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Banda News: करोड़ों का घोटाला दबाने में एक्सईएन डिफाल्टर
Tue, 28 Feb 2023 12:58 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Tue, 28 Feb 2023 12:58 AM IST
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बांदा। जनपद के पीडब्लूडी विभाग में पूर्व में हेड परिवर्तन कर हुए करोड़ों के भ्रष्टाचार को विभागीय अधिकारी दबाने में लगे हैं। मुख्यमंत्री पोर्टल पर दर्ज शिकायतों का भी जवाब नहीं दिया जा रहा है। शासन ने इस पर एक्सईएन को कड़ी फटकार लगाते हुए संदर्भों का निस्तारण न करने पर डिफाल्टर घोषित किया है।
लोक निर्माण विभाग में तत्कालीन अधिशासी अभियंता सुमंत कुमार व अन्य अधिकारियों ने शासन को गुमराह कर बांदा-बहराइच मार्ग पर वर्ष 2011 में स्वीकृत डिवाइडर निर्माण के काम को दोबारा 2021 में स्वीकृत करा लिया। बाद में डिवाइडर निर्माण के लिए आए करोड़ों रुपये के बजट को हेड परिवर्तन कर बंदरबांट कर लिया। मामले का खुलासा होने पर समाजसेवियों ने आंदोलन किए। लेकिन विभागीय अधिकारी चुप्पी साधे रहे। बाद में लेखाधिकारी का तबादला कर दिया गया।
पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष सुशील त्रिवेदी ने मामले की जांच को लेकर पोर्टल के माध्यम से मुख्यमंत्री से मांग की थी। मुख्यमंत्री कार्यालय के सचिव अजय कुमार ओझा ने मुख्य सचिव लोक निर्माण को जांच कराकर रिपोर्ट देने के आदेश दिए थे। लेकिन तत्कालीन अधिशासी अधिकारी मथुरिया मामले को दबाने में लगे हुए हैं। गलत जांच आख्या शासन को भेज दी। शासन ने दोबारा जांच आख्या मांगी तो भेजी ही नहीं। शासन ने एक्सईएन को कड़ी फटकार लगाते हुए डिफाल्टर घोषित कर जांच आख्या मुख्य अभियंता से अपलोड करने के लिए कहा है।
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लोक निर्माण विभाग में तत्कालीन अधिशासी अभियंता सुमंत कुमार व अन्य अधिकारियों ने शासन को गुमराह कर बांदा-बहराइच मार्ग पर वर्ष 2011 में स्वीकृत डिवाइडर निर्माण के काम को दोबारा 2021 में स्वीकृत करा लिया। बाद में डिवाइडर निर्माण के लिए आए करोड़ों रुपये के बजट को हेड परिवर्तन कर बंदरबांट कर लिया। मामले का खुलासा होने पर समाजसेवियों ने आंदोलन किए। लेकिन विभागीय अधिकारी चुप्पी साधे रहे। बाद में लेखाधिकारी का तबादला कर दिया गया।
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पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष सुशील त्रिवेदी ने मामले की जांच को लेकर पोर्टल के माध्यम से मुख्यमंत्री से मांग की थी। मुख्यमंत्री कार्यालय के सचिव अजय कुमार ओझा ने मुख्य सचिव लोक निर्माण को जांच कराकर रिपोर्ट देने के आदेश दिए थे। लेकिन तत्कालीन अधिशासी अधिकारी मथुरिया मामले को दबाने में लगे हुए हैं। गलत जांच आख्या शासन को भेज दी। शासन ने दोबारा जांच आख्या मांगी तो भेजी ही नहीं। शासन ने एक्सईएन को कड़ी फटकार लगाते हुए डिफाल्टर घोषित कर जांच आख्या मुख्य अभियंता से अपलोड करने के लिए कहा है।
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