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कोरोन काल ने बदल दिया पढ़ाई का तौर-तरीका
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- फोटो : BANDA
बांदा। कोरोना संक्रमणकाल ने पढ़ाई के तौर-तरीकों को भी एक साल में बदल दिया है। स्कूल-कालेज बंद होने से ऑनलाइन पढ़ाई को बढ़ावा मिला। हालांकि, बुंदेलखंड जैसे इलाके में ऑनलाइन पढ़ाई किसी चुनौती से कम नहीं थी।
बच्चों का भविष्य संवारने के लिए अभिभावकों ने भी इस नई तकनीक को अपना लिया। ऐसे में शिक्षक और छात्र-छात्राओं ने इस पर महती भूमिका अदा की। कुछ विद्यालयों में स्मार्ट क्लास की शुरुआत हो गई। अभिनव प्रयोग और सतत कुछ नया करने की चाह में आखिरकार रास्ता भी मिल भी गया। यहां सरस्वती बालिका विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज और आदर्श बजरंग इंटर कॉलेज इसकी बानगी है। जहां सीमित संसाधनों में ही स्टैंड में मोबाइल रखकर ऑनलाइन क्लासों का सीधा प्रसारण कर बच्चों को शिक्षा दी गई। हालांकि, इसमें व्यावहारिक दिक्कतें आईं। कभी नेट फेल तो कभी नेटवर्क। कुल मिलाकर यह नया प्रयोग कोरोना काल की नई इबारत लिख गया।
इंसेट---
फोटो परिचय-2-शैलजा तिवारी
ऑनलाइन के लिए तैयार करना थी चुनौती
शिक्षिका शैलजा तिवारी ने बताया कि मार्च महीने में लॉकडाउन लग गया। स्कूल-कालेज बंद थे। अप्रैल से नया शिक्षा सत्र शुरू हो गया। तभी आदेश आया कि बच्चों को ऑनलाइन शिक्षा दी जानी है। इसके लिए खुद को तैयार करना और बच्चों को पढ़ाना चुनौती थी। प्रधानाचार्य डॉ. अमिता सिंह के निर्देशन में सबसे पहले बच्चों के मोबाइल नंबर लोड कर व्हाट्सग्रुप बनाया। उसके बाद 40 मिनट का एक लेक्चर वीडियो लोड किया। इसमें कुछ तकनीकी दिक्कतें आने पर एक्सपर्ट की मदद ली। अभी भी वह ग्रुप के माध्यम से और स्मार्ट क्लास के जरिए पढ़ा रही हैं।
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फोटो परिचय-3-अनुरुद्ध सिंह
पहले खुद सीखा फिर बच्चों को पढ़ाया
शिक्षक अनुरुद्ध सिंह ने बताया कि ऑनलाइन शिक्षा के लिए पहले घर में ही खुद वीडियो बनाकर सीखा। सोशल नेटवर्किंग की मदद ली। शुरुआत में 24 बच्चों का व्हाट्सएप ग्रुप बनाया। इसके बाद जब स्कूल खुले तो स्मार्ट क्लास रूम बनाकर ट्राईपॉट में मोबाइल लगाकर विषयवार पढ़ाई कराई।
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फोटो परिचय-4-अभिभावक शोभा सिंह
ऑनलाइन पढ़ाई में नेट ने खूब छकाया
गृहिणी शोभा सिंह (इंदिरा नगर) ने बताया कि बच्चों ने जब बताया कि अब ऑनलाइन पढ़ाई होगी, तब जेहन में यह सवाल उमड़ते-घुमड़ते रहे कि स्कूल बंद हैं तो कैसे होगी पढ़ाई। टीचर की ओर से व्हाट्सग्रुप में वीडियो डाले गए फिर उन्हें देखा और समझा। ऑनलाइन कक्षाएं शुरू हुईं तो बच्चों का भविष्य बर्बाद न होने की उम्मीद जाग गई, लेकिन इसमें तमाम दुश्वारियां भी सामने आईं। कभी आवाज नहीं आती थी, तो कभी वीडियो डाउनलोड नहीं होते थे।
इंसेट---
फोटो परिचय-5-छात्र मो. नादिर खां।
पढ़ाई के लिए खरीदना पड़ा एंड्रायड मोबाइल
11वीं कक्षा के छात्र मोहम्मद नादिर खां ने बताया कि लॉकडाउन में जुलाई माह से ऑनलाइन पढ़ाई शुरू हो गई। मजबूरन उसे एंड्रायड मोबाइल खरीदना पड़ा। ज्यादा मिनट व बड़ी एमबी के वीडियो होने पर डाउनलोड की समस्या सबसे ज्यादा अखरी। समय भी निर्धारित था। टीचरों ने गाइड किया और सफलतापूर्वक पढ़ाई की।
