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जर्जर हॉस्टल में रहने को छात्र मजबूर
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जीआईसी, बांदा का जर्जर छात्रावास।
- फोटो : BANDA
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बांदा। मंडल मुख्यालय में ब्रिटिश शासन में बनाया गया राजकीय इंटर कालेज का छात्रावास अब जर्जर और खंडहर में बदल गया है, लेकिन इस हालत में भी यहां कई छात्र रह रहे हैं।
कालेज प्रशासन ने छात्रावास भवन को 9 वर्ष पूर्व कंडम घोषित कर दिया था। उधर, कालेज के शिक्षण कक्ष भी मरम्मत के बल पर चल रहे हैं। छात्रावास और कालेज भवन निर्माण के लिए पांच साल पहले शासन को भेजा गया प्रस्ताव ठंडे बस्ते में चला गया।
1940 में जिला मुख्यालय में राजकीय इंटर कालेज की स्थापना की गई थी। इस कालेज से पढ़कर यहां के कई छात्र देश-प्रदेश के उच्च पदों तक पहुंचे हैं, लेकिन कई वर्षों से माध्यमिक शिक्षा विभाग और शासन की उपेक्षा ने इस कालेज के भवन की दुर्दशा कर दी है। आठ दशक पुराने भवन को रंग-रोगन से किसी तरह चलाया जा रहा है।
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कालेज भवन से ज्यादा दुर्दशा इसके छात्रावास की है। 800 छात्रों की क्षमता वाले छात्रावास न सिर्फ अंदरूनी बल्कि बाहर से भी खंडहर दिखाई पड़ रहा है। कई दशकों से मरम्मत या रंगाई-पुताई नहीं हुई है। दीवारों पर घास-फूस उग आई है। उधर, प्रभारी प्रधानाचार्य अभिषेक कुमार का कहना है कि छात्रावास 2010 में कंडम घोषित कर दिया गया था। तब से छात्रावास में रहने की अनुमति नहीं है।
कुछ छात्र जबरन रह रहे हैं, जिन्हें कमरा खाली करने का नोटिस दिया है। उधर, छात्रावास में रह रहे इंटर के छात्र अजीत कुमार, संजय नामदेव, सुनील कुमार, रामकेश आदि का कहना है कि वे गरीब परिवार से हैं। किराए का कमरा लेकर नहीं रह सकते हैं। मजबूरी में रह रहे हैं।
विद्यालय व छात्रावास के निर्माण को पांच साल पहले प्रस्ताव भेजा गया था। जिस पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब दोबारा प्रधानाचार्य से प्रस्ताव मांगा गया है। भवन व छात्रावास के निर्माण में लगभग 12 करोड़ रुपये खर्च होंगे। -विनोद कुमार,जिला विद्यालय निरीक्षक, बांदा।
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कालेज प्रशासन ने छात्रावास भवन को 9 वर्ष पूर्व कंडम घोषित कर दिया था। उधर, कालेज के शिक्षण कक्ष भी मरम्मत के बल पर चल रहे हैं। छात्रावास और कालेज भवन निर्माण के लिए पांच साल पहले शासन को भेजा गया प्रस्ताव ठंडे बस्ते में चला गया।
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1940 में जिला मुख्यालय में राजकीय इंटर कालेज की स्थापना की गई थी। इस कालेज से पढ़कर यहां के कई छात्र देश-प्रदेश के उच्च पदों तक पहुंचे हैं, लेकिन कई वर्षों से माध्यमिक शिक्षा विभाग और शासन की उपेक्षा ने इस कालेज के भवन की दुर्दशा कर दी है। आठ दशक पुराने भवन को रंग-रोगन से किसी तरह चलाया जा रहा है।
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कालेज भवन से ज्यादा दुर्दशा इसके छात्रावास की है। 800 छात्रों की क्षमता वाले छात्रावास न सिर्फ अंदरूनी बल्कि बाहर से भी खंडहर दिखाई पड़ रहा है। कई दशकों से मरम्मत या रंगाई-पुताई नहीं हुई है। दीवारों पर घास-फूस उग आई है। उधर, प्रभारी प्रधानाचार्य अभिषेक कुमार का कहना है कि छात्रावास 2010 में कंडम घोषित कर दिया गया था। तब से छात्रावास में रहने की अनुमति नहीं है।
कुछ छात्र जबरन रह रहे हैं, जिन्हें कमरा खाली करने का नोटिस दिया है। उधर, छात्रावास में रह रहे इंटर के छात्र अजीत कुमार, संजय नामदेव, सुनील कुमार, रामकेश आदि का कहना है कि वे गरीब परिवार से हैं। किराए का कमरा लेकर नहीं रह सकते हैं। मजबूरी में रह रहे हैं।
विद्यालय व छात्रावास के निर्माण को पांच साल पहले प्रस्ताव भेजा गया था। जिस पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब दोबारा प्रधानाचार्य से प्रस्ताव मांगा गया है। भवन व छात्रावास के निर्माण में लगभग 12 करोड़ रुपये खर्च होंगे। -विनोद कुमार,जिला विद्यालय निरीक्षक, बांदा।