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Banda News: विश्व की सबसे बुजुर्ग हथिनी वत्सला की स्मृति में स्टेच्यू का अनावरण
Mon, 14 Sep 2026 11:27 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Mon, 14 Sep 2026 11:27 PM IST
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फाेटो -4- पन्ना के अकोला गेट पर स्थापित वत्सला की प्रतिमा।
करतल (बांदा)। गणेश चतुर्थी की पूर्व संध्या पर पन्ना टाइगर रिजर्व के अकोला गेट पर विश्व की सबसे उम्रदराज हथिनी वत्सला की स्मृति में स्थापित स्टेच्यू का अनावरण किया गया।
मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर, पन्ना के प्रभारी मंत्री इंद्र सिंह परमार, विधायक बृजेंद्र प्रताप सिंह समेत वन विभाग के अधिकारी और अन्य लोग मौजूद रहे।
विधानसभा अध्यक्ष ने पूजा-अर्चना कर वत्सला को श्रद्धांजलि अर्पित की। पन्ना टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक वीरेंद्र पटेल ने बताया कि वत्सला के स्टेच्यू की स्थापना में जेके सीमेंट की महत्वपूर्ण भूमिका रही। वत्सला का जन्म 1917 में केरल के नीलांबर जंगल में हुआ था। बाद में वह पन्ना लाई गई और यहीं के वन क्षेत्र में अपना लंबा जीवन बिताया। लोग उसे दादी मां कहकर पुकारते थे।
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वत्सला की पहचान उसकी लंबी सूंड से भी थी। खड़े होने पर उसकी सूंड का दो से तीन फीट हिस्सा जमीन से ऊपर मोड़कर रखना पड़ता था। इसी वजह से वन्यजीव प्रेमी उसे पांच पैरों वाली हथिनी भी कहते थे।
वन्य प्राणी चिकित्सक संजीव कुमार गुप्ता ने बताया कि शुरुआती दिनों में वत्सला से लकड़ी की बोगियां उठाने-रखने का काम कराया जाता था, जिससे उम्र बढ़ने के साथ उसकी सूंड लंबी होती गई। वत्सला की मौत 2025 में हुई थी।
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मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर, पन्ना के प्रभारी मंत्री इंद्र सिंह परमार, विधायक बृजेंद्र प्रताप सिंह समेत वन विभाग के अधिकारी और अन्य लोग मौजूद रहे।
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विधानसभा अध्यक्ष ने पूजा-अर्चना कर वत्सला को श्रद्धांजलि अर्पित की। पन्ना टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक वीरेंद्र पटेल ने बताया कि वत्सला के स्टेच्यू की स्थापना में जेके सीमेंट की महत्वपूर्ण भूमिका रही। वत्सला का जन्म 1917 में केरल के नीलांबर जंगल में हुआ था। बाद में वह पन्ना लाई गई और यहीं के वन क्षेत्र में अपना लंबा जीवन बिताया। लोग उसे दादी मां कहकर पुकारते थे।
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वत्सला की पहचान उसकी लंबी सूंड से भी थी। खड़े होने पर उसकी सूंड का दो से तीन फीट हिस्सा जमीन से ऊपर मोड़कर रखना पड़ता था। इसी वजह से वन्यजीव प्रेमी उसे पांच पैरों वाली हथिनी भी कहते थे।
वन्य प्राणी चिकित्सक संजीव कुमार गुप्ता ने बताया कि शुरुआती दिनों में वत्सला से लकड़ी की बोगियां उठाने-रखने का काम कराया जाता था, जिससे उम्र बढ़ने के साथ उसकी सूंड लंबी होती गई। वत्सला की मौत 2025 में हुई थी।