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दलित महिला से दुष्कर्म में सात वर्ष की कैद
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बांदा। अनुसूचित जाति की महिला को डरा-धमकाकर दुष्कर्म के दोषी को अदालत ने सात वर्ष की कठोर कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माना किया है। जुर्माना न दिया तो एक साल और जेल में रहना होगा। घटना के करीब 20 वर्षों बाद अदालत से फैसला आया।
अभियोजन के मुताबिक बिसंडा थाना क्षेत्र के एक गांव में 3 नवंबर 2001 को सुबह खेत में काम कर रही महिला को गांव के बलवीर सिंह पुत्र बौरा ने अचानक दबोच लिया। उसे घसीटकर नजदीक के नाले में ले गया और डरा-धमकाकर दुष्कर्म किया। धमकी देकर छोड़ा कि किसी को बताया तो जिंदा नहीं छोड़ूंगा। पीड़ित महिला अपनी
सास के साथ थाने पहुंची, लेकिन वहां सुनवाई नहीं हुई। इस पर सीओ बबेरू के यहां दस्तक दी। सीओ के आदेश पर 6 नवंबर 2001 को धारा 376, 323, 506 आईपीसी व एससीएसटी एक्ट की रिपोर्ट दर्ज की गई। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। विवेचना के बाद अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया। अभियोजन की ओर से छह गवाह पेश किए गए।
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दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की दलीलें और बहस सुनने तथा उपलब्ध सुबूतों के आधार पर बुधवार को विशेष न्यायाधीश (एससीएसटी एक्ट) बलराज सिंह ने आरोपी बलवीर को दोषी पाते हुए धारा 376 में सात वर्ष की कैद
और 10 हजार जुर्माना किया। जुर्माना न देने पर एक साल की जेल और होगी। धारा 323 में एक वर्ष की जेल व 2000 रुपये जुर्माना, धारा 506 में 2 वर्ष की कैद व 2000 रुपये जुर्माना किया। जुर्माना न देने पर क्रमश: एक माह और दो माह की अतिरिक्त कैद होगी। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। जेल में बिताई गई अवधि सजा में
शामिल की जाएगी। साथ ही अदालत ने यह भी आदेश दिया कि जुर्माने की रकम 10 हजार रुपये पीड़िता महिला को हर्जाने के रूप में दी जाए। अभियोजन की ओर से एडीजीसी जावित्री प्रसाद विश्वकर्मा और लोक अभियोजक विमल सिंह व चुनूबाद प्रसाद ने पैरवी की।
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अभियोजन के मुताबिक बिसंडा थाना क्षेत्र के एक गांव में 3 नवंबर 2001 को सुबह खेत में काम कर रही महिला को गांव के बलवीर सिंह पुत्र बौरा ने अचानक दबोच लिया। उसे घसीटकर नजदीक के नाले में ले गया और डरा-धमकाकर दुष्कर्म किया। धमकी देकर छोड़ा कि किसी को बताया तो जिंदा नहीं छोड़ूंगा। पीड़ित महिला अपनी
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सास के साथ थाने पहुंची, लेकिन वहां सुनवाई नहीं हुई। इस पर सीओ बबेरू के यहां दस्तक दी। सीओ के आदेश पर 6 नवंबर 2001 को धारा 376, 323, 506 आईपीसी व एससीएसटी एक्ट की रिपोर्ट दर्ज की गई। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। विवेचना के बाद अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया। अभियोजन की ओर से छह गवाह पेश किए गए।
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दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की दलीलें और बहस सुनने तथा उपलब्ध सुबूतों के आधार पर बुधवार को विशेष न्यायाधीश (एससीएसटी एक्ट) बलराज सिंह ने आरोपी बलवीर को दोषी पाते हुए धारा 376 में सात वर्ष की कैद
और 10 हजार जुर्माना किया। जुर्माना न देने पर एक साल की जेल और होगी। धारा 323 में एक वर्ष की जेल व 2000 रुपये जुर्माना, धारा 506 में 2 वर्ष की कैद व 2000 रुपये जुर्माना किया। जुर्माना न देने पर क्रमश: एक माह और दो माह की अतिरिक्त कैद होगी। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। जेल में बिताई गई अवधि सजा में
शामिल की जाएगी। साथ ही अदालत ने यह भी आदेश दिया कि जुर्माने की रकम 10 हजार रुपये पीड़िता महिला को हर्जाने के रूप में दी जाए। अभियोजन की ओर से एडीजीसी जावित्री प्रसाद विश्वकर्मा और लोक अभियोजक विमल सिंह व चुनूबाद प्रसाद ने पैरवी की।