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‘साहब! पड़ुई तो चमन हो गया, पड़ोसी सोहाना में सड़क भी नहीं’
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
Updated Thu, 14 Jan 2016 12:01 AM IST
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पड़ुई। ‘साहब, आप पड़ुई गांव आए तो चमन हो गया। इस
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गांव से मिला हुआ सोहाना गांव है जहां सड़क भी नहीं है। पुलिस रोजाना
महिलाओं से बदसलूकी करती है। और भी दिक्कतें हैं’।
सोहाना गांव की पार्वती ने चौपाल में मुख्य सचिव से बेहिचक यह दर्द बयां किया तो मुख्य सचिव आलोक रंजन के माथे पर सिकन आ गईं।
अपने नजदीक बैठे डीएम से बोले-‘आप कल सोहाना जाएंगे। और वहां जो भी समस्याएं हैं उनके बारे में एक हफ्ते में मुझे रिपोर्ट देंगे। यहां के एसपी सुन लें कि महिलाओं के साथ बदसलूकी करने वाले पुलिस कर्मियों को तत्काल सस्पेंड करें’।
दूधिया रोशनी से चकाचौंध और सफेद शामियाने तले सैकड़ों ग्रामीणों का हुजूम। महिलाओं की तादाद भी अच्छी खासी। रात 8:30 बजे मुख्य सचिव अपने लाव-लश्कर और काफिले के साथ गांव में दाखिल हुए और सीधे चौपाल के पंडाल में आ जमे।
बीच की मुख्य कुर्सी में मुख्य सचिव और उनके दाएं-बाएं कुर्सी पर कई प्रमुख सचिव और बांदा के डीएम, एसपी सहित अन्य अधिकारी बैठे। एडीएम दयाशंकर पांडेय ने माइक संभाला और बोले-जिस किसी को अपनी कोई समस्या बतानी हो, एक-एक करके बताएं। सूबे के आला अफसर के सामने कौन नहीं चाहता था कि अपना दर्द बयां करे।
माइक पर आने की होड़ लगी। इसी बीच बुंदेलखंड में खेतों में अपना तालाब बनाने की मुहिम चलाने वाले पड़ुई गांव के ही बाशिंदे पुष्पेंद्र भाई ने माइक संभाला और मुख्य सचिव को बताया कि इस गांव में पहली आत्महत्या किसान किशोरी लाल साहू ने की थी।
वह इसलिए कि गांव का नाला और माइनर सूख जाने से उसके खेत की सिंचाई नहीं हो पाई थी। मुख्य सचिव बोले-नहर में पानी लाने की पूरी कोशिश की जाएगी।
गांव के देवेंद्र गांधी ने कहा कि इस गांव में 18 किसानों ने स्टेट बैंक से कर्ज पर ट्रैक्टर लिए थे। किश्त जमा न कर सके तो बैंक ने सारे ट्रैक्टर छीन लिए।
मुख्य सचिव बोले-आप लोग बैंक की एक किश्त जमा करने की कोशिश करो। हम बैंक से ट्रैक्टर वापस दिलाएंगे। नीलाम नहीं होने देंगे।
मुख्य सचिव भीड़ से मुखातिब हुए और पूछा-108 और 102 एंबुलेंस सेवा मिलती है। पंडाल से आवाज आई-नहीं। इसी बीच गांव की आंगनबाड़ी, एएनएम और आशा को एक साथ तलब कर मुख्य सचिव ने उनकी कारगुजारी पूछी।
डीएम सुरेश कुमार तपाक से बोल पड़े-यहां 10 बच्चे कुपोषित पाए गए हैं। मुख्य सचिव ने कहा कि एक हफ्ते में बच्चों को कुपोषण मुक्त करके रिपोर्ट हमें भेजें।
इसी बीच मुख्य सचिव ने सवाल किया कि राशन कार्ड कितनों के पास है ? इस बार भी डीएम बोल पडे़-सर! 352 के पास नहीं हैं। सूची बनवा ली है। जल्द कार्ड बनवा लेंगे।
मुख्य सचिव और ग्रामीणों के बीच चौपाल में सवाल-जवाब और पूछताछ का यह सिलसिला देर रात जारी रहा। रात 9:20 बजे चौपाल खत्म हो गई। मुख्य सचिव अपनी स्विस काटेज में दाखिल हो गए।
कमिश्नर एल वेंकटेश्वर लू, डीआईजी ज्ञानेश्वर तिवारी, डीएम सुरेश कुमार और एसपी राजेंद्र प्रसाद पांडेय के साथ बैठ कर कुछ गुफ्तगू की। अन्य अफसर काटेज के बाहर रहे।
इसके बाद चौपाल स्थल के नजदीक ही स्कूल भवन में तैयार किए गए शुद्ध शाकाहारी भोजन की व्यवस्था थी। भोजन के बाद मुख्य सचिव अपने लिए इसी कैंपस में बनाई गई विशेष स्विस काटेज में रात्रि विश्राम के लिए चले गए।
कई पड़ोसी गांव के ग्रामीण मुख्य सचिव की चौपाल में शामिल नहीं हो पाए। प्रशासन के अफसरों ने उनको यहां से बैरंग लौटा दिया।
अफसरों का कहना था कि चौपाल सिर्फ पड़ुई गांव की है। हालांकि कुछ ग्रामीणों ने यह जता कर विरोध किया कि मुख्य सचिव सिर्फ पड़ुई के नहीं हैं। वह पूरे सूबे के हैं।
हम भी अपने गांव की कुछ दिक्कतें बताना चाहते हैं। पर अफसरों ने एक नहीं सुनीं। ग्रामीणों में नीबी, नौगवां, माधौपुर आदि गांव के लोग शामिल थे।
सोहाना गांव की पार्वती ने चौपाल में मुख्य सचिव से बेहिचक यह दर्द बयां किया तो मुख्य सचिव आलोक रंजन के माथे पर सिकन आ गईं।
अपने नजदीक बैठे डीएम से बोले-‘आप कल सोहाना जाएंगे। और वहां जो भी समस्याएं हैं उनके बारे में एक हफ्ते में मुझे रिपोर्ट देंगे। यहां के एसपी सुन लें कि महिलाओं के साथ बदसलूकी करने वाले पुलिस कर्मियों को तत्काल सस्पेंड करें’।
दूधिया रोशनी से चकाचौंध और सफेद शामियाने तले सैकड़ों ग्रामीणों का हुजूम। महिलाओं की तादाद भी अच्छी खासी। रात 8:30 बजे मुख्य सचिव अपने लाव-लश्कर और काफिले के साथ गांव में दाखिल हुए और सीधे चौपाल के पंडाल में आ जमे।
बीच की मुख्य कुर्सी में मुख्य सचिव और उनके दाएं-बाएं कुर्सी पर कई प्रमुख सचिव और बांदा के डीएम, एसपी सहित अन्य अधिकारी बैठे। एडीएम दयाशंकर पांडेय ने माइक संभाला और बोले-जिस किसी को अपनी कोई समस्या बतानी हो, एक-एक करके बताएं। सूबे के आला अफसर के सामने कौन नहीं चाहता था कि अपना दर्द बयां करे।
माइक पर आने की होड़ लगी। इसी बीच बुंदेलखंड में खेतों में अपना तालाब बनाने की मुहिम चलाने वाले पड़ुई गांव के ही बाशिंदे पुष्पेंद्र भाई ने माइक संभाला और मुख्य सचिव को बताया कि इस गांव में पहली आत्महत्या किसान किशोरी लाल साहू ने की थी।
वह इसलिए कि गांव का नाला और माइनर सूख जाने से उसके खेत की सिंचाई नहीं हो पाई थी। मुख्य सचिव बोले-नहर में पानी लाने की पूरी कोशिश की जाएगी।
गांव के देवेंद्र गांधी ने कहा कि इस गांव में 18 किसानों ने स्टेट बैंक से कर्ज पर ट्रैक्टर लिए थे। किश्त जमा न कर सके तो बैंक ने सारे ट्रैक्टर छीन लिए।
मुख्य सचिव बोले-आप लोग बैंक की एक किश्त जमा करने की कोशिश करो। हम बैंक से ट्रैक्टर वापस दिलाएंगे। नीलाम नहीं होने देंगे।
मुख्य सचिव भीड़ से मुखातिब हुए और पूछा-108 और 102 एंबुलेंस सेवा मिलती है। पंडाल से आवाज आई-नहीं। इसी बीच गांव की आंगनबाड़ी, एएनएम और आशा को एक साथ तलब कर मुख्य सचिव ने उनकी कारगुजारी पूछी।
डीएम सुरेश कुमार तपाक से बोल पड़े-यहां 10 बच्चे कुपोषित पाए गए हैं। मुख्य सचिव ने कहा कि एक हफ्ते में बच्चों को कुपोषण मुक्त करके रिपोर्ट हमें भेजें।
इसी बीच मुख्य सचिव ने सवाल किया कि राशन कार्ड कितनों के पास है ? इस बार भी डीएम बोल पडे़-सर! 352 के पास नहीं हैं। सूची बनवा ली है। जल्द कार्ड बनवा लेंगे।
मुख्य सचिव और ग्रामीणों के बीच चौपाल में सवाल-जवाब और पूछताछ का यह सिलसिला देर रात जारी रहा। रात 9:20 बजे चौपाल खत्म हो गई। मुख्य सचिव अपनी स्विस काटेज में दाखिल हो गए।
कमिश्नर एल वेंकटेश्वर लू, डीआईजी ज्ञानेश्वर तिवारी, डीएम सुरेश कुमार और एसपी राजेंद्र प्रसाद पांडेय के साथ बैठ कर कुछ गुफ्तगू की। अन्य अफसर काटेज के बाहर रहे।
इसके बाद चौपाल स्थल के नजदीक ही स्कूल भवन में तैयार किए गए शुद्ध शाकाहारी भोजन की व्यवस्था थी। भोजन के बाद मुख्य सचिव अपने लिए इसी कैंपस में बनाई गई विशेष स्विस काटेज में रात्रि विश्राम के लिए चले गए।
कई पड़ोसी गांव के ग्रामीण मुख्य सचिव की चौपाल में शामिल नहीं हो पाए। प्रशासन के अफसरों ने उनको यहां से बैरंग लौटा दिया।
अफसरों का कहना था कि चौपाल सिर्फ पड़ुई गांव की है। हालांकि कुछ ग्रामीणों ने यह जता कर विरोध किया कि मुख्य सचिव सिर्फ पड़ुई के नहीं हैं। वह पूरे सूबे के हैं।
हम भी अपने गांव की कुछ दिक्कतें बताना चाहते हैं। पर अफसरों ने एक नहीं सुनीं। ग्रामीणों में नीबी, नौगवां, माधौपुर आदि गांव के लोग शामिल थे।