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बच्चों का भविष्य संवारने के लिए अभिभावकों ने भी इस नई तकनीक को अपना लिया। ऐसे में शिक्षक और छात्र-छात्राओं ने इस पर महती भूमिका अदा की। कुछ विद्यालयों में स्मार्ट क्लास की शुरुआत हो गई। अभिनव प्रयोग और सतत कुछ नया करने की चाह में आखिरकार रास्ता भी मिल भी गया। यहां सरस्वती बालिका विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज और आदर्श बजरंग इंटर कॉलेज इसकी बानगी है। जहां सीमित संसाधनों में ही स्टैंड में मोबाइल रखकर ऑनलाइन क्लासों का सीधा प्रसारण कर बच्चों को शिक्षा दी गई। हालांकि, इसमें व्यावहारिक दिक्कतें आईं। कभी नेट फेल तो कभी नेटवर्क। कुल मिलाकर यह नया प्रयोग कोरोना काल की नई इबारत लिख गया।
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फोटो परिचय-2-शैलजा तिवारी
ऑनलाइन के लिए तैयार करना थी चुनौती
शिक्षिका शैलजा तिवारी ने बताया कि मार्च महीने में लॉकडाउन लग गया। स्कूल-कालेज बंद थे। अप्रैल से नया शिक्षा सत्र शुरू हो गया। तभी आदेश आया कि बच्चों को ऑनलाइन शिक्षा दी जानी है। इसके लिए खुद को तैयार करना और बच्चों को पढ़ाना चुनौती थी। प्रधानाचार्य डॉ. अमिता सिंह के निर्देशन में सबसे पहले बच्चों के मोबाइल नंबर लोड कर व्हाट्सग्रुप बनाया। उसके बाद 40 मिनट का एक लेक्चर वीडियो लोड किया। इसमें कुछ तकनीकी दिक्कतें आने पर एक्सपर्ट की मदद ली। अभी भी वह ग्रुप के माध्यम से और स्मार्ट क्लास के जरिए पढ़ा रही हैं।
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फोटो परिचय-3-अनुरुद्ध सिंह
पहले खुद सीखा फिर बच्चों को पढ़ाया
शिक्षक अनुरुद्ध सिंह ने बताया कि ऑनलाइन शिक्षा के लिए पहले घर में ही खुद वीडियो बनाकर सीखा। सोशल नेटवर्किंग की मदद ली। शुरुआत में 24 बच्चों का व्हाट्सएप ग्रुप बनाया। इसके बाद जब स्कूल खुले तो स्मार्ट क्लास रूम बनाकर ट्राईपॉट में मोबाइल लगाकर विषयवार पढ़ाई कराई।
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फोटो परिचय-4-अभिभावक शोभा सिंह
ऑनलाइन पढ़ाई में नेट ने खूब छकाया
गृहिणी शोभा सिंह (इंदिरा नगर) ने बताया कि बच्चों ने जब बताया कि अब ऑनलाइन पढ़ाई होगी, तब जेहन में यह सवाल उमड़ते-घुमड़ते रहे कि स्कूल बंद हैं तो कैसे होगी पढ़ाई। टीचर की ओर से व्हाट्सग्रुप में वीडियो डाले गए फिर उन्हें देखा और समझा। ऑनलाइन कक्षाएं शुरू हुईं तो बच्चों का भविष्य बर्बाद न होने की उम्मीद जाग गई, लेकिन इसमें तमाम दुश्वारियां भी सामने आईं। कभी आवाज नहीं आती थी, तो कभी वीडियो डाउनलोड नहीं होते थे।
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फोटो परिचय-5-छात्र मो. नादिर खां।
पढ़ाई के लिए खरीदना पड़ा एंड्रायड मोबाइल
11वीं कक्षा के छात्र मोहम्मद नादिर खां ने बताया कि लॉकडाउन में जुलाई माह से ऑनलाइन पढ़ाई शुरू हो गई। मजबूरन उसे एंड्रायड मोबाइल खरीदना पड़ा। ज्यादा मिनट व बड़ी एमबी के वीडियो होने पर डाउनलोड की समस्या सबसे ज्यादा अखरी। समय भी निर्धारित था। टीचरों ने गाइड किया और सफलतापूर्वक पढ़ाई की।