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Banda News: देश की संस्कृति को मिटाने की हजार वर्षों से साजिश पर नहीं हुई सफल

Sat, 28 Oct 2023 12:48 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा Updated Sat, 28 Oct 2023 12:48 AM IST
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The conspiracy to destroy the country's culture for thousands of years has not succeeded
चित्रकूट। भगवान राम की तपोभूमि चित्रकूट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि देश की संस्कृति को मिटाने के लिए कई बार साजिशें हुई। विश्व भर में भारत की पहचान संस्कृत भाषा को जड़ से उखाडऩे के प्रयास हुए लेकिन हर बार वह अक्षुण्य व अटल रही। शस्त्र व शास्त्र की जननी संस्कृत ही है। आज देश में संस्कृत की जगह कई अन्य भाषाएं ले रही हैं। संयम समर्पण व सकारात्मक सोच से किसी भी विपत्ति व बड़े काम को सरलता से किया जा सकता है। यह काम देश के उद्योगपति अरविंद भाई मफतलाल ने ऋषि मुनियों के आशीर्वाद से जीवन पर्यंत बखूबी किया। उनके नाम पर भारत सरकार ने डाक टिकट जारी किया है। उन्होंने चित्रकूट की महिमा का कई बार दोहे सुनाकर गुणगान किया।
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शुक्रवार को चित्रकूट (मप्र) आए प्रधानमंत्री दोपहर एक बजकर 52 मिनट पर विशेष विमान से विद्याधाम में बने हेलीपैड पर उतरे। मप्र के राज्यपाल मंगुभाई पटेल व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उनका स्वागत किया। प्रधानमंत्री काफिले के साथ सीधे सदगुरु सेवा संघ ट्रस्ट जानकीकुंंड के रघुवीर मंदिर में जाकर भगवान रामसीता व लखन की मूर्तियों की पूजा आरती की। श्रीराम संस्कृत महाविद्यालय के पुस्तकालय व प्रदर्शनी का अवलोकन किया। वेद शास्त्र के छात्रों ने वेद मंत्रों से उनका स्वागत किया। इसके बाद वह जानकीकुंड अस्पताल के संस्थापक अरविंद भाई मफतलाल की 100 वीं जयंती पर उनकी समाधि पर पहुंचे। संस्थापक के नाती विशद भाई मफतलाल, बहू रुपल बेन मफतलाल व डॉ.बीके जैन के साथ समाधि पर पुष्प अर्पित किए। अस्पताल परिसर में नये सुपर स्पेशलिटी अस्पताल का शुभारंभ किया। स्टेडियम में सभा स्थल पर प्रधानमंत्री ने कहा कि इस अस्पताल का मेरी काशी को भी लाभ मिला है। अब यहां पर सभी रोगों के ग्रसित गरीब लोगों को लाभ मिले।
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तुलसी पीठ के सभागार में प्रधानमंत्री ने जगदगुरु रामभद्राचार्य की हस्तलिखित तीन किताबों का विमोचन कर कहा कि गुलामी के एक हजार वर्ष के कालखंड में भारत को तरह तरह से उखाडऩे का प्रयास हुआ। इन्हीं में से एक संस्कृत भाषा का पूरा विनाश करना भी था। हम आजाद हुए लेकिन जिन लोगों में गुलामी की मानसिकता नहीं गई वह संस्कृत के प्रति बैर भाव पालते रहे। यह हमारी प्रगति व पहचान की भाषा है। हजारों वर्षों में कई भाषाएं आई व गईं लेकिन संस्कृत भाषा समय के साथ परिष्कृत तो लेकिन प्रदुषित नहीं। 14 महेश्वर सूत्रों पर टिकी भाषा हजारों वर्षों से शस्त्र व शास्त्र दोनोंं विधाओं की जननी है। इसी दौरान जगदुगुरु की उन्होंने तारीफ की। जगदगुरु रामभद्राचार्य ने कहा कि रामचरित मानस को राष्ट्रीय गं्रंथ घोषित किया जाए।
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इसके पूर्व प्रधानमंत्री ने जानकीकुंड अस्पताल परिसर में संत रणछोडदास व उद्योगपति अरविंद भाई मफतलाल के कामों की प्रशंसा कर कहा कि बहुत कम लोग ऐसे होते हैं जिन्हें दुनिया से जाने के बाद भी लोग याद करते हैं और उनके अनुयायी उनके अच्छे काम को जारी रखते हैं। यह ट्रस्ट मानव सेवा के हिसाब से बेहद महान है। उनके परिजन आज भी संस्कार, समर्पण व संयम से काम कर रहे हैं। चित्रकूट की धरती धार्मिक होने के साथ भारतरत्न नानाजीदेशमुख की कर्मस्थली भी है। उन्होंने भी जनजातीय समाज के लिए काम किया। प्रधानमंत्री दो घंटे 35 मिनट तक धर्मनगरी में रहने के बाद शाम को चार बजकर 33 मिनट पर रवाना किया।
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