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Banda News: डीएपी के साथ यूरिया की भी किल्लत
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तिंदवारी। खेती-किसानी में डीएपी के साथ अब यूरिया की भी किल्लत आड़े आ रही है। सैकड़ों बीघे खेत तैयार है, लेकिन डीएपी न मिलने से बुआई पिछड़ रही है। जिन किसानों ने समय से बुआई कर दी थी, उन्हें अब गेहूं में छिड़काव के लिए यूरिया की जरूरत है। समितियों में खाद न होने से किसान परेशान हैं।
कस्बे में खाद विक्रय के तीन केंद्र उत्तरी व दक्षिणी सहकारी समिति और किसान सहकारी संघ हैं। जिनमें क्षेत्र के करीब 36 गांवों के हजारों किसान खाद के लिए इन्हीं सहकारी समितियों के सहारे रहते हैं। अक्तूबर व नवंबर में डीएपी की किल्लत से किसान परेशान रहा। जिन किसानों ने किसी तरह से कुछ खेतों की समय से बुआई कर ली, उन्हें अब तैयार फसलों गेंहू, मटर, सरसों आदि में छिड़काव के लिए यूरिया की जरूरत है। डीएपी के साथ-साथ अब किसानों को अब यूरिया की भी जरूरत है। फिलहाल तीनों समितियों में यूरिया आने की कोई संभावना नहीं है।
किसान अरविंद कुमार का कहना है कि गेहूं में यूरिया खाद का छिड़काव करना है। पहले डीएपी के लिए परेशान रहे हैं, अब यूरिया के लिए के भटकना पड़ रहा है। किसान जागेश्वर का कहना है कि उन्हें मटर सरसों व गेहूं की फसलों में छिड़काव के लिए यूरिया की आवश्यकता है। साथ ही उसके आठ बीघे खेत में बुवाई के लिए तैयार हैं, लेकिन डीएपी भी नहीं मिल पा रही है।
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किसान सहकारी संघ के सचिव सुखराम सिंह का कहना है कि अभी तो डीएपी की मांग पूरी नही हो पा रही है, तो यूरिया कहां से दे दें। अभी तो डीएपी की डिमांड लगी है। इसके बाद अगले सप्ताह तक यूरिया की डिमांड भेजी जाने की उम्मीद है।
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कस्बे में खाद विक्रय के तीन केंद्र उत्तरी व दक्षिणी सहकारी समिति और किसान सहकारी संघ हैं। जिनमें क्षेत्र के करीब 36 गांवों के हजारों किसान खाद के लिए इन्हीं सहकारी समितियों के सहारे रहते हैं। अक्तूबर व नवंबर में डीएपी की किल्लत से किसान परेशान रहा। जिन किसानों ने किसी तरह से कुछ खेतों की समय से बुआई कर ली, उन्हें अब तैयार फसलों गेंहू, मटर, सरसों आदि में छिड़काव के लिए यूरिया की जरूरत है। डीएपी के साथ-साथ अब किसानों को अब यूरिया की भी जरूरत है। फिलहाल तीनों समितियों में यूरिया आने की कोई संभावना नहीं है।
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किसान अरविंद कुमार का कहना है कि गेहूं में यूरिया खाद का छिड़काव करना है। पहले डीएपी के लिए परेशान रहे हैं, अब यूरिया के लिए के भटकना पड़ रहा है। किसान जागेश्वर का कहना है कि उन्हें मटर सरसों व गेहूं की फसलों में छिड़काव के लिए यूरिया की आवश्यकता है। साथ ही उसके आठ बीघे खेत में बुवाई के लिए तैयार हैं, लेकिन डीएपी भी नहीं मिल पा रही है।
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किसान सहकारी संघ के सचिव सुखराम सिंह का कहना है कि अभी तो डीएपी की मांग पूरी नही हो पा रही है, तो यूरिया कहां से दे दें। अभी तो डीएपी की डिमांड लगी है। इसके बाद अगले सप्ताह तक यूरिया की डिमांड भेजी जाने की उम्मीद है।