फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Banda News ›   Tears in eyes of applicants seeing the sight of Hajj

हज के मंजर देख आवेदकों की आंखों में आंसू

Mon, 19 Jul 2021 11:42 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 19 Jul 2021 11:42 PM IST
विज्ञापन
Tears in eyes of applicants seeing the sight of Hajj
Tears in eyes of applicants seeing the sight of Hajj - फोटो : BANDA
बांदा। आवेदन और पैसा जमा कर देने के बाद भी हज का फर्ज अदा न कर पाने का अफसोस और मलाल अब हज आवेदकों की आंखों से आंसू बनकर छलक रहा है। शनिवार से हज के अरकान (रस्में) शुरू हो गए।
विज्ञापन

बीती रविवार की रात खान-ए-काबा का गिलाफ बदला गया। 17 जुलाई से हज के खास अरकान शुरू हो गए हैं। यह 22 जुलाई तक चलेंगे। कोरोना के तीसरी लहर के मद्देनजर सऊदी सरकार ने इस मर्तबा भी बाहरी लोगों को हज पर आने की इजाजत नहीं दी। सिर्फ 60 हजार स्थानीय बाशिंदे हज करते नजर आ रहे हैं। चित्रकूटधाम मंडल से आवेदन करने वाले आधा सैकड़ा से ज्यादा महिला-पुरुष यह मंजर ऑनलाइन स्क्रीनिंग पर देखकर बेहद गमजदा हैं।
विज्ञापन

चित्रकूटधाम मंडल से लगभग आधा सैकड़ा आजमीने हज ने फार्म भरकर लगभग 4-4 लाख रुपये जमा किया था। बांदा से 22, हमीरपुर से 16, महोबा से 12 और चित्रकूट से एक फार्म भरा गया था। अब इन सभी के खातों में पैसा वापस भेज दिया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

-आरिफ खां, सदस्य, प्राइवेट हज/उमरा समिति
कलक्ट्रेट में प्रशासनिक अधिकारी के पद से रिटायरमेंट के बाद हज की तैयारी थी। आवेदन और औपचारिकताएं पूरी कर ली थी, लेकिन कोविड के चलते सऊदी सरकार ने रोक लगा दी। बहुत ही सदमा हुआ है। हम फिलहाल हज से महरूम रह गए।
-सईद अहमद, बांदा।
जिंदगी का कोई भरोसा नहीं। बचपन से हज की तमन्ना थी। अबकी तैयारी थी। ऐन मौके पर उम्मीदों पर पानी फिर गया। मक्का और मदीना की पाकीजा सरजमीं में कदम रखने का मौका न मिला। अब वहां चल रहे हज का मंजर मोबाइल पर देखकर और अफसोस हो रहा है।
-अनवर जहां, रिटायर्ड प्रधानाध्यापक, चित्रकूट।
खाना-ए-काबा में तवाफ और मसजिदें नबवी में नमाज अदा करने का बेहद शौक और तमन्ना थी। एक अहम फर्ज अदा करने की तैयारी थी, लेकिन वबा (महामारी) ने सारी तमन्नाओं पर पानी फेर दिया। दुआ है कि अगले साल सब ठीक रहे और हम हज को जाएं।

-शेख अशरफ, महोबा।
फिलहाल घर में कोई फर्द हज का फरीजा पूरा नहीं कर पाया। इस सालजाने की पूरी तैयारी कर ली थी। हज हो जाता तो अपने घर में पहला हाजी होता, पर अल्लाह को शायद मंजूर नहीं था। आज जब हज के अरकान पूरे हो रहे हैं तो अजब महसूस हो रहा है। मौका मिला तो अगले साल जाएंगे।
-इसरार हुसैन खां, हमीरपुर।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed