपी कस्बे में धार्मिक आयोजनों में महंगे पोस्टर और होर्डिंग लगवाता था। इनमें खुद को आयोजन का संयोजक बताने के साथ अपने मेडिकल प्रतिष्ठान का प्रचार भी कराता था। वह अतर्रा केंद्रीय पूजा महोत्सव समिति में वरिष्ठ मंत्री होने की बात भी बताता रहा है।
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बताया गया कि 24 अगस्त को गौराबाबा धाम परिसर में केंद्रीय पूजा महोत्सव समिति की ओर से शिव मूर्ति पूजन, भंडारे और भजन कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इसमें आरोपी की ओर से लगाए गए पोस्टर और होर्डिंग भी चर्चा में रहे। कार्यक्रम में पूर्व मंत्री, पूर्व नरैनी विधानसभा प्रत्याशी, चेयरमैन प्रतिनिधि नरैनी, समिति के पदाधिकारी, युवा मोर्चा के पदाधिकारी, व्यापारी और युवा मौजूद रहे थे।
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स्थानीय लोगों का कहना है कि आरोपी लंबे समय से व्यापारियों, युवाओं और सामाजिक लोगों के बीच सक्रिय रहता था और धार्मिक आयोजनों में आर्थिक सहयोग करता था। पुलिस ने कोडीन सिरप के अवैध कारोबार के मामले में आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
अब जांच में आरोपी के बैंक खातों, संपत्तियों, कारोबारी लेनदेन और अन्य वित्तीय गतिविधियों की पड़ताल अहम मानी जा रही है। हालांकि, सामाजिक आयोजनों में खर्च की गई रकम का स्रोत अवैध कारोबार से जुड़ा था या नहीं, इसकी पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
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काली कमाई से सफेद छवि बनाने की होगी जांच
प्रियांशु गुप्ता की गिरफ्तारी के बाद उसकी सामाजिक गतिविधियां भी जांच के दायरे में आने की संभावना है। यदि पुलिस जांच में यह पुष्टि होती है कि अवैध कारोबार से अर्जित धन का इस्तेमाल सामाजिक या धार्मिक आयोजनों में प्रतिष्ठा बनाने के लिए किया गया, तो यह मामले का एक अहम पहलू होगा।

पुलिस के सामने यह भी स्पष्ट करना जरूरी होगा कि आरोपी की आर्थिक गतिविधियां किन लोगों और संस्थाओं से जुड़ी थीं। उसके खातों में रकम कहां से आई, किन खातों में भेजी गई और सामाजिक आयोजनों में कितना धन खर्च किया गया, इसकी जांच से कथित नेटवर्क की तस्वीर साफ हो सकती है।
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