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शहर में पुलिसिंग : सीसी कैमरे खराब, फोर्स का टोटा
ब्यूरो, अमर उजाला, बांदा
Updated Sun, 06 Nov 2016 11:08 PM IST
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खराब पड़े बांदा शहर में लगाए गए सीसीटीवी कैमरे।
- फोटो : अमर उजाला
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बांदा। मुख्यमंत्री और प्रदेश के गृह मंत्रालय द्वारा शहरों में सुरक्षा व्यवस्था हाईटेक किए जाने के आएदिन किए जा रहे दावों के बावजूद मंडल मुख्यालय बांदा शहर की पुलिसिंग व्यवस्था बेहद कमजोर है। जिले में किए गए ज्यादातर उपाय दिखावटी और खटारा हैं। कांस्टेबिल से लेकर दरोगा तक के सैकड़ों पद खाली हैं। इसके साथ ही सीसीटीवी कैमरे पिछले दो सालों में एक भी घटना के खुलासे में मददगार नहीं बन पाए तो प्रमुख स्थलों के कैमरे खराब पड़े हैं।
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मुख्यमंत्री ने बीते सालों में शहरों की पुलिस व्यवस्था में काफी सुधार के कदम उठाए। बांदा में भी दो वर्ष पूर्व नगर पालिका और पुलिस ने मिलकर आधा दर्जन प्रमुख चौराहों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए थे। इनके कंट्रोल रूम संबंधित पुलिस चौकियों में बनाए गए थे। लेकिन कैमरे कुछ ही दिन बाद खराब हो गए।
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चेन स्नैचिंग, बाइक चोरी सहित कई घटनाएं कैमरों के दायरे में होती रही लेकिन पुलिस कैमरों की मदद से एक भी अपराधी तक पहुंच नहीं पाई। खराब कैमरों का पुलिस कर्मी यूं फायदा उठा रहे हैं कि अलीगंज और कालू कुआं आदि पुलिस चौकियों में गुजर रहे ट्रकों से पुलिस कर्मी या उनके गुर्गे वसूली कर रहे हैं। कैमरे में कुछ कैद नहीं हो रहा।
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शहर में गश्त के लिए पूर्व में पवन और चेतक मोबाइल नामों से बाइक चलाई गईं। यह सब भी कुछ दिनों के बाद ही कबाड़ बन गईं। अब पुलिस चौकियों में धूल खा रही हैं। उनकी मरम्मत की किसी ने सुध नहीं ली। अब हाल ही में 8 नई बाइकें प्रदेश सरकार से शहर पुलिस को मिली हैं। यह लाल-नीली बत्ती और हूटर आदि से लैस हैं।
हरेक बाइक पर दो सशस्त्र पुलिस कर्मी गश्त करते हैं। आधी रात के बाद इन बाइकों के हूटर भी थम जाते हैं। पुलिस ने इन्हें दिन में ईगल और रात 10 से सुबह 10 बजे तक कोबरा का नाम दिया है। तैनात दोनों सिपाहियों के पास एक इंसास राइफल और एक पिस्टल होती है। चूंकि बाइक अभी नई हैं इसलिए पुलिस कर्मी इनका इस्तेमाल भी कर रहे हैं।
मंडल मुख्यालय में आबादी के साथ दायर भी बढ़ा है। अपराधों में भी वृद्धि हुई है। लेकिन शहर में 24 घंटे की पिकेट ड्यूटी व्यवस्था मात्र शंकर गुरु चौराहे में है। शेष सभी चौराहे और सार्वजनिक तथा भीड़भाड़ वाले स्थान भगवान भरोसे हैं।
यहां पुलिस तभी नजर आती है जब कोई घटना हो जाती है। शहर में कुल 8 चौकियां हैं। यह सिर्फ चौकी प्रभारी और सिपाही के रहने वाली जैसी बन कर रह गई है। ज्यादातर चौकियां सूनीं पड़ी रहती हैं। रिपोर्टिंग कोई चौकी नहीं है। चौकी प्रभारी उप निरीक्षक समेत हरेक चौकी में लगभग 8 सिपाही हैं।