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बांदा में बढ़ रहा है सेकेंड हैंड स्मोकिंग
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बांदा। कोरोना संक्रमण के दौरान सांस को बहुत ही साधकर लेना है। दूसरी तरफ बांदा में सेकेंड हैंड स्मोकिंग (परोक्ष धूम्रपान) बढ़ता जा रहा है। इसकी चपेट में वे लोग भी आ रहे हैं जो खुद धूम्रपान नहीं करते। लेकिन दूसरे के धूम्रपान करने पर उसका धुआं अपने सांस के साथ अंदर ले रहे हैं। इसमें बच्चों से लेकर बड़े तक सांस के मरीज हो रहे हैं।
रानी दुर्गावती मेडिकल कालेज बांदा के चेस्ट रोग विशेषज्ञ डा.मृत्युंजय शर्मा ने बताया कि बांदा में धूम्रपान से होने वाली बीमारियां दिन प्रतिदिन बढ़ रही हैं। ऐसे मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है।
धूम्रपान में इस्तेमाल की जाने वाली तंबाकू के जहरीले तत्व धुएं के साथ फेफड़ों में जा रहे हैं और उन्हें नुकसान पहुंचा रहे हैं। धूम्रपान करने वाला अपने साथ दूसरे की सेहत से भी खिलवाड़ कर रहा है। बताया कि धूम्रपान से होने वाली बीमारियों में फेफड़ों का कैंसर भी है। खुद बीड़ी-सिगरेट न पीने पर भी सामने वाले धूम्रपान के धुएं से इन बीमारियों का खतरा बना रहता है। इसे सेकेंड हैंड स्मोकिंग कहते हैं। इसका सबसे तेज असर महिलाओं और बच्चों पर हो रहा है।
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सिगरेट पीने वाला भले ही फिल्टर से छना हुआ धुआं अंदर ले रहा है, लेकिन बाहर निकल रहा बिना छना धुआं आसपास के लोगों के फेफड़ों में सांस के साथ जा रहा है। बीड़ी-सिगरेट का धुआं में तीन-तीन गुना निकोटिन और टार व 50 गुना अमोनिया होता है।
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खांसी और भूख न लगना प्रमुख लक्षण
बांदा। चेस्ट की बीमारी के प्रमुख लक्षणों में खांसी, सीने में दर्द, भूख न लगना, वजन घटना, खांसी के साथ खून आना इत्यादि है। इससे फेफड़ों का कैंसर भी हो सकता है। डा.शर्मा ने बताया कि ऐसे लक्षण मिलने पर तत्काल योग्य चिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए। इसके अलावा परहेज भी जरूरी है। तंबाकू से खुद बचें और अपने आसपास व घर-परिवार को भी धूम्रपान से दूर रखें। यह बहुत ही जानलेवा है।
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रानी दुर्गावती मेडिकल कालेज बांदा के चेस्ट रोग विशेषज्ञ डा.मृत्युंजय शर्मा ने बताया कि बांदा में धूम्रपान से होने वाली बीमारियां दिन प्रतिदिन बढ़ रही हैं। ऐसे मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है।
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धूम्रपान में इस्तेमाल की जाने वाली तंबाकू के जहरीले तत्व धुएं के साथ फेफड़ों में जा रहे हैं और उन्हें नुकसान पहुंचा रहे हैं। धूम्रपान करने वाला अपने साथ दूसरे की सेहत से भी खिलवाड़ कर रहा है। बताया कि धूम्रपान से होने वाली बीमारियों में फेफड़ों का कैंसर भी है। खुद बीड़ी-सिगरेट न पीने पर भी सामने वाले धूम्रपान के धुएं से इन बीमारियों का खतरा बना रहता है। इसे सेकेंड हैंड स्मोकिंग कहते हैं। इसका सबसे तेज असर महिलाओं और बच्चों पर हो रहा है।
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सिगरेट पीने वाला भले ही फिल्टर से छना हुआ धुआं अंदर ले रहा है, लेकिन बाहर निकल रहा बिना छना धुआं आसपास के लोगों के फेफड़ों में सांस के साथ जा रहा है। बीड़ी-सिगरेट का धुआं में तीन-तीन गुना निकोटिन और टार व 50 गुना अमोनिया होता है।
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खांसी और भूख न लगना प्रमुख लक्षण
बांदा। चेस्ट की बीमारी के प्रमुख लक्षणों में खांसी, सीने में दर्द, भूख न लगना, वजन घटना, खांसी के साथ खून आना इत्यादि है। इससे फेफड़ों का कैंसर भी हो सकता है। डा.शर्मा ने बताया कि ऐसे लक्षण मिलने पर तत्काल योग्य चिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए। इसके अलावा परहेज भी जरूरी है। तंबाकू से खुद बचें और अपने आसपास व घर-परिवार को भी धूम्रपान से दूर रखें। यह बहुत ही जानलेवा है।