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विभाग नहीं ले सकेंगे ठेकेदारों से रायल्टी या जुर्माना
ब्यूरो अमर उजाला, बांदा
Updated Sat, 13 Aug 2016 11:04 PM IST
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कोर्ट
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बांदा। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार को झटका देते हुए विभिन्न सरकारी विभागों में निर्माण कराने वाले ठेकेदारों को राहत दी है। कोर्ट ने प्रदेश सरकार के उस शासनादेश को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि ठेकेदारों का भुगतान खनिज रायल्टी काट कर किया जाए। हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार को चार हफ्ते के अंदर इस बारे में स्पष्ट नए आदेश जारी करने को कहा है।
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15 अक्तूबर 2015 को प्रदेश के मुख्य सचिव ने शासनादेश जारी कर कहा था कि सार्वजनिक निर्माण में इस्तेमाल होने वाले उप खनिज गिट्टी, बालू, मौरंग, इमारती पत्थर, साधारण मिट्टी आदि की आपूर्ति लेते समय यह सुनिश्चित किया जाए कि इसकी रायल्टी (एमएम-11) का वैध भुगतान किया गया है या नहीं।
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अगर ठेकेदार ने उप खनिज का प्रयोग बिना रायल्टी दिए किया है तो रायल्टी के साथ पांच गुना और कटौती कर ठेकेदार का भुगतान किया जाए। कटौती की गई रकम सरकारी खजाने में डाली जाए। इस शासनादेश के बाद तमाम ठेकेदारों के भुगतान में करोड़ों रुपये की कटौती कर ली गई।
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इस शासनादेश के विरुद्ध इलाहाबाद हाईकोर्ट में लगभग 72 याचिकाएं दायर की गईं। इसमें बांदा के अयोध्या प्रसाद मिश्रा ने भी रिट दायर की थी। इसमें कहा गया कि पत्थर तुड़वाई क्रेशर मालिक एमएम-11 रवन्ने से रायल्टी अदा करते हैं। फिर उन्हीं पत्थरों से मशीन से विभिन्न साइज की गिट्टी बनाते हैं। क्रेशर से यह गिट्टी ठेकेदार खरीदते हैं। इसी तरह बालू आदि भी ठेकेदारों से खरीदते हैं। बालू ठेकेदार ही रायल्टी देता है।
ठेकेदारों के अधिवक्ताओं ने दलील दी कि दो बार रायल्टी नहीं वसूली जा सकती। क्रेशर मालिक या बालू विक्रेता से ठेकेदार ये कैसे सुनिश्चित कराएं कि उन्होंने रायल्टी अदा की है या नहीं? अधिवक्ताओं ने कहा कि शासन का यह आदेश नैसर्गिक न्याय के विरुद्ध है। रायल्टी उत्पादन केंद्र या बालू पट्टाधारकों से वसूल की जानी चाहिए।
तमाम रिटों की एक साथ सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति तरुण अग्रवाल और न्यायमूर्ति विपिन सिन्हा ने एक अगस्त 2016 को अपने 23 पृष्ठीय आदेश में कहा कि 15 अक्तूबर 2015 का शासनादेश अधूरा और अस्पष्ट है।
मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि अन्य विभागों के प्रमुख सचिव, मंडलायुक्त और जिलाधिकारियों को चार हफ्ते के भीतर इस आदेश के अनुसार स्पष्ट शासनादेश जारी करें। यह भी कहा कि ठेकेदारों ने जब उप खनिज लाइसेंसधारकों से रायल्टी देकर उप खनिज खरीदे हैं और फार्म-सी दिया है तो अधिकारियों को यह साक्ष्य स्वीकार करना चाहिए।
उनसे दोबारा रायल्टी या कोई जुर्माना नहीं लिया जाना चाहिए। रिट की पैरवी अधिवक्ता सैय्यद मोहम्मद फजल और एसजी हसनैन आदि ने की।